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हादिया बालिग है, किसी कोर्ट या जांच एजेंसी को शादी पर सवाल उठाने का हक़ नहीं: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस बात की जांच नहीं कर सकती कि 24 साल की हादिया की शफीन से शादी वैध है या नहीं.

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नवंबर में सुप्रीम कोर्ट में हादिया (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल के कथित लव जिहाद मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एनआईए कथित लव जिहाद के बारे में जांच कर सकता है लेकिन वह किसी की शादी की स्थिति के बारे में जांच नहीं कर सकता.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ को जांच एजेंसी ने बताया कि उसने न्यायलय के निर्देशों के बाद की जा रही जांच में काफी प्रगति की है. अदालत ने इसके बाद यह बात कही है.

पीठ ने कहा, ‘हमें इससे (जांच) मतलब नहीं है. आप चाहे अपनी जांच जारी रखें या किसी को गिरफ्तार करें, हमें इससे कोई लेना-देना नहीं है. आप इसकी जांच कर सकते हैं, लेकिन आप उनकी वैवाहिक स्थिति की जांच नहीं कर सकते हैं.’

लाइव लॉ के मुताबिक जस्टिस चन्द्रचूड़ ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस बात की जांच नहीं कर सकती कि 24 साल की हादिया की शफीन से शादी वैध है या नहीं. अगर उसे इस शादी से कोई शिकायत नहीं है तो बात ही खत्म हो जाती है.

आज तक के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विवाह विवाद से परे है. हादिया बालिग है. इस पर न तो पक्षकारों को सवाल उठाने का हक है और न ही किसी कोर्ट या जांच एजेंसी को. इस तरह इस शादी की जांच एनआईए नहीं कर सकती.

ज्ञात हो कि केरल के कोट्टायम ज़िले के टीवीपुरम की अखिला अशोकन ने धर्म परिवर्तन के बाद हादिया जहां के रूप में शफीन जहां से निकाह किया था. इस मामले को हादिया के पिता अशोकन ने लव जिहाद का नाम देते हुए केरल उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था.

अशोकन ने आरोप लगाया कि मामले में जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है. उन्होंने हादिया को लेकर चिंता जताई कि हादिया को आतंकवादी संगठन आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया भेज दिया जाएगा. दरअसल हादिया से निकाह करने वाले शफीन मस्कट में काम करते हैं और उनके माता पिता भी वहीं रहते हैं.

शुरुआत में शफीन हादिया को अपने साथ मस्कट ले जाना चाहते थे लेकिन अदालत का फैसला उनके ख़िलाफ़ आया. केरल उच्च न्यायालय ने इस विवाह को अवैध क़रार देते हुए इसे लव जिहाद की संज्ञा देते हुए हादिया को उनके परिवारवालों के संरक्षण में भेज दिया. और 16 अगस्त को मामले की जांच एनआईए को सौंप दी.

शफीन जहां ने इस हिंदू युवती से पिछले साल दिसंबर में विवाह किया था. लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा इस विवाह को अमान्य घोषित करने के फैसले को चुनौती देते हुए उसने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की जिसमें उसने इस निर्णय को देश में महिलाओं की स्वतंत्रता का अपमान बताया था.

बीते नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने हादिया से बातचीत की और उसे होम्योपैथी की शिक्षा आगे जारी रखने के लिए तमिलनाडु के सलेम भेज दिया. कोर्ट ने हादिया को सुरक्षा प्रदान करने और यथाशीघ्र उसका सलेम पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए केरल पुलिस को निर्देश दिया था.

कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई के दौरान हादिया से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि हादिया उनके समक्ष पेश हुई थी और बताया था कि उसने अपनी मर्जी से शफीन जहां से निकाह किया था. एनडीटीवी के अनुसार कोर्ट ने कहा कि शादियों को आपराधिक साजिश, आपराधिक पहलू और आपराधिक कार्रवाई से बाहर रखा जाना चाहिए नहीं तो ये कानून में गलत उदाहरण होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हादिया कोई बच्ची नहीं है, 24 साल की है. ऐसे में शादी सही है या नहीं ये कोई और नहीं बल्कि लड़की या लड़का ही कह सकता है. क्या कोर्ट ये सुनवाई कर सकता है कि इंसान अच्छा है या नहीं.

लाइव लॉ के मुताबिक हादिया के अपने परिवार के साथ रहने के बारे में भी अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह फैसला करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि एक बालिग लड़की को अपने माता-पिता के साथ रहना चाहिए या नहीं. अगर कोई लड़की कहती है कि वो अपने पिता के साथ नहीं रहना चाहती तो कोर्ट उसे ऐसा करने को कैसे मजबूर कर सकता है? वो बालिग है. उसने बयान दिया है.

पीठ ने यह भी कहा कि वह केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले पर भी गौर करेगा जिसमे हदिया के निकाह को अमान्य करार दिया गया है. गौरतलब है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय ने हदिया के निकाह को अमान्य घोषित कर दिया था.

मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 फरवरी की तारीख तय करते हुए पीठ ने कहा, ‘हमें सिर्फ किसी से विवाह करने संबंधी एक वयस्क व्यक्ति के चुनाव से मतलब है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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