भारत

न्यायपालिका में दख़लअंदाज़ी के लिए बार काउंसिल ने दलों और नेताओं को चेताया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत की पूर्ण पीठ को तत्काल विचार करना चाहिए.

(फोटो: रॉयटर्स)

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नई दिल्ली: भारतीय बार परिषद (बीसीआई) ने राजनीतिक दलों और नेताओं को चेताया कि वह उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रधान न्यायाधीश के ख़िलाफ़ एक तरह से विद्रोह किए जाने के बाद की स्थिति का ‘अनुचित फायदा’ नहीं उठाएं.

बीसीआई ने शनिवार को कहा कि प्रधान न्यायाधीश के साथ अपने मतभेदों को लेकर चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रेस वार्ता बुलाए जाने से राजनीतिक दलों और नेताओं को न्यायपालिका के मामलों में दख़लअंदाज़ी करने का मौका मिल गया है.

किसी का नाम लिए बिना बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा संवाददाता सम्मेलन बुलाए जाने से पैदा स्थिति का किसी राजनीतिक दल या नेता को अनुचित फायदा नहीं उठाना चाहिए.

राजनीतिक दलों और नेताओं का संदर्भ महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को इस प्रकरण के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था.

बीसीआई की 17 सदस्यीय संचालन समिति द्वारा आहूत आपातकालीन बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें कहा गया कि सात सदस्यीय समिति वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों से 14 जनवरी को मुलाकात करेगी.

हालांकि मिश्रा ने बाद में स्पष्ट किया कि समिति के सदस्य बाद में प्रधान न्यायाधीश और प्रेस वार्ता बुलाने वाले चार न्यायाधीशों से भी मुलाकात करेंगे.
उन्होंने कहा कि बीसीआई का नज़रिया है कि न्यायाधीशों के इस तरह के मुद्दे सार्वजनिक नहीं होने चाहिए.

उन्होंने कहा कि बीसीआई ने शीर्ष अदालत के आंतरिक मामलों में शामिल नहीं होने के सरकार के फैसले का स्वागत किया.

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ एक तरह से विद्रोह करते हुए मामलों के एकतरफा तरीके से आवंटन सहित कई मुद्दे उठाए थे.

न्यायाधीशों ने कहा था कि कुछ मुद्दे हैं जो देश की सर्वोच्च अदालत को प्रभावित कर रहे हैं और आगाह किया था कि वे भारतीय लोकतंत्र को तबाह कर सकते हैं.

बीसीआई ने न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय दल का गठन किया

भारतीय बार परिषद ने उच्चतम न्यायालय के वर्तमान संकट पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर शीर्ष अदालत के अन्य सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय दल का गठन किया.

बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि बीसीआई ने वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों से मिलने के लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया है.

वकीलों की शीर्ष संस्था ने कहा कि वह अन्य न्यायाधीशों की राय लेगी. बीसीआई का नज़रिया है कि न्यायाधीशों के इस तरह के मुद्दे सार्वजनिक नहीं होने चाहिए.

पूर्ण पीठ को न्यायाधीशों के बीच मतभेद को सुलझाना चाहिए: एससीबीए

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ चार सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीशों के मतभेद पैदा होने पर शनिवार को चिंता जताई. एससीबीए ने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत की पूर्ण पीठ को तत्काल विचार करना चाहिए.

एससीबीए की कार्यकारिणी की आपात बैठक में सुझाव दिया गया कि लंबित जनहित याचिकाओं समेत सभी जनहित याचिकाओं पर या तो सीजेआई को विचार करना चाहिए या उन वरिष्ठ न्यायाधीशों को सौंप दिया जाना चाहिए जो उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम का हिस्सा हैं.

सीजेआई मिश्रा के अलावा कॉलेजियम में वरिष्ठता क्रम के हिसाब से न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ शामिल हैं.

एससीबीए अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि पूर्ण अदालत के विचार करने का प्रस्ताव पारित किया गया क्योंकि यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों के बीच अंदरूनी चर्चा होती है और खुले में चर्चा नहीं होती है.

एससीबीए के प्रस्ताव में कहा गया है कि 15 जनवरी को शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों को भी अन्य न्यायाधीशों के पास से कॉलेजियम में शामिल पांच सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीशों के पास भेज दिया जाना चाहिए.

प्रस्ताव पढ़ते हुए सिंह ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन में जो मतभेद बताए और अन्य मतभेद जो समाचार पत्रों में दिखे हैं वे गंभीर चिंता का विषय हैं और उसपर उच्चतम न्यायालय की पूर्ण अदालत को तत्काल विचार करना चाहिए.’

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि लंबित मामलों समेत सभी जनहित याचिकाओं पर या तो प्रधान न्यायाधीश को विचार करना चाहिए या उन्हें किसी अन्य पीठ को सौंपना है तो उसे कॉलेजियम में शामिल न्यायाधीशों को सौंपना चाहिए. यहां तक कि सोमवार यानी 15 जनवरी 2018 को सूचीबद्ध मामलों को भी हमारे अनुरोध के अनुसार उन्हें सौंपा जाना चाहिए.’

सिंह ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो एससीबीए इन घटनाक्रमों के बारे में चर्चा के लिए प्रधान न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों से मुलाकात का समय मांगेगी.

एससीएओआरए ने मतभेदों को आंतरिक रूप से सुलझाने का न्यायाधीशों से अनुरोध किया

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की कार्यकारी समिति ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से अपने मतभेदों को आंतरिक रूप से और संवैधानिक ढांचे के अंदर सुलझाने का अनुरोध किया है.

एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव में कहा है कि घटनाक्रम से वह दुखी है. इसके मुताबिक इसने शीर्ष न्यायालय की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है.

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘इसने हितधारकों से संयम रखने को कहा है और उनसे सभी मुद्दों को आंतरिक रूप से तथा संवैधानिक ढांचे के अंदर सुलझाने का अनुरोध किया है.’

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