समाज

ट्रोल करने वाले और मेरे पुतले जलाने वाले मुझे और लिखने के लिए प्रेरित करते हैं: हांसदा सोवेंद्र

लेखक हांसदा सोवेंद्र शेखर की किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ पर संथाल आदिवासी समुदाय की महिलाओं का ग़लत चित्रण करने का आरोप लगा था.

हांसदा सोवेंद्र शेखर और किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ का कवर (फोटो साभार: फेसबुक)

हांसदा सोवेंद्र शेखर और किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ का कवर (फोटो साभार: फेसबुक)

जयपुर: ऑनलाइन उत्पीड़न करने वाले (ट्रोल) और मेरे पुतले जलाने वाले लोग मुझे और लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. यह कहना है लेखक हांसदा सोवेंद्र शेखर का जिनकी दूसरी किताब ‘द आदिवासी विल नॉट डांस’ के कारण विवाद खड़ा हो गया था.

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित 34 वर्षीय लेखक को लगभग डेढ़ वर्ष से आदिवासी समुदाय के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. समुदाय के कुछ लोगों का मानना है कि उनकी किताब में उनके अपने संथाल समुदाय के लोगों की, खासकर महिलाओं की छवि को खराब ढंग से पेश किया गया है.

पिछले वर्ष अगस्त में झारखंड सरकार ने किताब पर पाबंदी लगा दी थी. लेखक जो रांची से करीब 400 किमी दूर जिला स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा अधिकारी हैं, उन्हें निलंबित कर दिया गया और उनसे उनकी गतिविधियों को लेकर सवाल किए गए.

प्रतिबंध के बाद झारखंड सरकार ने आदिवासी समाज के जानकारों और लेखकों की एक टीम बनाई थी, जिसनें किताब में लिखी सामग्रियों की जांच की. टीम ने जांच के बाद रिपोर्ट बनाई जिसे 12 दिसंबर, 2017 को विधानसभा में पेश की गई.

राज्य सरकार ने सदन में बताया कि उन्हें इस किताब में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक कुछ नहीं मिला है. संसदीय कार्य मंत्री सरयू रॉय ने कहा कि इस किताब से जल्द प्रतिबंध हटेगा.

लेखक हांसदा के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वालों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी किताब में संथाल समुदाय की महिलाओं को गलत दिखाया है, हालांकि राज्य सरकार ने सदन में साफ कर दिया कि लेखक ने आदिवासी समाज और संथाल समुदाय की महिलाओं के ख़िलाफ़ कुछ ग़लत या अश्लील नहीं लिखा है.

जयपुर साहित्य महोत्सव में शेखर ने कहा, ‘यह शर्मनाक है. महिलाओं का उत्पीड़न करने के आरोपी यह दिखा रहे हैं कि वह महिलाओं का सम्मान करते हैं. मुझे बताया गया कि मेरी किताब के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है. किसी किताब की वजह से ऐसे हालात कैसे बन सकते हैं.’

लेखक की पहली किताब ‘द मिस्टीरियस एलमेंट ऑफ रूपा बास्की’ 2015 में आई थी. तब भी इसे लेकर विवाद हुआ था.

लेखक ने कहा, ‘उन लोगों ने मेरे पुतले जलाए. सोशल मीडिया पर उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ जो अभियान छेड़ा उससे उनका चरित्र नजर आता है. मुझे धमकाने वाले ज्यादातर लोग कागजी शेर हैं. ये लोग मुझे और लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, विरोध मुझे और लिखने को प्रेरित करता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Comments