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वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामला: मीडिया की भूमिका की जांच कराने की याचिका खारिज

शीर्ष अदालत ने कहा, यह मीडिया की स्वतंत्रता और आज़ादी को सीमित करने का चोरी-छिपे किया जा रहा प्रयास है. यह मीडिया पर हमला है.

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(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Military Aircraft Pictures)

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला प्रकरण में मीडिया की भूमिका की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने के लिए दायर जनहित याचिका शुक्रवार खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि यह मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति मोहन एम. शांतानागौदर की खंडपीठ ने वरिष्ठ पत्रकार हरि जयसिंह की जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, हम मीडिया के ख़िलाफ़ किसी भी जांच का निर्देश उस समय तक नहीं देंगे जब तक उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं हो.

पीठ ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि यह मीडिया की स्वतंत्रता और आज़ादी को सीमित करने का चोरी छिपे किया जा रहा प्रयास है. यह मीडिया पर हमला है. हम इस पर विचार नहीं करेंगे.’

पीठ ने कहा, ‘हम इस तरह से मीडिया के अधिकारों को सीमित नहीं कर सकते हैं. हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया को स्वतंत्र दर्जा मिला हुआ है. हम इस पर क्यों विचार करें.’

अदालत ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच एजेंसियों को किसी व्यक्ति की संलिप्तता के बारे में साक्ष्य मिलता है तो वे जांच के लिये स्वतंत्र हैं.

पीठ ने कहा कि लेकिन समूचे मीडिया की भूमिका की जांच नहीं हो सकती है.

सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने आरोप लगाया कि मीडिया के कुछ सदस्यों को इस हेलीकॉप्टर कंपनी ने सौदे में अपने पक्ष में फैसले के लिए प्राधिकारियों को प्रभावित करने के इरादे से रिश्वत दी थी.

गीता ने कहा, ‘मैं तो सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को यह निर्देश देने का अनुरोध कर रही हूं कि इस मामले में मीडिया की भूमिका की भी जांच की जाए.’

केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि मीडिया की भूमिका की जांच कैसे हो सकती है जब यह आरोप है कि दो व्यक्तियों में मीडिया प्रबंध समझौता हुआ था.

पीठ ने जानना चाहा, क्या यह समझौता पंजीकृत है? साक्ष्य के रूप में इस समझौते की स्वीकार्यता क्या है? मीडिया की स्वतंत्रता इससे प्रभावित होगी और उसका गला घोंटा जाएगा। हम इस पर विचार नहीं करेंगे.

सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मीडिया के कुछ लोगों को इस हेलीकॉप्टर के सौदे की हिमायत के लिए रिश्वत दी गई और अनावश्यक लाभ पहुंचाए गए. यह भी आरोप लगाया कि कुछ पत्रकारों को उनके परिवार के साथ कंपनी ने इटली भी भेजा था.

2013 में संप्रग सरकार के समय अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला सामने आया था. इसमें कई भारतीय राजनेताओं और सैन्य अधिकारियों पर अगस्ता वेस्टलैंड से मोटी घूस लेने का आरोप है.

इतावली कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से भारत ने 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया था. यह सौदा 3600 करोड़ रुपये का था. इसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई जिसके बाद संप्रग सरकार ने सौदा रद्द कर दिया था.