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क्यों गुमशुदा बच्चियों को तलाशने में नाक़ाम साबित हो रही है दिल्ली पुलिस?

आंकड़ों के मुताबिक बीते आठ सालों में ऐसी गुमशुदा बच्चियों की संख्या में तीन से चार गुना तक इज़ाफ़ा हुआ है, जिन्हें खोज पाने में पुलिस नाकाम रही.

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प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली: दिल्ली में गुमशुदा होने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच गुमशुदा हुई बच्चियों को खोज पाने में पुलिस की नाकामी का बढ़ना चिंता का विषय है.

दिल्ली पुलिस द्वारा आरटीआई में जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले आठ सालों में ऐसी गुमशुदा बच्चियों की संख्या में तीन से चार गुना तक इजाफा हुआ है, जिन्हें खोज पाने में पुलिस नाकाम रही है.

आरटीआई कार्यकर्ता राजहंस बंसल को गुमशुदा बच्चों के बारे में पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा द्वारा मुहैया कराई गई जानकारी में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.

इनके मुताबिक दिल्ली में साल 2010 में कुल 5,091 नाबालिग बच्चे लापता हुए थे. इनमें से 4,446 बच्चे खोज लिए गए. लेकिन पुलिस बाकी 645 में से 350 लड़के और 295 लड़कियां को खोज पाने में नाकाम रही.

साल 2016 में कुल लापता बच्चों का आंकड़ा बढ़कर 6,921 हो गया. इनमें से खोजे नहीं जा सके बच्चों की संख्या साल 2010 की तुलना में लगभग तीन गुना इजाफे के साथ 1,894 हो गई.

इनमें 667 लड़के और 1,227 लड़कियां खोजा नहीं जा सका. उल्लेखनीय है कि पिछले आठ सालों में खोजे नहीं जा सके बच्चों की साल 2016 में संख्या सर्वाधिक रही.

इस बारे में साल 2017 में 31 मई तक के आंकड़े गुमशुदा बच्चों को खोज पाने में पुलिस की नाकामी के स्तर को बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं.

इस साल 31 मई तक दिल्ली में कुल 2,687 नाबालिग बच्चों (1,018 लड़के और 1,669 लड़कियां) के गुमशुदा होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करायी गई. इनमें से 1,164 बच्चों में से 404 लड़के और 760 लड़कियां को पुलिस खोज पाने में नाकाम रही है.

हालांकि पिछले सालों की तुलना में साल 2015 में दिल्ली में गुमशुदा हुए बच्चों की संख्या सर्वाधिक रही. कुल 7,928 में से 3,636 लड़के और 4,292 लड़कियां गुमशुदा हुए. इनमें से 6,150 बच्चों को पुलिस ने खोज लिया जबकि 1,778 बच्चे खोजे नहीं जा सके.

साल 2010 से गुमशुदा बच्चों की संख्या में पांच साल तक इजाफा होने के बाद साल 2016 में मामूली गिरावट दर्ज की गई.

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