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कौन हैं मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े, जिन पर भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़काने का आरोप है

दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने महाराष्ट्र बंद को वापस लेने का ऐलान करते हुए सरकार से मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े को जल्द गिरफ़्तार करने की मांग की है.

मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े (फोटो: फेसबुक)

मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े (फोटो: फेसबुक)

एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव में पेशवा सेना पर ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत की 200वीं सालगिरह मानने पहुंचे दलितों पर हमला के बाद बुधवार को महाराष्ट्र बंद का ऐलान वापस ले लिया गया है. दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने प्रेस कांफ्रेंस कर महाराष्ट्र बंद वापस लेने का ऐलान किया.

आंबेडकर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि दलितों हुए हमले का मास्टरमाइंड समस्त हिंदू अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के अध्यक्ष संभाजी भिड़े पर मामला दर्ज करने के लिए सरकार को कहा है.

उन्होंने कहा, ‘मामले के पीछे एकबोटे और भिड़े का हाथ हैं और इन दोनों पर वही मामला चलना चाहिए, जो याकूब मेमन पर चला था.’

भाजपा पर हमला करते हुए आंबेडकर ने कहा, ‘महाराष्ट्र की भाजपा सरकार एकबोटे और भिड़े को गिरफ्तार न करके अपनी कब्र खुद खोद रही है. बंद में भाग लेने वाले सिर्फ दलित नहीं बल्कि महाराष्ट्र की 50 प्रतिशत लोग हैं.’

कौन है मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े?

मिलिंद एकबोटे

56 वर्षीय मिलिंद एकबोटे का पूरा परिवार आरएसएस के जुड़ा हुआ है. मुंबई मिरर के अनुसार, एकबोटे 1997 से लेकर 2002 तक भाजपा का पार्षद रहे हैं. टिकट न मिलने से निर्दलीय लड़ने के बाद जीते और 2007 में चुनाव हारने के बाद से ही वे हिंदू एकता मंच नाम का संगठन चला रहे हैं.

एकबोटे की भाभी फिलहाल पुणे महानगर पालिका में भाजपा पार्षद हैं. एकबोटे ने 2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

एकबोटे पर दंगा, अतिक्रमण, आपराधिक धमकी और दो समुदायों के बीच शत्रुता फैलाने के प्रयासों के कुल 12 मामले दर्ज हैं. उसमें से पांच मामलों में दोषी भी साबित हो चुके हैं.

पुणे में वैलेंटाइन्स डे के दिन प्रेमी जोड़ों के खिलाफ बड़े दर्जे पर मोरल पोलिसिंग मामले में भी एकबोटे शामिल हैं. एकबोटे ने हिंसा पर बयान जारी कर कहा कि वे इस हिंसा की निंदा करते हैं और कहा कि आंबेडकर 19वीं सदी में अंग्रेजों से लड़ने वाले योद्धा थे. उन्होंने दावा किया है कि उनके संगठन में बड़ी संख्या में दलित हैं.

संभाजी भिड़े

85 वर्षीय संभाजी भिड़े आरएसएस के प्रचारक हैं.

न्यूक्लियर फिजिक्स में एमएससी भिड़े पुणे के फर्गुसन कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं. 1980 के दौर में उन्होंने शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान नाम की एक संस्था बनाई.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संभाजी भिड़े. (फोटो साभार: ट्विटर)

भिड़े सतारा, सांगली और कोल्हापुर इलाकों में भिड़े गुरुजी नाम से बहुत मशहूर हैं और साइकिल से चलना पसंद करते हैं. उनकी संस्था का मुख्य काम शिवाजी महाराज के बारे में लोगों को बताना है और उनके भाषण अल्पसंख्यकों के खिलाफ होते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी है नजदीकी

2014 में सांगली दौरे पर मोदी कह रहे हैं, ‘मैं सांगली खुद से नहीं आया बल्कि वे भिड़े गुरुजी के हुकुम पर आया हूं और वे हम सबके लिए एक आदर्श के समान है.’

मोदी ने भिड़े की तारीफ करते हुए कहा था कि वे महापुरुष हैं और बहुत सालों से वो उन्हें जानते हैं.

संभाजी भिड़े 29 दिसंबर को गोविंद गायकवाड़ की समाधि को कथित रूप से तोड़ने के मामले में भी शामिल हैं.

गोविंद गायकवाड़ ने संभाजी महाराज का अंतिम संस्कार किया था क्योंकि मुगल फरमान था कि कोई शव को छू नहीं सकता. गोविंद दलित जाति के थे.

भिड़े का कहना है कि यह झूठ है कि दलित समाज के किसी व्यक्ति ने संभाजी महाराज का अंतिम संस्कार किया था, बल्कि महाराष्ट्र सरकार को अध्ययन कर सच सबको बताना चाहिए कि मराठा समुदाय के व्यक्ति ने महाराज का अंतिम संस्कार किया था.