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रामगंगा के किनारे ई-कचरा: एनजीटी ने यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

एनजीटी ने मुरादाबाद में रामगंगा नदी के किनारे ई-कचरे के निस्तारण की कार्रवाई में नाकामी को लेकर प्रदेश सरकार के साथ ज़िलाधिकारी पर भी जुर्माना लगाया है.

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फोटो साभार: indialegallive.com

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मुरादाबाद में रामगंगा नदी के किनारे ई-कचरे के निस्तारण के लिये कार्रवाई करने में नाकामी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया है.

अधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस यूडी साल्वी ने इस मामले में प्रदेश सरकार के कार्रवाई न करने को अपवाद मानते हुये कहा कि मामले में अब तक कुछ भी नहीं किया गया.

हरित अधिकरण ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी पर भी पर्यावरण जुर्माना लगाया है.

ज्ञात हो कि मई 2017 में जारी के आदेश के अनुसार एनजीटी ने कहा था कि अगर कोई भी रामगंगा के किनारे ई कचरा फेंकता हुआ पाया गया तो उस पर 1 लाक रुपये पर्यावरण जुर्माना लगाया जाएगा.

सोमवार को अधिकरण ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश ने कोई अधिकारिक आदेश जारी नहीं किया और रामगंगा नदी के किनारे पड़े हानिकारक ई-कचरे के निस्तारण के लिए अब तक कुछ नहीं किया, इसलिए हम उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख और मुरादाबाद के जिलाधिकारी पर 50 हजार का पर्यावरण जुर्माना लगाते हैं.’

एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने रामगंगा के घाटों का निरीक्षण कर एक आकलन रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें रामगंगा के किनारे करीब 25, 000 हजार टन ई-कचरे की राख पड़े होने की रिपोर्ट तैयार की गई थी. इसको हटाने के लिए गुजरात और हैदराबाद की कुछ कंपनियों को भी बुलाया गया था. सैंपल ले जाने के बाद संबंधित कंपनियों के द्वारा निस्तारण को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया.

मौजूदा समय में भी प्रतिदिन सैकड़ों लोग घाट पर राख फेंकने और जलाने का काम बेधड़क होकर कर रहे हैं. रात होते ही कई जगहों पर ई-कचरा जलाया जाता है. रामगंगा के किनारे लोगों ने घरों में भट्ठियां लगा रखी हैं.

अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को मामले में सुनवाई की अगली तारीख 21 फरवरी तक पूरी रामगंगा के लिये एक कार्य योजना पेश करने को कहा है.

अधिकरण ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वकील द्वारा दिये गये प्रतिवेदन को भी संज्ञान में लिया जिसमें कहा गया था कि जिले में ई-कचरा प्रसंस्करण की कोई इकाई नहीं है और कचरे को नदी किनारे अवैध रूप से डाला जा रहा है.

एनजीटी वैज्ञानिक महेंद्र पांडे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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