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2जी: ‘कुछ लोगों ने चालाकी से कुछ चुनिंदा तथ्यों का इंतज़ाम किया और एक घोटाला पैदा कर दिया’

विशेष सीबीआई जज ने कहा, दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की अकर्मण्यता ने लोगों को एक बड़े घोटाले की अटकलों के लिए विवश किया.

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी अदालती फैसले के बाद. (फोटो: पीटीआई)

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी अदालती फैसले के बाद. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन में राजस्व को भारी नुकसान के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) तथा सीबीआई के आकलन को बड़ा झटका देते हुए एक विशेष अदालत ने गुरुवार को कहा कि कुछ लोगों ने चालाकी से कुछ चुनिंदा तथ्यों का इंतजाम किया और एक घोटाला पैदा कर दिया जबकि कुछ हुआ ही नहीं था.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में आकलन व्यक्त किया था कि 2जी घोटाले की वजह से राजस्व को 1.76 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हुआ. इससे उस समय की संप्रग सरकार हिल उठी थी.

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा था कि 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस आवंटन में राजस्व को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. उच्चतम न्यायालय ने दो फरवरी 2012 को लाइसेंस आवंटन निरस्त कर दिए थे.

2जी से संबंधित तीन मामलों में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और अन्य को गुरुवार को बरी करने वाले विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा कि दूरसंचार विभाग के संबंधित सरकारी अधिकारियों के विभिन्न कार्यकलापों और अकर्मण्यता की वजह से हर किसी ने समूचे मामले में एक बड़ा घोटाला देखा.

राजा और अन्य से संबंधित सीबीआई के मामले में अदालत ने अपने 1,552 पन्नों के आदेश में कहा, हालांकि अधिकारियों के विभिन्न कार्यकलापों और अकर्मण्यता के चलते, जैसा कि ऊपर उल्लिखित है, किसी ने भी दूरसंचार विभाग के रुख पर भरोसा नहीं किया और हर किसी ने एक बड़ा घोटाला देखा जबकि कुछ हुआ ही नहीं. इन कारकों ने लोगों को एक बड़े घोटाले के बारे में अटकलों के लिए विवश किया.

सैनी ने कहा, इस तरह, कुछ लोगों ने चालाकी से कुछ चुनिंदा तथ्यों का इंतजाम कर और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर एक घोटाला पैदा कर दिया.

विशेष न्यायाधीश ने यह भी कहा कि दूरसंचार विभाग के नीतिगत फैसले विभिन्न फाइलों में बिखरे हुए थे और इसलिए उनका पता लगाना तथा उन्हें समझना मुश्किल था.

अदालत ने दूरसंचार विभाग के आचरण की आलोचना की

2जी घोटाला मामलों में फैसला सुनाने वाली विशेष अदालत ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) की इस दलील को लेकर आलोचना की कि एस्सार ग्रुप और लूप टेलीकॉम लिमिटेड के प्रमोटरों ने जालसाजी से टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस हासिल करके धोखाधड़ी की. अदालत ने कहा कि डीओटी खुद को पीड़ित दिखाने का प्रयास कर रहा है.

डीओटी के आचरण पर सवाल खड़े करते हुए अदालत ने कहा कि अगर विभाग को लगा कि एक लाइसेंसी कंपनी द्वारा दूसरे को अत्यधिक ऋण फंडिंग से 2005 यूनीफाइड एक्सेस सर्विस लाइसेंस दिशानिर्देशों की उपधारा आठ की भावना का उल्लंघन किया गया तो वह अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र था.

विशेष अदालत के न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा कि डीओटी खुद को पीड़ित दिखाने का प्रयास कर रहा है और उसने उचित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की.

इसके अलावा, विशेष अदालत ने डीओटी की मसौदा प्रेस विज्ञप्ति पर पूर्व अटार्नी जनरल जीई वाहनवती की विवादित गवाही की आलोचना की. अदालत ने कहा कि वाहनवती ने आधिकारिक रिकॉर्ड से जानबूझकर पल्ला झाड़ लिया.

संप्रग सरकार के समय सालिसिटर जनरल और अटार्नी जनरल के रूप में सेवाएं देने वाले वाहनवती इस मामले में गवाह के रूप में पेश हुए थे.

वाहनवती ने टूजी स्पैक्ट्रम के आवंटन के लिए संशोधित नीति के संबंध में दूरसंचार विभाग की संशोधित प्रेस विज्ञप्ति को तार्किक एवं निष्पक्ष बताया था लेकिन बाद में उन्होंने अदालत में इसके उलट गवाही दी थी.

राजा ने नहीं बल्कि पीएमओ के अधिकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री से तथ्य छिपाए: अदालत

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने ए. राजा के पत्र के सबसे प्रासंगिक और विवादित हिस्से को उनसे छिपाया और तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने के लिए तत्कालीन दूरसंचार मंत्री को दोषी नहीं माना जा सकता है. 2जी स्पेक्ट्रम मामले में विशेष अदालत ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की है.

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि राजा ने पत्रों में सिंह को टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस देने संबंधी नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों मसलन पहले आओ, पहले पाओ और आवेदन की अंतिम तिथि पर गुमराह किया.

विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने टूजी स्पेक्ट्रम के तीन अलग-अलग मामलों में सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा, ए. राजा के पत्र के सबसे प्रासंगिक तथा विवादित हिस्सों को तत्कालीन प्रधानमंत्री से छिपाने वाले ए. राजा नहीं थे बल्कि पुलक चटर्जी ने टीकेए नायर के साथ मिलकर यह किया है.

नौकरशाहों के ख़िलाफ़ अदालत ने की बेहद तल्ख़ टिप्पणियां

शीर्ष के नौकरशाहों के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणियां करते हुए न्यायाधीश ने कहा, अंत में, अभियोजन पक्ष के इस दावे में मुझे कोई दम नजर नहीं आता है कि या तो तत्कालीन प्रधानमंत्री को ए. राजा की ओर से गुमराह किया गया या फिर उनके सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया.

सैनी ने कहा कि इस बारे में सीबीआई की दलीलें तथ्यों से परे थीं ताकि अदालत के जेहन को पूर्वाग्रह से ग्रस्त किया जा सके. उन्होंने कहा, अभियोजन ने बड़े नाम लेकर और देश के प्रधानमंत्री के अधिकार की बात करते हुए दलीलें दी थीं ताकि अदालत के जेहन को पूर्वाग्रह से प्रभावित किया जा सके.

अदालत ने कहा कि सिंह के समक्ष तथ्यों को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने का दोष राजा को नहीं दिया जा सकता क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री के कार्यालय ने ही उनके समक्ष पूरे तथ्य पेश नहीं किए. चटर्जी के एक नोट का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि वह प्रधानमंत्री को भेजे गए राजा के पत्र से कहीं अधिक बड़ा था.

अदालत ने कहा, प्रधानमंत्री बेहद व्यस्त अधिकारी होते हैं. इतने बड़े नोट को पढ़ने का वह वक्त कहां से निकाल पाते. प्रधानमंत्री से फाइलों में डूब जाने की उम्मीद नहीं की जाती. उनके लिए पुलक चटर्जी के इस नोट को पढ़ने से कहीं आसान ए. राजा के पत्र को पढ़ना और समझना होता. यह आसान और बेहतर होता.

राजा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख विभिन्न मुद्दों पर दूरसंचार विभाग के फैसले के बारे में सूचित किया था. इसमें नए लाइसेंस के लिए आशय-पत्र जारी करने और अपर्याप्त स्पेक्ट्रम होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदनों को देखने की बात भी शामिल थी.

फैसला हैरान करने वाला है: प्रशांत भूषण

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस मामले में सभी आरोपियों को बरी करने के अदालत के फैसले को हैरान करने वाला बताया.

भूषण ने कई ट्वीट करके कहा, निचली अदालत द्वारा टूजी घोटाले के सभी आरोपियों को बरी करना पूरी तरह गलत है और यह संकेत देता है कि प्रभावशाली लोग इस देश की न्याय व्यवस्था के प्रति जवाबदेह नहीं हैं.

भूषण ने एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर जनहित याचिका के लिए दलीलें दी थीं. इसी पर उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था.

अदालत के फैसले के बाद सरकार ने कहा- स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई थी गड़बड़ी

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में विशेष अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले से अविचलित सरकार ने दोहराया कि पिछली संप्रग सरकार द्वारा उक्त स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण और भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी.

दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि आठ कंपनियों के रद्द हुए 122 दूरसंचार लाइसेंसों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि जांच एजेंसियां इस मामले में अदालत के फैसले पर आगे क्या कदम उठाती हैं.

उन्होंने कहा कि दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी ही आवंटन का श्रेष्ठ तरीका है न कि पहले आओ-पहले पाओ की नीति, जिसका पालन संप्रग सरकार ने 2001 की कीमतों को आधार बनाते हुए किया. मंत्री ने कहा, कांग्रेस पार्टी जो चकमा दे रही है वो पूरी तरह गलत है. इसी मामले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संप्रग सरकार की पहले आओ-पहले पाओ नीति कुछ चुनिंदा लोगों को सेवा देने के लिए थी और स्पेक्ट्रम आवंटन में भारी मनमानी हुई.

उन्होंने स्पेक्ट्रम आवंटन में भ्रष्टाचार के बारे में उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र किया और 2जी पर अदालती फैसले को कांग्रेस द्वारा सम्मान के तमगे की भांति लेने पर सवालिया निशान लगाया. वहीं सिन्हा ने 2008 में किया गया स्पेक्ट्रम आवंटन गलत था यह जिक्र करने के लिए बाद की नीलामियों में मिले धन का जिक्र किया.

सिन्हा ने कहा, एक बात तो स्पष्ट है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया गलत थी और भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी. उन्होंने कहा, आज सुनवाई अदालत ने अपना फैसला सुनाया है और जांच एजेंसियां देखेंगी और आगे की कार्रवाई का फैसला करेंगी.

अदालती फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी की नैतिक जीत के दावों को मंत्री ने महज चकमा करार दिया और कहा कि अनेक एजेंसियां उक्त प्रक्रिया को गलत ठहरा चुकी हैं. मंत्री ने इस बारे में उच्चतम न्यायालय के 2012 के फैसले का भी जिक्र किया जिसमें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री राजा के कार्यकाल में जारी सभी 122 दूरसंचार लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे.

उल्लेखनीय है कि राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक नेता कनिमोझी सहित सारे आरोपियों को बरी कर दिया. विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है.

अनुमानित नुकसान के आंकड़े मनगढंत थे: ए. राजा

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने गुरुवार को कहा कि सुनवाई अदालत द्वारा उन्हें सभी आरोपों से बरी करना यह साबित करता है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनुमानित नुकसान के आंकड़े मनगढंत थे.

ए. राजा देश में भ्रष्टाचार के अपनी तरह के इस सबसे बड़े मामले के केंद्र में हैं. वे 2008 में कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार में दूरसंचार मंत्री थे जबकि आठ कंपनियों को 122 दूरसंचार स्पेक्ट्रम लाइसेंस जारी किए गए.

राजा ने कहा कि उनके कदम आम जनता के फायदे के लिए थे क्योंकि दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा आने से मोबाइल कॉल शुल्क न्यूनतम स्तर पर आ गए. अदालती फैसला आने के बाद राजा ने एक बयान में कहा है- मेरे कामों के सही होने के बारे में मेरा दृढ़ विश्वास और देश की न्याय प्रणाली में मेरी आस्था सही साबित हुई है.

राजा ने कहा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए उनका फैसला राष्ट्रीय दूरसंचार नीति व दूरसंचार नियामक ट्राई की सिफारिशों के अनुसार ही था.

अदालत के फैसले से संसदीय समिति के रुख़ को बल मिला: चाको

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी चाको ने गुरुवार को कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक नेता कनिमोझी को बरी करने का विशेष अदालत का फैसला इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति द्वारा अपनाए गए रुख को रेखांकित करता है.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच करने वाली संयुक्त संसदीय समिति के प्रमुख रहे चाको ने कोच्चि में कहा, माननीय सीबीआई अदालत का फैसला जेपीसी द्वारा अपनाए गए इस रुख को बल प्रदान करता है कि महालेखा परीक्षक एवं नियंत्रक द्वारा लगाया गया नुकसान का अनुमान गलत है.

चाको ने कहा, कैग ने अनुमानित नुकसान का आकलन करने में अपने क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण किया. कैग से सरकारी खजाने को हुए वास्तविक नुकसान के आकलन की उम्मीद की जाती है. लेकिन उन्होंने अनुमानित नुकसान के आधार पर अपना आकलन किया. आज कोई साबित नहीं कर सकता कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ.

मार्च, 2011 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने 2जी स्पेक्ट्रम मुद्दे की जांच के लिए चाको की अगुवाई में 30 सदस्यीय संसदीय समिति बनाई थी. लोकसभा अध्यक्ष को अक्टूबर, 2013 में दी गई समिति की विवादास्पद रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीनचिट दी गई थी.

2जी मामले के फैसले में सीबीआई की नाकामी उजागर: माकपा

माकपा ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में सभी आरोपियों को बरी करने के विशेष अदालत के फैसले को सीबीआई की नाकामी का परिणाम बताया है.

पार्टी पोलित ब्यूरो की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले में अनुत्तरित सवालों के जवाब मिलने के बजाय सवाल और अधिक बढ़ गए हैं.

माकपा ने कहा कि कैग की रिपोर्ट के आधार पर पहले से ही स्पष्ट था कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उच्चतम न्यायालय ने भी कुछ संचार कंपनियों द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन का दुरुपयोग करने की ओर इशारा किया था.

पार्टी ने कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सीबीआई पुख्ता सबूत जुटाने में नाकाम रही. इस वजह से अदालत ने फैसले में सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी करने की बात कही. माकपा ने इस मामले के सभी कानूनी पहलुओं को दुरुस्त करने की जरूरत पर बल दिया जिससे दोषियों को उपयुक्त सजा मिल सके.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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