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नॉर्थ ईस्ट डायरी: मेघालय में छह कांग्रेसियों समेत 12 विधायक चुनाव से पहले भाजपा गठबंधन में शामिल

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम, मेघालय, मणिपुर, नगालैंड  और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख समाचार.

मेघालय में एक रैली में हिस्सा लेते हुए शनिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

मेघालय में एक रैली में हिस्सा लेते हुए शनिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

शिलांग: आसन्न चुनावों का सामना कर रहे मेघालय में कांग्रेस से पांच विधायकों सहित कुल आठ विधायक चार जनवरी को केंद्र में राजग में भाजपा की सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल हो गए.

हाल में विधानसभा से इस्तीफा देने वाले सभी आठ विधायक मेघालय की राजधानी शिलांग में एनपीपी की रैली में पार्टी में शामिल हो गए. एनपीपी के प्रवक्ता जेम्स के संगमा ने रैली में घोषणा की कि उनके साथ, जनजातीय स्वायत्त जिला परिषद के 10 सदस्य भी औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए.

एनपीपी का नेतृत्व पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा के बेटे कॉनराड के संगमा कर रहे हैं. सत्तारूढ़ कांग्रेस के पांच विधायकों सहित आठ विधायकों ने पिछले साल 29 दिसंबर को राज्य विधानसभा से इस्तीफा दिया था और घोषणा की थी कि वे एनपीपी में शामिल होंगे. एनपीपी राजनीतिक गठबंधन भाजपा नीत नार्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) में शामिल है. गठबंधन का गठन 2016 में हुआ.

एनपीपी में शामिल होने वाले विधायकों में कांग्रेस से पूर्व उपमुख्यमंत्री रोवेल लिंग्दोह, सनिआवभालंग धर, कमिनगोन यंबोन, प्रेस्टोन तेनसोंग और न्गैतलांग धर तथा यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के रेमिंगटन पिनग्रोप और निर्दलीय स्टीफेंसन मुखिम और होफुल बामन हैं.

रैली को संबोधित करते हुए एनपीपी अध्यक्ष कॉनराड के संगमा ने आठ विधायकों के औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने पर खुशी जताई और कहा कि 2018 का विधानसभा चुनाव मेरे दिवंगत पिता पीए संगमा के सपनों को पूरा करने का है और और इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.

उन्होंने कहा, 2018 कठिन होगा लेकिन मुझे भरोसा है कि आप सभी कड़ी मेहनत करेंगे और सफल होंगे.

कांग्रेसी विधायक एएल हेक और तीन अन्य विधायक भाजपा में शामिल हुए

शिलांग: सत्तारूढ़ कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए उसके वरिष्ठ विधायक एलेक्जेंडर एल हेक दो जनवरी को भाजपा में शामिल हो गए. राकांपा के एक विधायक और दो निर्दलीय विधायक भी भाजपा में शामिल हुए. गौरतलब है कि मेघालय में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं.

हेक के अतिरिक्त विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष सनबोर शुल्लाई जो पिछले वर्ष तक राज्य में राकांपा के अध्यक्ष थे, दो निर्दलीय विधायक जस्टिन डखार और रोबिनस सिंगकोन यहां एक रैली में पार्टी में शामिल हुए. उनके अलावा जयंतिया हिल्स ऑटोनॉमस डिस्टि्रक्ट काउंसिल के सदस्य हैमर्बेटस नोंगतदू भी पार्टी में शामिल हुए.

केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री केजे अल्फोंस ने कहा कि पार्टी मेघालय से कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर देगी. अल्फोंस मेघालय में भाजपा के चुनाव प्रभारी भी हैं.
पार्टी में नए सदस्यों का स्वागत करते हुए अल्फोंस ने कहा, सबसे ज्यादा भ्रष्ट सरकार को हम मेघालय की सत्ता से बाहर कर देंगे. श्रीमान मुख्यमंत्री आपके गिनेचुने दिन ही बचे हैं. यह तो महज शुरुआत है.

उन्होंने कहा, मेघालय वासियों पर कांग्रेस ने शासन किया, उसने आपको वह नहीं दिया जिसके आप हकदार थे. आपके मंत्रियों ने आपका पैसा चुराया. इसे रोकना होगा.

भाजपा के पूर्वोत्तर के प्रभारी राम माधव ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, चार विधायकों के साथ नए वर्ष का आगाज. मुझे कोई संदेह नहीं है कि वे फिर से विधायक चुने जाएंगे.

इसे हेक के लिए घर वापसी बताते हुए माधव ने कहा, भाजपा भारत का वर्तमान और भविष्य है और मेघालय का भविष्य भाजपा है. वर्ष 1998, 2003 और 2008 में हेक ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वह 2009 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

इससे पहले विधायकों ने विस अध्यक्ष एटी मंडल को अपने इस्तीफे सौंपे. मेघालय में कांग्रेस के पांच विधायकों समेत प्रदेश विधानसभा के कुल आठ सदस्यों ने शुक्रवार को इस्तीफा दिया था. इस्तीफा देने वाले कांग्रेसी विधायकों में पूर्व उपमुख्यमंत्री रॉवेल लिंगदोह, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रिसटन तिनसांग, कोमिंग वाईमबन, स्नियावभलंग धर और एनजीतलंग धर शामिल थे.

कांग्रेस के पांच विधायकों के अलावा यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक रेमिंगटन पिंग्रोप और निर्दलीय होपफुल बमन और स्टीफेंसन मुखिम ने भी विधानसभा से इस्तीफा दिया था.

सीबीआई ने मेघालय के मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव के खिलाफ मामला दर्ज किया

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मेघालय के पीडब्ल्यूडी मंत्री अंपरीन लिंगदोह और राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएस थांगखिव के खिलाफ शिक्षकों की नियुक्ति में कथित गड़बड़ी को लेकर चार जनवरी को मामला दर्ज किया है. यह मामला वर्ष 2008-09 में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान अंकपत्र की कथित हेरफेर करने से संबंधित है.

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी ने मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश पर यह कार्रवाई की है. कथित गड़बड़ी के समय शिक्षा मंत्री रहे लिंगदोह और शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और 1984 बैच के आईएएस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों को लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

थांगखिव अभी अतिरिक्त सचिव हैं और उनके पास गृह जैसा अहम विभाग है. मेघालय में इस साल की पहली तिमाही में चुनाव होना है. एजेंसी ने प्राथमिकी में प्राथमिक एवं जन शिक्षा विभाग के निदेशालय एवं अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है.

मेघालय उच्च न्यायालय ने दो नवंबर, 2017 को सीबीआई को इस मामले को राज्य पुलिस से अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था. आरोप है कि लिंगदोह ने उस समय प्राथमिक और जन शिक्षा की निदेशक जेडी संगमा और उनकी दो समर्थकों को अंकपत्र में छेड़छाड़ करने और उसके साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था.

मेघालय में 70 करोड़ रुपये की पर्यटन परियोजनाओं की घोषणा

शिलांग: मेघालय में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अलफोंस ने सात जनवरी को राज्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक परिपथ के विकास के लिए 70 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं की घोषणा की. मंत्री ने कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचा की समस्या है.

इन परियोजनाओं पर कार्य छह से 18 महीने के अंदर पूरा कर लिया जाएगा. अल्फोंस ने यहां संवाददाताओं से कहा, मेघालय में पूजा स्थलों पर बुनियादी ढांचे की कमी है. वहां पार्किंग स्थल नहीं हैं और वहां बिजली भी नहीं है. परियोजना सलाहकारों को यहां बुलाया गया था और हमने इन परियोजनाओं को मंजूरी देने का फैसला किया.

अल्फोंस ने उन विचारों को खारिज किया कि यह कोष विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए आवंटित किया गया है. उन्होंने कहा कि चूंकि अभी चुनाव की घोषणा नहीं हुई है तो सरकार द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं को रोकने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्रालय ने देश में धार्मिक एवं अन्य स्थानों को जोड़ने वाली ऐसी 67 परियोजनाओं के लिए 5,648 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.

मेघालय सरकार सर्वाधिक भ्रष्ट: शाह

शिलांग: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने छह जनवरी को मेघालय की कांग्रेस सरकार को देश की सर्वाधिक भ्रष्ट सरकार करार दिया और कहा कि भाजपा राज्य में सिर्फ सरकार बनाने के लिए इसका प्रयास नहीं करेगी.

पूर्वोत्तर के इस राज्य में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस के छह विधायकों समेत 12 विधायक इस सप्ताह की शुरुआत में भाजपा के सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल हो गए.

शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य को 56000 करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं, लेकिन यह विकास के लिए राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा नहीं था. वह यहां पार्टी नेताओं की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे.

राज्य की मुकुल संगमा सरकार को देश में सर्वाधिक भ्रष्ट सरकार करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा, पर्यटन सुविधाओं और रोजगार सृजन समेत सभी क्षेत्रों में डेलिवर करने में विफल रही है.

शाह ने कहा, हमारा मिशन सिर्फ सरकार बनाने के लिए ऐसा करना नहीं है. भाजपा इसके मूड में नहीं है. मिशन इस बात को सुनिश्चित करने के लिए है कि मेघालय को आदर्श राज्य-सर्वाधिक विकसित राज्यों में से एक-बनना चाहिए.

शिक्षा घोटाले के आरोपी अपनी बेगुनाही साबित करेंगे: मेघालय के मुख्यमंत्री

शिलांग: मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने पांच जनवरी को कहा कि वर्ष 2008-09 में शिक्षकों की भर्ती में अंकपत्र में कथित हेरफेर के मामले के आरोपी अदालत में खुद को निर्दोष साबित करेंगे. उन्होंने कहा कि उनका न्यायपालिका में विश्वास है.

मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सीबीआई ने इस संबंध में मेघालय की पीडब्ल्यूडी मंत्री अंपरीन लिंगदोह और राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएस थांगखिव पर मामला दर्ज किया था.

मुख्यमंत्री ने पार्टी के एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, कानून अपना काम करेगा. आरोपी खुद को बेगुनाह साबित करेंगे. उन्होंने कहा, संबंधित अधिकारी और मंत्री को यह पता होगा कि खुद को कैसे बचाना है और विश्व के सामने अपनी बेगुनाही साबित करनी है. हमें अपनी न्याय प्रणाली में पूरा भरोसा है.

अरुणाचल प्रदेश: चीन ने कहा अरुणाचल प्रदेश के वजूद को कभी माना ही नहीं

बीजिंग: चीन ने तीन जनवरी को कहा कि उसने अरुणाचल प्रदेश के वजूद को कभी माना ही नहीं है. हालांकि, चीन ने मीडिया में आई इस खबर पर चुप्पी साध ली कि उसके सैनिक सीमा से सटे इस भारतीय राज्य में घुसे थे.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने यह टिप्पणी तब की जब एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि अरुणाचल प्रदेश के परी सियांग जिले के एक गांव के पास चीनी सैनिक भारतीय सीमा में करीब 200 मीटर तक घुस आए थे.

गेंग ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, सबसे पहली बात तो यह है कि सीमा मुद्दे पर हमारी स्थिति स्पष्ट एवं एक जैसी रही है. हमने तथाकथित अरुणाचल प्रदेश के वजूद को कभी माना ही नहीं.

उन्होंने कहा, आपने जिस विशेष स्थिति का जिक्र किया है, मैं उससे वाकिफ नहीं हूं. चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिण तिब्बत का हिस्सा है. वास्तविक नियंत्रण रेखा के 3,488 किमी लंबे हिस्से को लेकर भारत चीन सीमा विवाद है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने निर्माण सामग्री के साथ भारतीय सीमा में घुसे चीनी सैनिकों को भारतीय सैनिकों ने रोक दिया था. चीनी सैनिक अपनी निर्माण सामग्री भारतीय सीमा में ही छोड़कर चले गए थे.

उन्होंने कहा, मैं बताना चाहूंगा कि चीन और भारत के बीच सीमा से जुड़े मामलों के लिए सुविकसित तंत्र है. इस तंत्र के जरिये चीन और भारत सीमा मामलों का प्रबंधन कर सकते हैं. सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखना भारत और चीन दोनों के हित में है.

यह पूछे जाने पर कि क्या डोकलाम क्षेत्र की तरह भारत एवं चीन के बीच एक और गतिरोध कायम हो गया है, इस पर गेंग ने कहा, पिछले साल का गतिरोध उचित तरीके से सुलझा लिया गया.

खबरों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ लगभग उसी वक्त हुई जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एवं उनके चीनी समकक्ष यांग जाइची के बीच 22 दिसंबर को नई दिल्ली में सीमा मसले पर 20वें दौर की बातचीत हुई.

सीमा मुद्दे पर ताजा बातचीत के नतीजे पर गेंग ने कहा, दोनों पक्षों ने साफ कर दिया कि दोनों देश चीन-भारत संबंधों के निरंतर सुधार के लिए मिलकर काम करेंगे. दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों की शांति स्थिरता मिलकर कायम रखेंगे.

चीन के कर्मी अरुणाचल प्रदेश में एक किलोमीटर अंदर तक आ गए थे: सूत्र

ईटानगर/नई दिल्ली: सरकारी सूत्रों ने तीन जनवरी को कहा कि चीन का सड़क निर्माण दल पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र में करीब एक किलोमीटर अंदर तक आ गया था, लेकिन भारतीय सैनिकों द्वारा विरोध करने पर वे लौट गए.

सूत्रों ने बताया कि असैन्य दल मार्ग गतिविधियों के लिए आए थे लेकिन भारतीय सैनिकों द्वारा विरोध किए जाने पर वे खुदाई करने वाले उपकरण सहित सड़क बनाने में काम आने वाले कई उपकरण छोड़कर लौट गए. अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक चीनी दल में सैनिकों के साथ असैन्य लोग भी थे.

यह घटना 28 दिसंबर की है. करीब चार महीने पहले सिक्किम सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच डोकलाम गतिरोध खत्म हुआ था. सूत्रों ने बताया कि 28 दिसंबर को तूतिंग क्षेत्र में भारतीय सीमा प्रहरियों ने भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर कुछ चीनियों को सड़क बनाने से जुड़ा काम करते देखा.

उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच कोई टकराव नहीं हुआ और इस मुद्दे को स्थापित प्रणाली के माध्यम से सुलझाया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार सड़क बनाने में काम आने वाले उपकरण वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार भारतीय क्षेत्र में पड़े हुए हैं.

अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार तूतिंग उपसंभाग में बिसिंग गांव के समीप चीनी सैनिक सड़क निर्माण काम में लगे थे और इस पर भारतीय जवानों ने उन्हें रोका. भारतीय जवानों ने उनके उपकरण जब्त कर लिए.

सीमा के समीप के जीडो गांव के न्योमिन और गेलिंग गांव के पेमा न्यिसिर ने कहा कि खुदाई करने वाली दो मशीनें जब्त कर ली गईं. न्यिसिर ने कहा, गेलिंग में सियांग नदी के दाएं तट से सड़क निर्माण की गतिविधियां नजर आती हैं. उस जगह से गेलिंग की हवाई दूरी करीब सात आठ किलोमीटर है.

उन्होंने कहा, भारतीय और चीनी सैनिकों ने काटी गई मिट्टी के पास शिविर लगा दिए और पत्थरों से एक दीवार खड़ी कर दी. दरअसल ग्रामीणों ने चीन की गतिविधियों के बारे में पुलिस को सूचनी दी जिसने बिशिंग के समीप मेडोग में तैनात आईटीबीपी को इसकी खबर दी. दोनों पक्षों में कहासुनी हुई लेकिन चीनियों ने मानने से इनकार कर दिया. तब भारतीय सेना को वहां भेजा गया, जो अबतक वहां बनी हुई है.

वैसे तो संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा आईटीबीपी के जिम्मे है, लेकिन क्षेत्र में सैनिकों की भारी संख्या में तैनाती की गई है. वैसे इस संबंध में परी सियांग के उपायुक्त डुली कामदुक ने कहा, तूतिंग उपसंभाग के हमारे अधिकारियों ने चीनियों के आने की कोई खबर नहीं दी है. राज्य के प्रभारी मुख्य सचिव मारन्या एट ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं है.

असम: लोकसभा में उठा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का मुद्दा

नई दिल्ली: लोकसभा में चार जनवरी को तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के सदस्यों ने असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) में काफी संख्या में नागरिकों के नाम छूटने का मुद्दा उठाया. तृणमूल कांग्रेस ने इसे प्रदेश से बांग्लाभाषी लोगों को खदेड़ने का प्रयास बताया, जिसे सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया.

सदन में कांग्रेस की सुष्मिता देव, अधीर रंजन चौधरी, माकपा के मोहम्मद सलीम को काफी मुखर होकर इस विषय को उठाते देखा गया. भाजपा के कुछ सदस्यों को इसका विरोध करते देखा गया.

इस बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि असम में एनआरसी तैयार करने का काम उच्चतम न्यायालय की निगरानी में हो रहा है. इसमें 1.90 करोड़ लोगों का नाम प्रकाशित हुआ है.

उन्होंने कहा कि अदालत ने भी कहा है कि किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है. किसी का नाम अगर किसी कारण से छूट गया है तब वह पुन: अपील कर सकता है.

सिंह ने कहा कि यह जो आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोगों को खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है. इससे पहले शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार किया जा रहा है. इसमें अब तक एक करोड़ 93 लाख लोगों के नाम दर्ज हुए हैं. काफी संख्या में लोगों के नाम छूट गए हैं. यह राज्य में बांग्लाभाषी लोगों के खिलाफ साजिश है.

उन्होंने कहा कि यह बांग्लाभाषी लोगों को असम से खदेड़ने की साजिश है. यह गंभीर मुद्दा है. बांग्ला बोलने वाले लोगों को असम में रहने की अनुमति देनी चाहिए.

इस विषय पर सदस्यों के शांत नहीं होने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि यह विषय लोगों की संवेदना से जुड़ा है, वह समझती हैं. गृह मंत्री ने इस बारे में अच्छा बयान दिया है. उच्चतम न्यायालय की निगरानी में काम हो रहा है. इसलिए मंत्री के बयान के बाद परेशान होने की जरूरत नहीं है.

एनआरसी प्रारूप सूची से दो सांसदों और कई विधायकों के नाम नदारद

गुवाहाटी: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के पहले प्रारूप में उल्फा के शीर्ष नेता परेश बरुआ का नाम है. वहीं इसमें असम के कई प्रतिष्ठित सियासतदानों के नाम नदारद हैं.

31 दिसंबर की मध्य रात्रि को जारी की गई पहली सूची में ऑल इंडिया यूनाइटिड डेमोक्रेटिक फ्रंट एआईयूडीएफ के प्रमुख और धुब्री से लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल, उनके बेटे और जमुनामुख से विधायक अब्दुर रहीम अजमल और उनके भाई एवं बारपेटा से लोकसभा सदस्य सिराजुद्दीन अजमल समेत कई का नाम नहीं है.

पहली फेहरिस्त में कई नामों को शामिल नहीं होने पर भारत के महापंजीयक सैलेश ने कहा, घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि काफी वक्त है. प्रक्रिया चल रही है. ठोस प्रगति हुई है लेकिन अब भी बहुत काम किए जाने की जरूरत है.

एनआरसी के पहले प्रारूप में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों को भारत के वैध नागरिक के तौर पर सूचित किया गया है. इस व्यापक कवायद का मकसद बांग्लादेश की सरहद से लगते राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करना है.

सूची में जिन अन्य विधायकों के नाम नहीं है उनमें अभयापुरी दक्षिण से विधायक अनांता कुमार मालो, धींग से विधायक अमीन उल इस्लाम, गौरीपुर से विधायक निजान उर रहमान, बिलासीपारा पश्चिम से विधायक हफीज बशीर अहमद कासिमी शामिल हैं.

जबकि भाजपा विधायकों में होजई से विधायक शिलादित्य देब और गोलकगंज से विधायक अश्विनी राय सरकार का नाम नहीं है. वहीं कांग्रेस के विधायकों में सेंगा से विधायक सुकुर अली, बाघबोर से विधायक शेरमान अली और रूपोही से विधायक नूर उल हुदा का नाम भी फेहरिस्त से नदारद है.

सूची में परेश बरुआ के अलावा अनके साथी अरुनूधोई डोहोतिया और एनडीएफबी नेता बी बिडाइ के नाम शामिल है. बरुआ ने असम की संप्रभुता के लिए करीब 40 साल पहले अपना विद्रोह शुरू किया था और वह चीनी-म्यामां सीमा पर कहीं हैं.

एनआरसी के पहले मसौदे में नाम नहीं आए तो भी चिंता की बात नहीं: सोनोवाल

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तीन जनवरी को कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (राष्ट्रीय नागरिक पंजी या एनआरसी) के पहले मसौदे में जिनके नाम शामिल होने से रह गए हैं उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जाति अथवा समुदाय के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और नागरिकता साबित करने के अवसर दिए जाएंगे.

सोनोवाल ने कहा कि राज्य के नागरिकों की सूची राष्ट्रीय नागरिक पंजी को अंतिम रूप दिए जाने के बाद जो लोग अवैध आव्रजक पाए जाएंगे उनके साथ क्या करना चाहिए, इस बारे में केंद्र सरकार को मानवोचित तरीके से चिंतन करना चाहिए.

सोनोवाल ने कहा, किसी के भी खिलाफ भेदभाव करने का सवाल ही नहीं उठता चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, बंगाली हो या फिर नेपाली हो. उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी के साथ समानता का व्यवहार होगा और लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मौके दिए जाएंगे ताकि उनके नाम एनआरसी के आने वाले मसौदों में शामिल किए जा सकें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी ने प्रामाणिक नागरिकों को अवैध आव्रजकों से अलग करने का मौका दिया है. यह उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो बीते चार दशक से संदिग्ध अवैध आव्रजक का कलंक लिए जी रहे हैं.

उन्होंने कहा, सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक समझदारी से काम कर रही है. अंतिम सूची के बाद जो लोग अवैध आव्रजक पाए जाएंगे उनके साथ भी मानवोचित व्यवहार होगा. उनके साथ क्या करना है इसे लेकर केंद्र सरकार को एक व्यवस्था बनानी होगी.

मणिपुर: सरकार ने असम से अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए उठाए कदम

इंफाल: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर एनआरसी के पहले मसौदे के प्रकाशन के बाद मणिपुर में अवैध प्रवासियों के पलायन को रोकने के लिए एन बीरेन सिंह की अगुवाई वाली राज्य सरकार कदम उठा रही है.

उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एनआरसी को अद्यतन बनाया जा रहा है. इसे पहली बार 1951 में तैयार किया गया था. इसका लक्ष्य अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें हटाना है. अद्यतन संस्करण के पहले मसौदे का प्रकाशन 31 दिसंबर को किया गया था.

मणिपुर पुलिस ने चार जनवरी को एक बयान में कहा है कि सहायक कमांडर या अतिरिक्त वरिष्ठ एसपी की अगुवाई वाले विशेष दलों को जिरिबाम बाबुपारा बाजार एवं मिजोरम की सीमा से लगने वाली बराक नदी पर तैनात किया गया है.

बराक मणिपुर से निकलती है और मिजोरम एवं असम के रास्ते बांग्लादेश की सुरमा और कुशियारा नदियों में मिल जाती है. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नगालैंड से लगने वाली सेनापति के माओ गेट एवं असम से लगनी वाली तमेंगलांग जिले में तेमे हफलांग सड़क पर भी पुलिस की विशेष दलों की तैनाती की गई है. इसका लक्ष्य राज्य में अवैध प्रवासियों के प्रवेश को रोकना है.

पूर्वोत्तर राज्यों ने एनआरसी के प्रकाशन के बाद निगरानी बढ़ाई

ईटानगर/शिलांग: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के पहले प्रारूप के प्रकाशन के बाद पूर्वोत्तर राज्य अपने यहां अवैध प्रवासियों की संभावित आमद को रोकने के लिए कड़ी निगरानी कर रहे हैं. प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी है.

वर्ष 1951 में पहला एनआरसी तैयार हुआ था. इसे उच्चतम न्यायालय की निगरानी में अवैध प्रवासियों को हटाने के लिए अपडेट किया गया है. अपडेट संस्करण का पहला प्रारूप 31 दिसंबर को प्रकाशित किया गया है.

अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और मणिपुर ने अपने क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों के प्रवेश को रोकने के लिए कदम उठाए हैं. एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि अरुणाचल प्रदेश में सभी सीमांत जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में असम के अपने समकक्षों से संपर्क में रहने को कहा गया है.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एनआरसी के पहले प्रारूप के प्रकाशन के मद्देनजर राज्य के पुलिस महानिदेशक से सीमांत इलाकों में स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है.
मेघालय के पुलिस महानिदेशक एसबी सिंह ने बताया कि राज्य में असम से लगते इलाकों में पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है.

सिंह ने कहा, हमने दिसंबर के आखिरी हफ्ते से राष्ट्र विरोधी तत्वों की घुसपैठ को रोकने के लिए एहतियाती उपाय किए हैं. उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को राज्य के गृह विभाग ने सीमांत इलाकों में निगरानी बढ़ाने और जांच करने के निर्देश दिए थे.

मणिपुर पुलिस ने एक बयान में बताया कि राज्य के जिरीबाम, बाबूपारा बाजार और मिजोरम से लगती बराक नदी के पास के इलाकों में विशेष टीमों को तैनात किया गया है. नगालैंड के गृह आयुक्त अभिषेक सिंह ने राज्य में अवैध प्रवासियों के संभावित प्रवेश को रोकने का यकीन जताया.

नगालैंड छह और महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित किए जाने की अवधि को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. गृह मंत्रालय की ओर से गत 30 दिसंबर को जारी अधिसूचना के तहत नगालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित करने की अवधि को इस साल जून तक के लिए बढ़ाया गया है.

अधिसूचना के मुताबिक सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम 1958 (अफ्सपा) के तहत संपूर्ण नगालैंड राज्य को एक जनवरी से 30 जून तक के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है. इसके तहत सुरक्षा बलों को पूरे राज्य में कहीं भी अभियान चलाने और किसी को भी पूर्व नोटिस के बिना गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाता है.

अधिसूचना में नगालैंड की सीमा के भीतर आने वाले संपूर्ण क्षेत्र में अशांत और खतरनाक स्थिति का हवाला देते हुए पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया है. इससे पहले गत वर्ष 30 जून को जारी अधिसूचना में छह महीने के लिये नगालैंड को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था. इसकी समय सीमा 30 दिसंबर को खत्म हो गई.

अधिसूचना के मुताबिक केंद्र सरकार का यह मत है कि संपूर्ण नगालैंड राज्य की सीमा के भीतर आने वाला क्षेत्र ऐसी अशांत और खतरनाक स्थिति में है जिससे वहां नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों का प्रयोग करना आवश्यक है. इसके मद्देनजर मंत्रालय ने इस अवधि को बढ़ाया है.

नगालैंड में अफ्सपा पिछले कई दशक से लागू है. यहां तक कि नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन आईएम के महासचिव टी मुइवा और सरकार के वार्ताकार आर एन रवि के बीच शांति समझौते के सहमति पत्र पर तीन अगस्त 2015 को हस्ताक्षर होने के बावजूद अफ्सपा नहीं हटाया गया था.

पूर्वोत्तर राज्यों को केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करने को कहा गया

शिलांग: केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने पूर्वोत्तर के राज्यों से किसानों के लिए उन केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करने की अपील की है जिसमें 2022 तक अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार 90 फीसदी कोष मुहैया करवा रही है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने मेघालय सरकार पर बरसते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उचित तरीके से योजनाओं को लागू करने में असफल रही है और उपयोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया है.

सिंह ने यहां एक कृषि मेले को संबोधित करते हुए कहा, पूर्वोत्तर राज्यों को 90 फीसदी सहायता दी जा रही है और मेघालय सहित सभी राज्यों को इन योजनाओं को लागू करने में तेजी लानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि सरकार ने देहात क्षेत्र में रहने वाले लोगों, खास तौर से किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए हैं ताकि मौजूदा कृषि प्रक्रिया में सुधार लाया जा सके.

उन्होंने कहा, राज्य सरकार को कृषि क्षेत्र में रोजगार पैदा करने की दिशा में काम करना चाहिए ताकि युवाओं को इस क्षेत्र में रोका जा सके. मेघालय के बारे में सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत आवंटित कोष का इस्तेमाल करना चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया, राज्य सरकार पर ड्राप मोर क्रॅाप योजना के तहत आवंटित 50 लाख रुपये से अधिक के कोष को खर्च करने में विफल रही है और पिछले चार साल से झूठ बोल रही है.

सरकार अरुणाचल प्रदेश में एफटीआईआई स्थापित करेगी

चेन्नई: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने छह जनवरी को कहा कि अरुणाचल प्रदेश को अपना पहला फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट मिलेगा. केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र की संभावना का लाभ उठाने के लिए इसे स्थापित कर रही. देश में इस तरह का यह दूसरा संस्थान होगा.

प्रथम फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एफटीआईआई) की स्थापना पुणे में की गई थी. यह एक स्वायत्त संस्था है जिसका संचालन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय कर रहा है.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया, पुणे के बाद हम इस तरह का एक और फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ला रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला कि पिछले कुछ दशकों में अरुणाचल प्रदेश में सिर्फ दो फिल्मों की शूटिंग हुई है. उन्होंने यहां एक सम्मेलन में यह बात कही.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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