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तीन तलाक़ विधेयक हिरण की खाल में लोमड़ी वाली चालाकी का हथकंडा: विपक्ष

विपक्ष ने कहा, तलाक़ एक दीवानी मामला, यह फौज़दारी अपराध नहीं हो सकता. इसे आपराधिक जुर्म बनाने का उद्देश्य महिलाओं का संरक्षण नहीं, मुस्लिमों को प्रताड़ित करना और राजनीतिक लाभ लेना है.

भारतीय संसद (रॉयटर्स)

भारतीय संसद (रॉयटर्स)

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक संबंधी विधेयक लोकसभा में तो पारित हो गया लेकिन राज्यसभा में यह लंबित रह गया. विरोध करने वाले विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार दीवानी मामले को आपराधिक बना रही है, जिसका मकसद सिर्फ़ राजनीतिक लाभ लेना और मुस्लिमों को प्रताड़ित करना है.

विपक्षी दल माकपा ने शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए तीन तलाक विधेयक का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

केरल माकपा सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने पार्टी के मुखपत्र देशाभिमानी में प्रकाशित एक लेख में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीति लाभ हासिल करने के लिए मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, 2017 का इस्तेमाल कर रहे हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक में मुस्लिमों प्रताड़ित करने का छुपा हुआ एजेंडा भी शामिल है. उन्होंने कहा, इस दुष्प्रचार के लिए हिरण की खाल में लोमड़ी वाली चालाकी का हथकंडा अपनाया जा रहा है.

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य ने कहा कि तलाक एक दीवानी मामला है और इसे आपराधिक जुर्म बनाने का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं का संरक्षण नहीं बल्कि इस समुदाय मुस्लिमों को निशाना बनाना है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एक साथ तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का स्वागत करती है लेकिन मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं के साथ छल है.

माकपा ने हमेशा शुरू से तीन तलाक प्रथा का विरोध किया है. बालाकृष्णन ने कहा कि यह महिलाओं की प्रतिष्ठा एवं सम्मान को धूमिल करता है. वाम नेता ने कहा कि इस विधेयक को चर्चा एवं आवश्यक सुधारों के लिए चयन समिति के पास भेज देना चाहिए.

उन्होंने दावा किया कि केंद्र ने जल्दबाजी में संसद में यह विधेयक पेश किया और लोकसभा में चार घंटे की चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया.

संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के मंत्रियों ने कार्यवाही बाधित की: कांग्रेस

कांग्रेस ने राज्यसभा में गतिरोध के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है जिसके कारण तीन तलाक विधेयक लंबित रह गया. कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल पर संसद का इस्तेमाल रबड़ स्टांप की तरह करने का आरोप लगाया.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि देश के संसदीय इतिहास में पहली बार लोगों ने देखा होगा कि मंत्रियों ने कार्यवाही बाधित की जिससे पिछले तीन दिन में गतिरोध हुआ और तीन तलाक विधेयक नहीं लाया जा सका.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, वे सत्तारूढ़ भाजपा राज्यसभा में इस गतिरोध के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं. पहली बार केंद्रीय मंत्री, सत्तारूढ़ दल के सांसद राज्यसभा में खड़े नजर आए और कार्यवाही बाधित की.

आजाद ने कहा कि हालात के लिए और आगे जांच के लिए तीन तलाक विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजे जाने में नाकामी के लिए सरकार जिम्मेदार है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा विधेयक में मुस्लिम महिला की देखभाल के लिए प्रावधान नहीं है जिनके पति को जेल भेजा जाएगा. लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार संसद को गंभीरता से नहीं ले रही और इसका इस्तेमाल केवल रबड़ स्टांप की तरह कर रही है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, उनका संसद में भरोसा नहीं है. वे केवल अध्यादेश में भरोसा रखते हैं. वे संसद का इस्तेमाल केवल रबड़ स्टांप की तरह करते हैं.

तीन तलाक़ विधेयक में गंभीर कमियां: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम महिलाओं से संबंधित तीन तलाक विधेयक में कई गंभीर त्रुटियां और कमियां होने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि अगर यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में पारित होकर कानून बन जाता है तो इससे मुस्लिम महिलाएं दोहरे अत्याचार का शिकार होंगी.

मायावती ने एक बयान में कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अड़ियल व अलोकतांत्रिक रवैये के कारण अगर यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में पारित होकर कानून बन जाता है तो इससे मुस्लिम महिलाएं दोहरे अत्याचार का शिकार होंगी तथा उनका हित होने के बजाय अहित ही होगा.

मायावती ने कहा कि तीन तलाक पर प्रतिबंध से संबंधित कानून बनाने को लेकर बसपा सहमत है, परंतु वर्तमान विधेयक में सज़ा आदि का जो प्रावधान किया गया है वह तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए और भी ज़्यादा बुरा होकर उनके लिए दिन-प्रतिदिन की और भी नई समस्याएं पैदा करेगा जिससे उनका जीवन काफी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा तथा वे शोषण का शिकार होंगी.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को इस प्रकार की कमियों पर खुले मन से विचार करना चाहिए जिसके संबंध में बेहतर विचार-विमर्श हेतु इस विधेयक को राज्यसभा की प्रवर समिति को भेजने की मॉंग की जा रही है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस मामले में इतनी जल्दबाजी की है कि विपक्षी पार्टियों से थोड़ा सलाह-मशविरा करना भी जरूरी नहीं समझा.

उन्होंने कहा कि दरअसल मोदी सरकार को मनमानी करने की आदत हो गई है. चाहे नोटबंदी का अपरिपक्व फैसला हो या काफी जल्दबाजी में जीएसटी का अत्यंत कष्टदायी निर्णय या फिर अब तीन तलाक का महत्वपूर्ण मामला हो, मोदी सरकार द्वारा घोर मनमानी के साथ-साथ इनके अड़ियल रवैये अपनाने के कारण हर नई व्यवस्था देश की जनता के लिए जान का जंजाल ही साबित हुई है.

मायावती ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार अपनी मुस्लिम-विरोधी नीति व कार्यकलाप के कारण पूरे समाज को उद्वेलित करना चाहती है ताकि यह मामला भी हिंदू-मुस्लिम बन जाए और फिर भाजपा अपनी राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ की रोटी सेंकती रहे.

सरकार ने कांग्रेस पर तीन तलाक़ विधेयक का मार्ग अवरुद्ध करने का लगाया आरोप

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने शुक्रवार को संसद के शीतकालीन सत्र को सार्थक बताया जिसमें लोकसभा में कामकाज 91.58 प्रतिशत और राज्यसभा में 56.29 प्रतिशत रहा.

सत्र के दौरान लोकसभा में 14 विधेयक पेश किये गए और 13 विधेयक पारित हुए जबकि राज्यसभा में 9 विधेयक पारित हुए. तीन तलाक से जुड़े विधेयक के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में कुमार ने कांग्रेस पर राज्यसभा में विधेयक का मार्ग अवरुद्ध करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि सरकार तीन तलाक संबंधी विधेयक और अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले विधेयक को पारित कराने को प्रतिबद्ध है. संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सभी दलों का सहयोग महत्वपूर्ण है.

बजट सत्र में तीन तलाक़ विधेयक पारित कराने का प्रयास होगा

सरकार विवादास्पद तीन तलाक विधेयक को अब बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पारित कराने का प्रयास करेगी. सरकार का कहना है कि वह इस विधेयक के लिए प्रतिबद्ध है.

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने शीतकालीन सत्र के समापन पर कांग्रेस पर निशाना साधा. कांग्रेस ने लोकसभा में इस विधेयक का विरोध नहीं किया था लेकिन उच्च सदन में इसका विरोध किया.

कुमार ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी महिला सशक्तिकरण के बारे में बात करते हैं लेकिन जब इसको मूर्त रूप दिए जाने की बात आती है तो वह भाग जाते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा में कांग्रेस हर दिन विधेयक को लटकाने के लिए एक बहाने के साथ आई. कुमार ने कहा कि हालांकि सरकार विधेयक को पारित कराने और हमारी मुस्लिम बहनों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

एक बार में तीन तलाक को फौजदारी अपराध बनाने वाले मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 के तहत दोषी मुस्लिम पुरुषों को तीन वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है.

इस विधेयक को 28 दिसंबर को लोकसभा में पारित किया जा चुका है. किंतु राज्यसभा में विपक्ष द्वारा इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़ जाने के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका.

जब 29 जनवरी को बजट सत्र की शुरूआत होगी तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को विचार-विमर्श के लिए लाया जाएगा.

सरकार के सूत्रों ने बताया कि वे बजट सत्र के पहले चरण में कोई रास्ता निकालेंगे और किसी आम सहमति पर पहुंचने के लिए विपक्ष के साथ वार्ता की जाएगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार बजट सत्र के लिए कार्यक्रम की एक सूची तैयार कर रही है. इसमें इस मुद्दे को लेकर एक अध्यादेश लाए जाने की संभावना नहीं है और अगले सत्र में विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जाएगा.

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा था कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद एक साथ तीन तलाक की परिपाटी जारी है और इसलिए सरकार के लिए यह जरूरी था कि वह इसके लिए कानून लेकर आए.

अब सरकार के पास सीमित विकल्प रह गए हैं

संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक संबंधी विधेयक के लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में लंबित रह जाने के कारण अब सरकार के पास इसे कानूनी जामा देने के लिए बहुत सीमित विकल्प रह गए हैं.

इस विधेयक के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर राज्यसभा के पूर्व महासचिव वीके अग्निहोत्री ने बताया, सरकार के पास एक विकल्प है कि वह अध्यादेश जारी कर दे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करना उच्च सदन के प्रति असम्मान होगा.

एक बार में तीन तलाक को फौजदारी अपराध बनाने के प्रावधान वाले मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक को शीतकालीन सत्र में लोकसभा पारित कर चुकी है. किंतु राज्यसभा में विपक्ष द्वारा इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़ जाने के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका. हालांकि सरकार ने उच्च सदन में इसे चर्चा के लिए रख दिया है और यह फिलहाल उच्च सदन की संपत्ति है.

इस विधेयक के बारे में पूछे जाने पर अग्निहोत्री ने कहा कि आम तौर पर अध्यादेश तब जारी किया जाता है जब सत्र न चल रहा हो और इसे सदन में पेश न किया गया हो.

उन्होंने कहा, जब सदन में विधेयक पेश कर दिया गया हो तो इस पर अध्यादेश लाना सदन के प्रति सम्मान नहीं समझा जाता. किंतु पूर्व में कुछ ऐसे उदाहरण रहे हैं कि सदन में विधेयक होने के बावजूद अध्यादेश जारी किया गया.

अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भी भेज सकती थी. ऐसे भी उदाहरण हैं कि प्रवर समिति ने एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दे दी. वैसे भी यह केवल छह-सात उपबंध वाला विधेयक है.

उन्होंने कहा कि सरकार के पास यह विकल्प भी था कि विपक्ष जो कह रहा है उसके आधार पर वह स्वयं ही संशोधन ले आती. अग्निहोत्री ने बताया कि चूंकि यह विधेयक सरकार राज्यसभा में रख चुकी है और जब तक उच्च सदन इसे खारिज नहीं कर देती, सरकार इस पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाकर इसे पारित नहीं करा सकती.

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा में कांग्रेस सदस्य विवेक तन्खा भी मानते हैं कि इस बारे में अध्यादेश लाने के लिए कानूनी तौर पर सरकार के लिए कोई मनाही नहीं है. हालांकि परंपरा यही रही है कि संसद में लंबित विधेयक पर अध्यादेश नहीं लाया जाता.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में कहा था कि सरकार इस विधेयक को इसलिए पारित कराना चाहती है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि इस बारे में छह महीने के भीतर संसद में कानून बनाया जाए.

इस बारे में तन्खा का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने छह माह के भीतर कानून बनाने का जो आदेश दिया था, वह अल्पमत का दृष्टिकोण है. इस बारे में बहुमत वाले दृष्टिकोण में इसका कोई जिक्र नहीं है.

तन्खा ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि इस मामले में जल्दबाजी दिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक पर जो रोक लगाई है, वह स्वयं अपने में एक कानून बन चुका है. न्यायाधीश का फैसला अपने आप में एक कानून है. विधायिका तो केवल उसे संहिताबद्ध करती है.

उन्होंने कहा कि झगड़ा फैसले को लेकर नहीं बल्कि सरकार द्वारा इस विधेयक में जो अतिरिक्त बातें जोड़ी गई हैं, उसको लेकर है. उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया, आप अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसका तीन तलाक देने के आरोप का अपराधीकरण कर रहे हैं. विवाह के मामले फौजदारी अपराध नहीं हो सकते.

तनखा ने कहा कि सरकार ने जल्द पारित कराने के नाम पर इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की विपक्ष की मांग को नहीं माना. अब यह विधेयक संसद के अगले सत्र से पहले पारित नहीं हो सकता. यदि प्रवर समिति वाली बात मान ली जाती तब भी इस विधेयक को अगले सत्र में ही पारित होना था.

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को गैर कानूनी घोषित करते हुए सरकार से इसे रोकने के लिए कानून बनाने को कहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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