राजनीति

फिल्म पद्मावत पर चार राज्यों में प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के निर्माताओं की तरफ से प्रतिबंध के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया.

नाम बदलने के बाद फिल्म पद्मावत का नया पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नाम बदलने के बाद फिल्म पद्मावत का नया पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली/जयपुर/लखनऊ/धौलपुर: उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा फिल्म पद्मावत पर लगाए गए प्रतिबंध के ख़िलाफ़ याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. फिल्म के निर्माताओं की तरफ से प्रतिबंध के ख़िलाफ़ यह याचिका दायर की गई है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने फिल्म के निर्माता वायकाम 18 और अन्य के वकील की इस दलील पर विचार किया कि इसका अखिल भारतीय प्रदर्शन 25 जनवरी को होने वाला है. ऐसी स्थिति में इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है.

याचिका में कहा गया है कि इस फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने मंज़ूरी दे दी है और इसिलए राज्य इसके प्रदर्शन पर ऐसा प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं. याचिका के अनुसार क़ानून व्यवस्था की समस्या होने पर ऐसे क्षेत्रों में फिल्म का प्रदर्शन निलंबित किया जा सकता है.

इससे पहले, दो मौकों पर शीर्ष अदालत ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के प्रयास विफल कर दिए थे. न्यायालय ने कहा था कि सेंसर बोर्ड के निर्णय से पहले फिल्म के बारे में कोई राय नहीं बनाई जा सकती है.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 28 नवंबर को इस फिल्म को लेकर कुछ राजनीतिकों की टिप्पणियों पर अप्रसन्नता व्यक्त की थी और उनसे इस पर प्रतिक्रया व्यक्त करने से गुरेज करने के लिए कहा था.

यह फिल्म 13वीं सदी में मेवाड़ के महाराजा रतन सिंह और उनकी सेना तथा दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलजी के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध पर आधारित है. इस फिल्म के सेट पर दो बार जयपुर और कोल्हापुर में तोड़फोड़ की गई और इसके निदेशक संजय लीला भंसाली के साथ करणी सेना के लोगों ने हाथापाई भी की थी.

उधर, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश सरकारों द्वारा कानून एवं व्यवस्था का हवाला देते हुए फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के बाद बीते मंगलवार को हरियाणा में भी फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

मंगलवार को इसकी बात की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर राज्य कैबिनेट की बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया.

उन्होंने कहा कि लोगों का मानना है कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को ‘तोड़-मरोड़कर’ पेश किया गया है. मंत्री ने कहा कि पिछली कैबिनेट बैठक में भी उन्होंने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खट्टर के नेतृत्व में मंगलवार को पूरी कैबिनेट ने उनका समर्थन किया जिसके बाद हरियाणा में फिल्म के रिलीज़ को प्रतिबंधित करने का निर्णय किया गया.

गौरतलब है कि दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह अभिनीत यह फिल्म 25 जनवरी को रिलीज़ हो रही है. इस फिल्म का राजपूत समुदाय सहित विभिन्न तबके की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा है.

लगातार विवादों में रहने की वजह से पिछले साल दिसंबर में रिलीज़ होने जा रही इस फिल्म की रिलीज़ को टाल दिया गया था.

राजस्थान की राजपूत करणी सेना और तमाम हिंदूवादी के साथ कुछ राजपूत समुदाय ने फिल्म पर आरोप लगाया है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है.

लोग आरोप लगा रहे है कि फिल्म में अलाउद्दीन ख़िलजी और रानी पद्मावती के बीच ड्रीम सीक्वेंस फिल्माया गया है. हालांकि फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं है.

इन लोगों का आरोप है कि भंसाली ने रानी पद्मावती की छवि को ‘ख़राब करने के लिए’ फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को ग़लत तरीके से पेश किया गया है जिससे लाखों लोगों की भावनाएं आहत होंगी.

राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सरकारों द्वारा फिल्म पर प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद भी राजपूत समाज और कुछ समाजों की फिल्म के प्रति नाराज़गी दूर नहीं हो सकी है.

बीते दिसंबर महीने में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने इस फिल्म यू/ए सर्टिफिकेट देने का फैसला किया है और फिल्म के निर्देशक को इसका नाम ‘पद्मावती’ से बदलकर ‘पद्मावत’ करने का सुझाव दिया है.

इसके अलावा फिल्म के दृश्यों में 26 कट्स लगाए गए थे. सीबीएफसी के समक्ष भी पेश हो चुके भंसाली ने बताया था कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनी उनकी फिल्म मलिक मोहम्मद जायसी रचित 16वीं सदी के ऐतिहासिक काव्य पद्मावत पर आधारित है.

सेंसर बोर्ड अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने फिल्म पद्मावत की रिलीज़ के ख़िलाफ़ दाख़िल प्रत्यावेदन पर निर्णय न लेने पर सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को अवमानना नोटिस जारी करते हुए तीन हफ़्ते में जवाब दाख़िल करने को कहा है.

न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की एकल पीठ ने कामता प्रसाद सिंघल नामक व्यक्ति की ओर से दायर एक अवमानना याचिका पर यह आदेश पारित किया.

याचिका में कहा गया था कि याची ने विवादों से घिरी फिल्म को रिलीज़ करने से रोकने के लिए पूर्व में एक जनहित याचिका दाख़िल की थी, जिस पर अदालत ने नौ नवंबर 2017 को याचिका तो निरस्त कर दी थी लेकिन उन्हें यह अनुमति दी थी कि वह सिनेमैटोग्राफ सर्टिफिकेशन रूल्स 1983 के नियम 32 के तहत अपना प्रत्यावेदन पेश कर सकते हैं.

याची का कहना था कि उसने 13 नवंबर 2017 को अपना प्रत्यावेदन सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन अदालत की ओर से दी गई तीन माह की मीयाद बीत जाने के बावजूद उनका प्रत्यावेदन आज तक नहीं तय किया गया.

दरअसल याची की ओर से फिल्म को रिलीज़ करने के ख़िलाफ़ तर्क दिया जा रहा है कि फिल्म सती प्रथा को बढ़ावा देने वाली है जबकि सती प्रथा को बढ़ावा देना अपराध की श्रेणी में आता है. अदालत इस मामले की अगली सुनवाई फरवरी के दूसरे हफ़्ते में करेगी.

प्रदर्शनकारियों ने पद्मावत फिल्म के विरोधी में उदयपुर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया

राजपूत समाज के सदस्यों ने फिल्म को 25 जनवरी को परदे पर उतरने के विरोध में बुधवार को राजस्थान के चित्तौडगढ़ में उदयपुर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग को लगभग आधे घंटे के लिए जाम कर दिया.

पुलिस के अनुसार राजपूत और अन्य समाज के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर रिठोला चौराहे पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन की वजह से राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाने के कारण यातायात के सुगम संचालन के लिये मार्ग परिवर्तित किया गया.

उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर जो क़दम उठाए थे. उसके कारण किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई.

प्रदर्शकारियों द्वारा पद्मावत पर आगे की रणनीति के बारे में विचार तय हो जाने के बाद यातायात का संचालन सामान्य हो गया.

श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र कालवी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये समाज के लोगों को जोधपुर के ओसियां तहसील के समराउ में 21 जनवरी को इकट्ठा होने का ऐलान किया है.

फिल्म की रिलीज़ के दिन काला दिवस मनाया जाएगा

फिल्म पद्मावत को सेंसर बोर्ड ने भले ही प्रदर्शन की अनुमति दे दी हो, लेकिन फिल्म को लेकर राजस्थान के राजपूत समाज का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है.

राजपूत करणी सेना ने फिल्म पद्मावत पर रोक की मांग को लेकर मंगलवार को धौलपुर में वाहन रैली निकाली. विरोध प्रदर्शन में राजपूत करणी सेना के प्रदेश संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी समेत अन्य नेता मौजूद रहे.

कालवी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि यह मामला संवेदनशील है. इस पर केंद्र को फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगानी चाहिए. अगर सरकार ने कुछ नहीं किया, तो जनता बंद कर देगी. कालवी ने कहा कि करणी सेना 25 जनवरी को फिल्म के रिलीज के दिन काला दिवस मनाएगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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