नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: माकपा के कुशासन से भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी मज़बूत हुई- त्रिपुरा कांग्रेस

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और मिज़ोरम के प्रमुख समाचार.

फोटो: पीटीआई

फोटो: पीटीआई

अगरतला: इस बार विधानसभा चुनाव में माकपा नीत वाम मोर्चे और भाजपा के बीच मुकाबला होता दिखाई दे रहा है. अब से पहले राज्य में माकपा और कांग्रेस के बीच चुनावी दंगल होता था.

बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक सुदीप रॉय बर्मन भाजपा में शामिल हो गए हैं.  उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस माकपा से लड़ने के बारे में संजीदा नहीं है.’ उन्होंने दावा किया कि भाजपा विधानसभा चुनाव में मार्क्सवादियों को शिकस्त देगी.

2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस की अगुवाई करने वाले बर्मन ने समाचार एजेंसी भाषा से बात करते हुए कहा, ‘साल 2013 में माकपा काफी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही थी लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने गुप्त रूप से माकपा की मदद की थी ताकि संसद में पार्टी का समर्थन हासिल कर सके.’

बर्मन समेत कांग्रेस के छह विधायक पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए हैं.

माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात ने भी माना है कि इस बार मुकाबला वाम मोर्चा और भाजपा के बीच है. ज्ञात हो कि यहां 18 फरवरी को मतदान होना है.

दक्षिण त्रिपुरा में 2 फरवरी को एक चुनावी सभा में करात ने कहा था, ‘पहले के सभी चुनाव वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच लड़े गए, लेकिन इस बार मुकाबला भाजपा और वाम मोर्चे के बीच है क्योंकि कांग्रेस नेता और समर्थक भगवा दल में शामिल हो गए हैं.’

वहीं त्रिपुरा कांग्रेस के उपाध्यक्ष तापस डे ने कहा, ‘माकपा के कुशासन और पक्षपातपूर्ण व्यवहार के कारण भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी राज्य में इतनी मजबूत हो गई.’ उन्होंने कहा कि माकपा ने कभी भी लोगों की जायज मांगों को पूरा नहीं किया.

उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा का उन लोगों के प्रति रवैया प्रतिशोधात्मक है जो उसका समर्थन नहीं करते.

माकपा के प्रवक्ता गौतम दास ने कहा कि विकास के लिहाज से त्रिपुरा देश में एक मॉडल राज्य है. उन्होंने कहा कि वाम मोर्चे की सरकार के जन हितैषी, खासतौर पर, गरीबों और कामकाजी वर्ग के लिए बनाए गए कार्यक्रम इसे सत्ता में वापस लाएंगे.

आदिवासियों के वोट हासिल करने के लिए भाजपा ने इंडिजीनियस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ गठजोड़ किया है. राज्य में करीब 31 फीसदी आबादी आदिवासियों की है.

भाजपा प्रवक्ता एमके देब ने कहा कि भाजपा और आईपीएफटी का गठबंधन 20 आदिवासी आरक्षित सीटों पर गहरा प्रभाव डालेगा.

भाजपा में शामिल हुए लोगों में नैतिकता नहीं: कांग्रेस

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फोटो: पीटीआई

अगरतला: नरेंद्र मोदी की ओर से त्रिपुरा की वाम मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंकने के आह्वान के एक दिन बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को उन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री की तरह नहीं, भाजपा के नेता की तरह बोलते हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और त्रिपुरा मामलों के प्रभारी महासचिव सीपी जोशी ने मोदी पर पलटवार करते हुए पत्रकारों से कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री की तरह नहीं बल्कि भाजपा के नेता की तरह बात की.’

मोदी ने 8 फरवरी को सिपाहीजाला जिले के सोनामुरा और उनाकोटी जिले के कैलाशहर में रैली की थी. सिपाहीजाला में मोदी ने लोगों से अपील की थी कि आगामी चुनाव में माणिक (सरकार के शासन) को उखाड़ फेंके और राज्य की समृद्धि एवं विकास के लिए ‘हीरा’ को अपनाएं.’

मोदी ने स्पष्ट किया कि ‘हीरा’ का मतलब एच से हाईवे (राजमार्ग), आई से इंटरनेट वे, आर से रोडवेज (सड़क) और ए से एयरवेज (विमान सेवा) है.

जोशी ने कहा कि कांग्रेस त्रिपुरा में पहली बार किसी पार्टी से चुनावी तालमेल किए बगैर चुनाव लड़ रही है. उन्होंने कहा, ‘पहले के चुनावों में हमने क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन किया, लेकिन इस बार हम अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. हम चुनावों में माकपा और भाजपा के खिलाफ भरपूर प्रयास करेंगे.’

जोशी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 16 फरवरी को यहां रैली करेंगे, लेकिन कार्यक्रम का ब्योरा अभी तय नहीं है. उन्होंने कहा कि लोगों तक अपनी पहुंच कायम करने के लिए कांग्रेस बड़ी-बड़ी रैलियां नहीं करेगी बल्कि छोटी-छोटी बैठकें आयोजित करेगी.

पार्टी में फूट और पूर्व कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने पर जोशी ने कहा, ‘भाजपा में शामिल हुए लोगों में नैतिकता नहीं है. उतार-चढ़ाव तो राजनीति का अभिन्न हिस्सा है. लेकिन मैं कह सकता हूं कि कांग्रेस फिर से उभर कर सामने आएगी और देश की राजनीति पर वर्चस्व कायम करेगी.’

वामपंथियों ने त्रिपुरा के लोगों को गुलाम बनाया: नरेंद्र मोदी

Sonamura: Prime Minister Narendra Modi waves at the public during an election campaign rally ahead of Tripura Assembly Election in Sonamura on Thursday. PTI Photo (PTI2_8_2018_000075B)

त्रिपुरा की चुनावी सभा में नरेंद्र मोदी (फोटो: पीटीआई)

सोनमुरा/ कैलाशहर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिपुरा में वाम मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील मतदाताओं से करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने लोगों को यहां ‘गुलाम’ बना रखा है.

चुनावी राज्य में दो रैलियों को संबोधित करते हुए मोदी ने राज्य के विकास का संदर्भ देने के लिए ‘हीरा’ शब्द का इस्तेमाल किया . उन्होंने 25 साल से लगातार वाम शासन वाले राज्य में समृद्धि और विकास के लिए ‘हीरा’ पर जोर दिया. उन्होंने हीरा का मतलब बताया कि एच से हाइवे (राजमार्ग), आई से इंटरनेट वे, आर से रोडवेज और ए से एयरवेज .

मुख्यमंत्री माणिक सरकार और उनकी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए मोदी ने कहा कि त्रिपुरा के लोगों को वामपंथियों से डर लगता है.

गुरुवार को अगरतला से दक्षिण पश्चिम में 50 किलोमीटर दूर सिपाहीजाला जिले के सोनमुरा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘राशन कार्ड जैसी बुनियादी चीज के लिए लोगों को पार्टी कार्यालय का रूख करना पड़ता है . किसी की हत्या भी हो जाती है तो पुलिस तब तक मामला दर्ज नहीं करती जब तक कि माकपा से मंजूरी ना मिल जाए.’

उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों ने यहां हर चीज के लिए आम लोगों को उनपर निर्भर बना दिया है. ‘यह गुलामी का नया चेहरा है.’

उन्होंने कहा कि वाम शासन में त्रिपुरा का शायद ही कुछ विकास हुआ. उन्होंने कहा कि लोग अपना भाग्य बदलने के लिए माणिक्य या रत्न पहनते हैं, लेकिन यह माणिक (सरकार) लोगों के जीवन में समृद्धि लाने में नाकाम रहे .

मोदी ने त्रिपुरा के लोगों से राज्य में माणिक सरकार के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंकने और विकास के लिए भाजपा को मत देने की अपील की.

पूर्वोत्तर के इस राज्य में भाजपा की मौजूदगी नहीं है, लेकिन हालिया समय में माकपा नीत वाम मोर्चा के इस गढ़ में पार्टी ने खुद को मुख्य प्रतिद्धंद्वी के तौर पर खड़ा किया है. मोदी ने कहा कि त्रिपुरा की चाय प्रसिद्ध है और राज्य की समृद्धि और विकास के लिए तीन और ‘टी’ को शामिल करना होगा .

उन्होंने कहा, ‘टी से ट्रेड (कारोबार), टी से टूरिज्म (पर्यटन) और टी से खासकर युवाओं को ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) समय की जरूरत है’

रोज वैली चिटफंड घोटाले का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि राज्य के लोगों को लूटा गया और उनमें से कई ने खुदकुशी कर ली लेकिन सरकार ने उनकी परेशानी को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया.

उन्होंने कहा, ‘अगर हम सत्ता में आए तो घोटाले के जिम्मेदार लोगों को ऐसी सजा देंगे जिससे दूसरे लोग सबक लेंगे.’

बाद में उनाकोटी जिले के कैलाशहर में रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के अंतिम शासक बीर विक्रम किशोर माणिक्य बहादुर के ख्वाबों को पूरा करेगी.

भाजपा त्रिपुरा को नहीं बांटेगी: हिमंत बिस्वा शर्मा

अगरतला: भाजपा ने कहा कि वह त्रिपुरा को बांटकर अलग राज्य बनाने की मांग का समर्थन नहीं करती तथा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आईपीएफटी के साथ उसका गठजोड़ न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर है.

सत्तारुढ़ माकपा के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा पर आईपीएफटी की अलग राज्य की मांग का समर्थन करने का आरोप लगाया था.

असम भाजपा के नेता और पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन के अध्यक्ष हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, ‘हम अखंड त्रिपुरा में विश्वास करते हैं. हमारे संयुक्त बयान में ऐसा कुछ नहीं है जिसका पृथक राज्य की मांग से कोई संबंध हो.’

4 फरवरी को दिए मीडिया को दिए एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि राज्य के मूल लोगों की सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और भाषाई दर्जे की गहराई से अध्ययन के लिए अंतर मंत्रालयी उच्च स्तरीय समिति गठित करने की गृह मंत्रालय की पहल शीघ्र ही पूरी की जाएगी.

संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘त्रिपुरा के असली सर्वहारा मूल लोग हैं जो कभी राज्य की विकास धारा में शामिल नहीं रहे.’ शर्मा ने कहा कि उन्हें कोई शक नहीं है कि आगामी चुनाव में त्रिपुरा में भाजपा वाममोर्चा से जंग जीतेगी.

पत्रकारों की हत्या के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार बन गई है भाजपा: बृंदा करात

Brinda Karat Tripura Twitter CPIM

त्रिपुरा में एक चुनावी सभा में बृंदा करात (फोटो: twitter/@CPIMWestTripura)

अगरतला:माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने बीते रविवार को कहा कि भाजपा के आईपीएफटी के साथ गठबंधन करने के बाद भाजपा पत्रकार शांतनु भौमिक की हत्या के लिए ‘परोक्ष’ रूप से जिम्मेदार बन गई है क्योंकि आदिवासी पार्टी के सदस्यों ने पत्रकार की कथित रूप से हत्या की थी.

एक स्थानीय टेलीविजन चैनल ‘दिनरात’ के पत्रकार शांतनु भौमिक की गत वर्ष 20 सितम्बर को तब पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जब वह पटनीबाजार क्षेत्र के पास मंडई में आईपीएफटी का आंदोलन कवर करने के लिए गए थे.

घटना के एक दिन बाद हिंसा की घटनाओं और भौमिक की हत्या के सिलसिले में आदिवासी पार्टी के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था.

करात ने यहां से 30 किलोमीटर दूर पटनीबाजार में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘भाजपा अब हत्या में अप्रत्यक्ष रूप से लिप्त हो गई है क्योंकि उसने आईपीएफटी के साथ एक गठबंधन कर लिया है जो भौमिक की हत्या के लिए जिम्मेदार थी.’

घोटालों एवं भ्रष्टाचार के कीचड़ में कमल खिलेगा:  राजनाथ सिंह

Rajnath Singh Tripura PTI

अगरतला में एक रोड शो में गृहमंत्री राजनाथ सिंह और अन्य भाजपा नेता (फोटो: पीटीआई)

अगरतला: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते रविवार को कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद त्रिपुरा में कमल खिलेगा क्योंकि राज्य के लोग भ्रष्ट वाममोर्चा सरकार से मोहभंग हो गया है.

सिंह ने राज्य की राजधानी के उत्तरी हिस्से में इंद्रनगर में एक रैली में कहा, ‘आज सुबह पार्टी की विजय संकल्प यात्रा में लोगों की इतनी तादाद देखकर अब मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि विधानसभा में भ्रष्ट वाममोर्चा सरकार को उखाड़ फेंक दिया जाएगा.’

गृहमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर बड़ा अचरज हुआ कि त्रिपुरा में 66 फीसद लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं. उन्होंने कहा, ‘कमल कीचड़ में खिलेगा. माकपा ने पिछले 25 सालों के घोटालों एवं भ्रष्टाचार से कमल के खिलने की जमीन तैयार कर दी है.’

उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्यप्रदेश को देश का कमजोर और बीमारू राज्य कहा जाता था लेकिन इन राज्यों में भाजपा के सत्ता में आने के बाद समस्याओं के निवारण पर ध्यान दिया गया.

उन्होंने कहा, ‘अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकारों में कोई भी मंत्री भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा.’

सिंह ने कहा कि वाजपेयी सरकार ने लोगो के कल्याण के लिए पूर्वोत्तर विकास विभाग गठित किया.

उन्होंने कहा, ‘माणिक सरकार ने पत्रकार एसोसिएशनों की मांग के बावजूद दो पत्रकारों की हत्या की सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की. राष्ट्रीय स्तर पर दोषसिद्धि दर 46 है जबकि त्रिपुरा में 22 है.’

मेघालय: ईसाई नेताओं का वीजा खारिज, कांग्रेस ने ठहराया केंद्र सरकार को जिम्मेदार

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शिलॉन्ग: बैपटिस्ट वर्ल्ड अलायंस (बीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष पॉल म्सिजा को भारत यात्रा के लिए वीजा देने से मना कर दिया गया है. वह मेघालय में चर्च के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आने वाले थे. एक स्थानीय ईसाई नेता ने दावा किया कि इससे ईसाई ‘नाराज’’ हैं.

मेघालय में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. सरकार ने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करते हुए दक्षिण अफ्रीका स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से म्सिजा के वीजा आवेदन पर पुनर्विचार करने को कहा.

गारो बैपटिस्ट कन्वेंशन के महासचिव जेआर संगमा ने समाचार एजेंसी भाषा से बात करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने बीडब्ल्यूए अध्यक्ष को बुधवार रात बताया कि मेघालय में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दाखिल उनका वीजा आवेदन खारिज कर दिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘जैसे पोप कैथोलिक समुदाय के लिए हैं, बीडब्ल्यूए अध्यक्ष वैसे ही हमारे लिए पूरी दुनिया के बैपटिस्ट समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरू हैं.’

वह मेघालय के पूर्वी गारो हिल्स जिले के राजासिमिला में 8 फरवरी से शुरू हो रहे बैपटिस्ट चर्च के 150वें स्थापना समारोह में हिस्सा लेने के लिए आने वाले थे. इस बीच केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने यहां कहा कि दक्षिण अफ्रीका में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से वीजा आवेदन पर पुनर्विचार करने को कहा गया है.

भाजपा के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यहां आए अल्फोंस ने कहा, ‘विदेश मंत्री (सुषमा स्वराज) ने जोहानिसबर्ग स्थित उच्चायोग से इस पर (वीजा आवेदन) पुनर्विचार करने को कहा है.’

उन्होंने बताया कि सुषमा ने महावाणिज्य दूत से इस बारे में बात की है और वीजा आवेदन पर पुनर्विचार के लिए बैठक की जाएगी. संगमा ने बताया कि वीजा आवेदन गत 29 जनवरी को दिया गया था.

उन्होंने कहा, ‘बैपटिस्ट ईसाई उनका वीजा खारिज किए जाने को लेकर काफी नाराज हैं.’ बैपटिस्ट नेता मामले में हस्तक्षेप की मांग को लेकर केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस के संपर्क में हैं.

मेघालय प्रदेश कांग्रेस समिति ने वीजा खारिज किए जाने को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार की कड़ी निंदा की है.

कांग्रेस सांसद विंसेंट एच पाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘इस मामले को केवल वीजा खारिज किए जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इससे मौजूदा सरकार, भाजपा और नागपुर में बैठे उनके आकाओं की विचारधारा का पता चलता है.’

कांग्रेस के स्टार चुनाव प्रचारकों में सोनिया, मनमोहन शामिल

फाइल फोटो: पीटीआई

फाइल फोटो: पीटीआई

शिलॉन्ग: मेघालय में फरवरी के अंत में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता शशि थरूर को अपने स्टार प्रचारकों में शामिल किया है. पार्टी के एक पदाधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भी चुनाव प्रचार के लिए राज्य में लौट रहे हैं. गांधी ने पिछले महीने एक रॉक कॉन्सर्ट के जरिए आधिकारिक रूप से चुनावी बिगुल फूंका था.

मेघालय में 27 फरवरी को मतदान होगा और नतीजे तीन मार्च को घोषित किए जाएंगे. मौजूदा 60 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल छह मार्च को समाप्त हो रहा है.

राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी  सांसद विंसेट ए पाला ने बताया, ‘संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता शशि थरूर चुनाव प्रचारकों में शामिल हैं. इस सूची को पार्टी की चुनाव समिति ने मंजूरी दे दी है और इसे चुनाव आयोग के पास भेज दिया गया है.’

पाला ने बताया कि पार्टी के स्टार प्रचारकों के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी, सलमान खुर्शीद, ऑस्कर फर्नांडिस और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी भी चुनाव प्रचार के लिए  राज्य में आएंगे. पार्टी ने कुल 40 स्टार प्रचारकों की सूची सौंपी है.

विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के लिए पार्टी के 20 स्टार प्रचारक जहां इसी राज्य से हैं. वहीं 20 अन्य बाहर से आ रहे हैं.

इसी राज्य से आने वाले स्टार प्रचारकों में मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा और उनके भाई जेनिथ संगमा, राज्य पार्टी प्रभारी सेलेस्तिन लिंगदोह, केबिनेट मंत्रियों में आरवी लिंगदोह, एम एम डंग्गो, एचडीआर लिंगदोह और राज्यसभा सदस्य वानसुक सीम शामिल हैं.

मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने नामांकन दाखिल किया

शिलॉन्ग: मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 6 फरवरी अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र अमपाटी से नामांकन दाखिल किया, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनपीपी की नेता अगाथा के संगमा ने दक्षिण तूरा सीट से पर्चा भरा. उनके भाई पूर्व सांसद थॉमस ए संगमा ने भी नामांकन दाखिल किया.

2010 से इस पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा, इस बार दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.  उन्होंने बताया कि मुकुल संगमा दक्षिण पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में अमपाटी सीट से पांचवीं बार चुनाव जीतने का जतन कर रहे हैं.

मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने अम्पति की अपनी परंपरागत सीट के अलावा विधानसभा क्षेत्र की एक अन्य सीट से भी नामांकन दाखिल किया है. अगर मुकुल संगमा चुनाव जीतते हैं तो वह पांचवी बार विधानसभा में अपनी जगह सुरक्षित कर पाएंगे.

कांग्रेस के यह दिग्गज नेता दक्षिण पश्चिम गारो पहाड़ी जिले के अम्पति के साथ ही पूर्वी गारो पहाड़ी जिले के सांगसक से मैदान में हैं. पिछले 10 सालों में यह पहली बार है कि संगमा दूसरी सीट से भी उम्मीदवारी कर रहे हैं.

नामांकन पत्रों की छंटाई के बाद अम्पति से मुख्यमंत्री समेत केवल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. वहीं सांगसक सीट पर संगमा समेत सात उम्मीदवारों ने दावेदारी की है.

भाजपा छोड़ने के कुछ घंटे बाद मानस चौधरी का नाम कांग्रेस की सूची में दिखा

शिलॉन्ग: विधानसभा टिकट नहीं दिये जाने को लेकर भाजपा से इस्तीफा देने वाले मेघालय के पूर्व मंत्री मानस चौधरी का नाम सत्ताधारी कांग्रेस की सूची में दिखा है. चौधरी का नाम कांग्रेस द्वारा बाकी सीटों के लिए घोषित तीन नामों की अंतिम सूची में आया है.

चौधरी ने दावा किया है कि भाजपा उम्मीदवारों की सूची से उनका हटना भ्रष्टाचार समाप्त करने के प्रयास के लिए एक बड़ा झटका होगा. वह दक्षिण शिलॉन्ग सीट से चुनाव लड़ेंगे.

भाजपा ने दक्षिण शिलॉन्ग सीट से पूर्व उप विधानसभाध्यक्ष सनबूर शुलई को टिकट दिया है. इसी सीट पर चौधरी की नजर थी.

नगालैंड: भाजपा को छोड़ किसी भी दल के साथ चुनाव बाद गठबंधन के लिए तैयार: कांग्रेस

प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

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कोहिमा: अपने दम पर नगालैंड चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने कहा कि वह राज्य में सरकार गठन के लिए चुनाव के बाद किसी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल के साथ गठबंधन के विरुद्ध नहीं है.

कांग्रेस ने नगालैंड विधानसभा की 60 सीटें में से 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारा है. राज्य में 27 फरवरी को चुनाव है जिसका परिणाम तीन मार्च को त्रिपुरा और मेघालय के साथ आएगा.

नगालैंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केवेखापे थेरी ने कहा, ‘पार्टी अपने बलबूते आगामी चुनाव लड़ रही है लेकिन हम सरकार बनाने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ चुनाव बाद गठबंधन करने को इच्छुक हैं. ’

उन्होंने कहा, ‘राज्य में भाजपा को छोड़कर हम किसी भी दल के साथ चुनाव पश्चात गठबंधन करने के लिए तैयार हैं.’ कांग्रेस नगालैंड में पांच बार सत्ता में रह चुकी है लेकिन 2003 से विपक्ष में है.

गठबंधन के लिए एनपीएफ से बात कर सकती है कांग्रेस

नई दिल्ली: विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस कुछ सीटों के बंटवारे पर अनौपचारिक सहमति के लिए नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) से बातचीत कर सकती है. पार्टी के सूत्रों ने यह जानकारी दी.

कांग्रेस ने 6 फरवरी को 60 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए अपने 23 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी. राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी एनपीएफ ने घोषणा की थी कि वह 58 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

भाजपा ने पहले से ही नवनिर्मित नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के साथ समझौता कर लिया है और 20 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री नेफियू रियो के नेतृत्व में बनी एनडीपीपी 40 विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारेगी.

पार्टी के एक नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, एनपीएफ पहले  ही लगभग सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है. वैसे नामांकन वापिस लेने के लिए अभी भी वक्त बचा हुआ है.

उन्होंने कहा, हम एनपीएफ नेताओं से बात करने का प्रयास करेंगे कि एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन से मुकाबले के लिए कुछ सीटों पर सहमति बनाई जाए.

इससे पहले तक कांग्रेस समेत लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों ने संयुक्त रूप से चुनाव न होने देने का फैसला किया था. यह निर्णय राज्य की जनजातीय संस्थाओं की उस मांग की प्रतिक्रिया स्वरूप लिया गया था जिसमें लंबे समय से स्थगित नगा राजनीतिक मुद्दे का पहले समाधान करने को कहा गया था.

बहरहाल, विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों की तरफ से नामांकन दाखिल किए जाने से यह अनिश्चितता खत्म होती हुआ लगती है.

एनपीएफ ने घोषणा पत्र जारी किया

कोहिमा: सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ)  ने 27 फरवरी को होने वाले नगालैंड विधानसभा चुनाव के लिए 6 फरवरी को पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया.

एनपीएफ नेता लिजित्सू ने पार्टी का घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य ‘गंभीर शासन सुधार, गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे का विकास, अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, युवाओं को दक्ष बनाना, राज्य की अर्थव्यवस्था का विकास और जीवन में संपूर्ण सुधार लाना शामिल हैं.’

उन्होंने कहा कि भाजपा के नवगठित एनडीपीपी से हाथ मिला लेना एनपीएफ के लिए वरदान है. उन्होंने दावा किया, ‘हम चुनाव का सामना करेंगे और हम एक बार फिर सरकार का गठन करेंगे.

257 नामांकनों में से 227 वैध पाए गए

कोहिमा: नगालैंड के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) अभिजीत सिन्हा ने गुरुवार को बताया है कि 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दर्ज 257 नामांकन पत्रों में से 227 ही वैध पाए गए.

उन्होंने बताया कि नौ राजनीतिक पार्टियों और स्वतंत्र उम्मीदवारों के 257 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र की जांच 8 फरवरी को हुई. इन उम्मीदवारों में पांच महिलाएं भी हैं.

मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि राज्य में निर्वाचन अधिकारियों के 53 कार्यालयों में कड़ी सुरक्षा के बीच वैध नामांकन का चुनाव किया गया. नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तारीख 12 फरवरी है.

भाजपा ने उम्मीदवारों की सूची जारी की, नेताओं ने गठबंधन के खिलाफ शाह को लिखा पत्र

फोटो: पीटीआई

प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

कोहिमा:  भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए 3 फरवरी को अपने 20 उम्मीदवारों की सूची जारी की. इस बीच, भाजपा के कुछ प्रदेश स्तरीय नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर नवगठित एनडीपीपी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के खिलाफ अपनी नाखुशी जाहिर की है.

भाजपा पहली पार्टी है जिसने आगामी नगालैंड चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है जबकि क्षेत्रीय पार्टियों, जनजातीय संगठनों और सिविल सोसाइटी संगठनों की मांग है कि चुनाव से पहले नगा राजनीतिक मसले का हल निकाला जाए.

सूची में 10 जिलों के उम्मीदवारों के नाम हैं. राज्य की राजधानी कोहिमा और पेरेन जिलों को छोड़ दिया गया है और इसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीसासोली ल्होंगू का नाम शामिल नहीं है. शाह को लिखे गए पत्र में ल्होंगू ने भी दस्तखत किए हैं.

पार्टी की प्रदेश इकाई के महासचिव एडुजु थेलुओ सहित कई अन्य की ओर से लिखा गया पत्र 2 फरवरी को शाह को भेजा गया. भाजपा और एनडीपीपी के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन होने के तुरंत बाद यह पत्र लिखा गया. एनडीपीपी का गठन पूर्व मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने किया है.

मीडिया को उपलब्ध कराए गए पत्र में कहा गया कि जमीनी स्तर पर गठबंधन की कोई जड़ें नहीं हैं. पत्र के मुताबिक, 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए भाजपा और एनडीपीपी के बीच 20:40 के सीट बंटवारा समझौता को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि एनडीपीपी ने गठबंधन के लिए भाजपा से संपर्क किया था.

असम: ट्रैक्टर वितरण परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ- कांग्रेसी विधायक

गुवाहाटी: असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने किसानों को ट्रैक्टर वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मामले की जांच सदन की सर्वदलीय समिति से कराने की मांग की.

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक ने राज्य में कोल इंडिया द्वारा खनन में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और इसकी सीबीआई जांच की मांग की.

सैकिया ने विधानसभा परिसर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘प्रीत नाम की एक ट्रैक्टर कंपनी को सरकार ने अधिक पैसा दिया. फार्मर पोर्टल में कंपनी ने एक ट्रैक्टर की कीमत 5.83 लाख रूपये बताई है जबकि गवर्मेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर एक ट्रैक्टर की कीमत 4.53 लाख रूपये बताई गई है.’

उन्होंने कहा कि कीमत में अंतर शीर्ष स्तर पर ‘बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार’ दिखाता है. उन्होंने सर्वदलीय समिति से जांच करवाने की मांग की.

सैकिया ने कहा कि जारी बजट सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे को उठाएगी. उन्होंने कहा कि उक्त कंपनी धोखाधड़ी की विभिन्न गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार की जांच के दायरे में है.

पिछले वर्ष 10 दिसंबर को असम सरकार ने मुख्यमंत्री समग्र ग्राम्य उन्नयन योजना के तहत प्रदेश भर के किसानों को ट्रैक्टर वितरण शुरू किया था.

अरुणाचल प्रदेश: दो स्थलों के लिये विश्व विरासत स्थल का दर्जा चाहती है सरकार

The logo of the United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO) is seen in front of its headquarters in Paris, France, October 4, 2017. Picture taken October 4, 2017. REUTERS/Philippe Wojazer

फोटो: रॉयटर्स

ईटानगर:अरुणाचल प्रदेश सरकार ने यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल की सूची में अपने दो स्थानो को शामिल करने की वकालत की है.

राज्य के अनुसंधान विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में निचले सुबनसिरी जिले में स्थित जिरो घाटी में अपातानी सांस्कृति भूभाग एवं पश्चिम कामेंग जिले में किलेबंद गांव थेमबांग डिजोंग को यूनेस्को की अस्थायी सूची में जगह दिया गया है और अब राज्य इन्हें विश्व विरासत स्थलों की अंतिम सूची में स्थान दिलाने के लिये प्रयासरत है.

अधिकारी ने बताया कि इन दोनों स्थलों को अंतिम सूची में शामिल किया जाये यह सुनिश्चित करने के लिये सरकार वहां व्यापक मरम्मत एवं संरक्षण कार्य कर रही है.

पश्चिम कामेंग जिले में स्थित किलाबंद गांव थेमबांग डिजोंग करीब 3.2 एकड़ में फैला है और उत्तर एवं दक्षिण में इसके दो द्वार हैं.

डिजोंग का अर्थ होता है किला. यह स्थान प्राचीन एवं ऐतिहासिक अवसंरचनाओं से घिरा है और यह मोनपा जनजाति की पारंपरिक बस्ती है. गांव के अंदर किसी निवासी की निजी संपत्ति नहीं है बल्कि वहां सबकुछ पंचायत प्रणाली से संचालित होता है.

अपातानी सांस्कृतिक भूभाग को भी यहां के समुदाय के अंदर खेती करने की विशिष्ट तकनीक के चलते यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है. किसान धान के खेत के पिछले हिस्से में मछली पालन करते हैं और खेतों की मेड़ पर ज्वार उपजाते हैं.

अप्रैल 2014 में देश में अरुणाचल प्रदेश के स्थलों सहित 22 स्थलों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया था. बहरहाल अंतिम सूची में संयुक्त राष्ट्र एजेंसी से स्वीकृति मिलनी बाकी है.

राज्य में छह जगहों के नाम रखने के चीन के प्रयास को भारत ने किया खारिज

नई दिल्ली: भारत सरकार ने चीन के सिविल मामलों के मंत्रालय का अपनी वेबसाइट पर एक कथित अधिसूचना जारी कर अरुणाचल प्रदेश राज्य में छह स्थानों के नाम रखने के प्रयास को खारिज कर दिया है.

विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि चीन के सिविल मामलों के मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर तथाकथित अधिसूचना 13 अप्रैल 2017 को जारी की थी. उन्होंने बताया कि पहले भी कुछ अवसरों पर चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम रखने चाहे थे.

सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार ने चीन के इस प्रयास को खारिज कर दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में कुछ स्थानों के गढ़े हुए नाम रख देने से इस तथ्य को बदला नहीं जा सकता कि अरुणाचल प्रदेश राज्य भारत का एक अभिन्न एवं अविभाज्य अंग है.

एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में सिंह ने बताया कि 28 दिसंबर 2017 को तीन चीनी नागरिकों को भारतीय सेना के एक गश्ती दल ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले के शियुंग ला क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग एक किमी भीतर भारतीय सीमा में एक ट्रैक का निर्माण करते पाया था.

उन्होंने बताया कि तीनों चीनी नागरिक भारतीय गश्ती दल को देख कर चीन के इलाके में लौट गए. निर्धारित तंत्र के अनुसार, इस घुसपैठ पर चर्चा के लिए एक फ्लैग बैठक आयोजित की गई. चीनी पक्ष ने माना कि उनके तीन नागरिकों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा लांघी थी और उन्होंने तत्काल उपकरण हटाने पर सहमति भी व्यक्त की.

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा को चीन विवादित मानता है. पूर्वी क्षेत्र में चीन अरुणाचल प्रदेश में भारतीय भूक्षेत्र के लगभग 90,000 वर्ग किमी इलाके पर अपना दावा करता है.

असम: एशिया में 100 वें पायदान पर तेजपुर विश्वविद्यालय, देश में सातवें नंबर पर

Tezpur University

तेजपुर यूनिवर्सिटी

तेजपुर: इस साल महाद्वीप के लिए जारी वार्षिक विश्वविद्यालय रैंकिंग में असम में स्थित तेजपुर विश्वविद्यालय एशिया में 100 वें पायदान पर है. विश्वविद्यालय ने गुरुवार को एक बयान में बताया कि 2017 में 131-140 से इसकी स्थिति में सुधार हुआ है.

द टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग के मुताबिक देश के सभी उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों सहित केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह सातवें नंबर पर है. बयान में बताया गया है कि एशिया में 29 वें नंबर पर रहने वाला भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलूरू देश में शीर्ष स्थान पर काबिज है.

रैंकिंग में तेजपुर विश्वविद्यालय से आगे रहने वालों में आईआईटी मुंबई, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी रूड़की, आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्ली है. इसमें बताया गया है शोध की श्रेणी में तेजपुर विश्वविद्यालय चौथे स्थान पर है.

इससे आगे रहने वाले संस्थानों में आईआईएससी बेंगलूरू, आईआईटी बेंगलूरू और आईआईटी खड़गपुर भी हैं.

मंगलवार को परिणाम की घोषणा करने से पहले पिछले साल की तरह टाइम्स हायर एजुकेशन एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2018 के जजों ने 13 श्रेणी में प्रदर्शन का आकलन किया. बयान में बताया गया है कि सिंगापुर स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी लगातार तीसरे साल एशिया में शीर्ष पायदान पर बनी हुयी है.

राज्य में आरएसएस चला रहा है सरकार: तरुण गोगोई

तरुण गोगोई (फोटो: पीटीआई)

तरुण गोगोई (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने मंगलवार को कहा कि राज्य के मुख्य सचिव वीके पीपरसेनिया और पुलिस महानिदेशक मुकेश सहाय पूरी तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नियंत्रण में है और फिलहाल आरएसएस ही सरकार चला रहा है.

पीपरसेनिया और सहाय ने वर्ष 2015 में क्रमश: असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक का पदभार संभाला था और तब गोगोई मुख्यमंत्री थे.

गोगोई ने विधानसभा परिसर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सरकार पीपसेनिया, पुलिस महानिदेशक तथा कुछ और अधिकारी चलाते हैं. पीपरसेनिया और पुलिस महानिदेशक पूरी तरह आरएसएस के नियंत्रण में हैं. अन्यथा, मुख्य सचिव क्यों आरएसएस से मिलने जाते.’

हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और आरएसएस नेताओं के बीच की किसी भी स्पष्ट भेंट के बारे में नहीं बताया. कद्दावर कांग्रेस नेता ने कहा कि जब पीपरसेनिया मुख्य सचिव बनाये गये थे तब खुफिया विभाग ने उन्हें आरएसएस से उनकी करीबी के बारे में नहीं बताया था.

काजीरंगा में सेंसर बैरियर, एनजीटी ने इंसानों को तैनात करने के प्रस्ताव को किया खारिज

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के समीप सड़क हादसों में जानवरों की मौत नियंत्रित करने के वास्ते संवेदी (सेंसर) उपकरण से चलने वाले स्वचालित यातायात अवरोधकों के स्थान पर इंसानों को तैनात करने के असम सरकार के प्रस्ताव खारिज कर दिया है.

हरित पैनल ने इस प्रस्ताव को लेकर असम सरकार की खिंचाई की और कहा कि बजटीय दबाव के अलावा इस वैकल्पिक प्रस्ताव को अपनाने का कोई कारण नहीं नजर आता.

राज्य सरकार ने एनएच 37 के वन खंड (जहां जानवरों की आवाजाही होती है) की निगरानी के वास्ते और लोगों को तैनात करने का प्रस्ताव रखा है. यह राष्ट्रीय राजमार्ग जखालाबंद से बोकाखाट वनक्षेत्र होते हुए जाता है.

अधिकरण ने कहा कि अतिरिक्त होम गार्ड या आकस्मिक श्रमिकों को यदि तैनात किया जाता है, तो वह इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए नाकाफी उपाय होगा.

कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस यूडी साल्वी की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, ‘हमारे सम्मुख स्वचालित जानवर संवेदी अवरोधकों की तुलना में इस विकल्प की प्रभावकारिता के पक्ष में कोई सबूत नहीं है . दूसरी तरफ, हम रिकॉर्ड से पाते हैं कि स्वचालित जानवर संवेदी अवरोधक (सेंसर बैरियर) लगाने की सिफारिश की दिशा में बढ़ा जा रहा है. अतएव हमें राज्य सरकार द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक प्रस्ताव में दम नजर नहीं आता. ’

अधिकरण वन्यजीव कार्यकर्ता रोहित चौधरी की अर्जी पर सुनवाई कर रहा है जिसने एनएच 37 को चौड़ा किये जने का विरोध किया है.

राज्य सरकार और ओला के बीच नदी टैक्सी सेवा के लिये समझौता

फोटो: twitter

फोटो: twitter

गुवाहाटी: असम सरकार और टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने वाली संग्राहक ओला के बीच बीते रविवार एक सहमति ज्ञापन समझौता किया गया. इसके तहत ओला गुवाहाटी में एप आधारित नदी टैक्सी सेवा की शुरुआत करेगी.

नदी टैक्सी सेवा एक मशीन से चलने वाली नाव के जरिये चलाई जायेगी. माना जा रहा है कि यह नाव परंपरागत नावों की तुलना में अधिक तेज चलेगी और सुरक्षित भी होगी.

ओला एप के तहत तेज गति की नौकायें गुवाहाटी के लचित घाट और मचखोवा से उत्तरी गुवाहाटी के लिये चलाई जायेंगी. इससे इस नदी के पार पहुंचने का समय पांच मिनट तक कम होगा. सड़क मार्ग से इसमें करीब 45 मिनट का समय लगता है.

एक अन्य एमओयू आईआईटी गुवाहाटी और कलाम इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ टेक्नोलॉजी (केआईएचटी) के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को लेकर हुआ. यह हस्तांतरण चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होगा.

राज्य में पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करना बड़ी चुनौती: तेल कंपनियां

गुवाहटी: तेल उद्योग से जुड़ीं कंपनियों ने असम सरकार से पर्यावरण मंजूरियों की दिशा में ज्यादा काम करने को कहा है क्योंकि यह राज्य में परियोजना के क्रियान्वयन में बड़ी चुनौती है.

हाइड्रोकार्बंस के महानिदेशक अतनु चक्रवर्ती ने कहा, ‘पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करना असम में सबसे कठिन काम है. इस संबंध में पर्यावरण एवं वन विभाग की वही राय है जो कि पेट्रोलियम मंत्रालय की है. राज्य सरकार इस मामले में अपने स्तर पर निपटना है.’

यहां आयोजित वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन 2018 में एक सत्र में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धारणा है कि तेल उद्योग प्रदूषण का कारण है. कई पर्यावरणविद और कार्यकर्ता हैं, जो उत्पादन और अन्वेषण गतिविधियों द्वारा पर्यावरण के नुकसान के बारे में बात करते हैं.

उन्होंने कहा कि लोगों में नकरात्मक छवि नहीं बनानी चाहिये. लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिये राज्य सरकारों की मदद की जरूरत है. उन्होंने लॉजिस्टिक्स की समस्या और काम का समय छोटा रहने जैसे मुद्दों को भी उठाया.

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी (एचओईसी) के प्रबंध निदेशक पी एलंगो ने इस संबंध में व्यापक नीति की आवश्यकता पर जोर दिया है. कंपनी ने कहा कि उसे राज्य सरकार से बेहतर सहयोग प्राप्त हुआ लेकिन हम पर्यावरण मंजूरी के मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश चाहते हैं.

निवेशकों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक: मुख्यमंत्री सोनोवाल

MODI Sonowal Assam Global Investors Summit

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ सर्बानंद सोनोवाल (फोटो: twitter/@PMOIndia)

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बीते रविवार को कहा कि राज्य में पहले वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में पेट्रोलियम, दूरसंचार, स्वास्थ्य एवं पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं.

सोनोवाल ने यहां कहा, ‘यह एक अच्छी शुरूआत है. निवेशकों की प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक है. मुझे भरोसा है कि निवेश प्रतिबद्धता असम को बेहतर अर्थव्यवस्था बनाएगी.’

उन्होंने कहा कि ‘एडवांटेज असम’ शिखर सम्मेलन में एक लाख करोड़ रुपये रुपये की निवेश प्रतिबद्धता को लेकर करीब 200 से अधिक शुरूआती समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घघाटन किया था. सम्मेलन में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, कई केंद्रीय मंत्री, पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश तथा मणिपुर के मुख्यमंत्री, 16 देशों के राजदूत तथा उच्चायुक्त, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन समेत अन्य ने भाग लिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी ने राज्य में 13,000 करोड़ रुपये तथा ऑइल इंडिया लि. ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का संकल्प जताया है.

इंडियन ऑइल कारपोरेशन तथा नुमालीगढ़ रिफाइनरी लि. क्रमश: 3,432 करोड़ रुपये तथा 3,410 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी.

निजी कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने राज्य में खुदरा, पेट्रोलियम, दूरसंचार, पर्यटन तथा खेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में 2,500 करोड़ रुपये निवेश का संकल्प जताया. इससे अगले तीन साल में करीब 80,000 रोजगार सृजित होंगे.

वहीं टाटा ट्रस्ट ने कैंसर देखभाल कार्यक्रम में असम सरकार के साथ मिलकर क्रियान्वयन को लेकर 2,000 करोड़ रुपये के निवेश का संकल्प जताया. इस कार्यक्रम को अगले साल से राज्य के 15 जिलों के 17 केंद्रों पर चलाया जाएगा.

इंडिया-यूके इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ 2,700 करोड़ रुपये जबकि सेंचुरी प्लाई 2,100 करोड़ रुपये निवेश करने को लेकर समझौते किये. वहीं स्पाइसजेट के प्रमुख अजय सिंह ने कहा कि असम में 1,250 करोड़ रुपये के निवेश की योजना की घोषणा की.

इसके अलावा इनफिनिटी ग्रुप आईटी पार्क तथा रीयल एस्टेट परियोजना में 1,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी वहीं मेदान्ता समूह स्वास्थ्य क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये तथा डालमिया भारत सीमेंट ने 1,100 करोड़ रुपये निवेश के संकल्प जताये.

सोनोवाल ने कहा कि निवेश से राज्य में युवाओं के लिये रोजागार के पर्याप्त अवसर सृजित होंगे.

औषधि क्षेत्र के लिये निवेश नीति में बदलाव को तैयार असम

असम सरकार ने कहा कि वह अपनी निवेश नीतियों में बदलाव के लिए तैयार है. इसकी पीछे सरकार की मंशा औषधि क्षेत्र को राज्य में औषधि इकाइयां स्थापित करने के लिये आकर्षित करना है.

राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने यहां चल रहे वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में कहा कि असम में कोई विशिष्ट औषधि नीति नहीं है. ऐसे में सरकार मौजूदा नियमों में बदलाव करने के लिये तैयार है ताकि स्वास्थ्य सेवा खंड से जुड़े उद्योग आएं और राज्य में निवेश करें.

मंत्री ने कहा, ‘हमारे पास एक सामान्य निवेश नीति है. लेकिन आप की आवश्यकताएं कुछ भिन्न हो सकती हैं. असम सरकार आपकी आवश्यकताओँ के अनुरूप मानदंडों को अनुकूल बनाने के लिये तैयार है.’

उन्होंने कहा, ‘यहां सरकार और राजनीतिक वर्ग आपके लिये उपयोगी है. हम निवेश चाहते हैं. इसलिये हम आपको राज्य में लाने के लिये कदम बढ़ाने के लिये तैयार रहेंगे.’

असम के साथ संबंध बढ़ाने का इच्छुक जापान:  जापानी राजदूत

जापान ने अपने नागरिकों को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में जाने संबंधी यात्रा परामर्श शर्तों में ढील दी है. पिछले दो साल के दौरान असम में सुरक्षा स्थिति में सुधार आने के बाद जापान ने यह कदम उठाया है.

इसके साथ ही उसने असम के लोगों के साथ जापानी नागरिकों का संपर्क बढ़ाने को लेकर भी गंभीरता दिखाई है. भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामत्सू ने 3 फरवरी को गुवाहाटी में यह जानकारी दी.

असम सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में जापान पर आयोजित सत्र में हिरामत्सू ने कहा, ‘जापान ने हाल ही में असम की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिये यात्रा परामर्श शर्तों में ढील दी है. असम को भी नई दिल्ली के समान ही सुरक्षा मानकों पर ला दिया गया है. इसमें सतर्कता को लेकर सबसे कम हिदायतें दी गई हैं.’

उन्होंने कहा, ‘इससे पता चलता है कि जापान असम के लोगों के साथ अपने नागरिकों का संपर्क बढ़ाने को लेकर काफी गंभीर है. इसके साथ ही सुरक्षा परिदृश्य में सुधार आने से आवागमन को भी बढ़ावा मिला है.’

इसके साथ ही जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जीका) ने असम सरकार से राज्य में चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आ रही अड़चनों को दूर करने का आग्रह किया है. जीका ने राज्य में कई परियोजनाओं के लिये वित्तपोषण सुविधा उपलब्ध कराई है.

जीका इंडिया कार्यालय के मुख्य प्रतिनिधि ताकेमा साकामोतो ने कहा कि राज्य में प्रवेश अनुमति प्रक्रिया में समस्या है. जमीन की उपलब्धता, पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की तैयारी और सुरक्षा स्थिति को लेकर भी कुछ समस्यायें हैं.

उन्होंने कहा कि असम सरकार को इन चुनौतियों से बाहर निकलना होगा ताकि जीका समय पर परियोजनाओं को पूरा कर सके और निवेश पर बेहतर रिटर्न के अपने रिकॉर्ड को बरकरार रख सके.

भारत को ब्रह्मपुत्र के रास्ता बदलने से चिंतित होने की जरूरत नहीं: पूर्व सैन्य प्रमुख

ब्रह्मपुत्र (फोटो साभार: theconversation.com)

ब्रह्मपुत्र (फोटो साभार: theconversation.com)

कोलकाता: पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत) शंकर रॉय चौधरी ने कहा कि चीन द्वारा त्सांगपो-ब्रह्मपुत्र नदी के मार्ग में कथित तौर पर परिवर्तन करने से भारत को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर आरोप सही है तो भारत में ब्रह्मपुत्र कहलाने वाली इस नदी की पर्याप्त सहायक नदियां है जिनमें उचित मात्रा में बारिश का पानी आता है.

रॉय चौधरी ने भारत-चीन संबंध- विवादित मुद्दों को हल करने के तरीकों पर आयोजित एक विचार गोष्ठी में कहा, ‘अगर चीन पानी का रास्ता बदलता है तो भारत को चिंता करने की जरूरत नहीं है.’

चीन ने इन खबरों को खारिज किया है कि उसने त्सांगपो नदी के मार्ग में परिवर्तन कर उसे शिनजियांग प्रांत की ओर किया है. पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने हालांकि इस मुद्दे पर कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि भारत के साथ चीन जल युद्ध शुरू करने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘चीन ब्रह्मपुत्र को लेकर जल युद्ध करने पर सक्रियता से विचार कर रहा है.’ जनरल रॉय चौधरी ने उद्योग और निर्माण के मोर्चे पर चीन से पिछड़ने के लिए भारत के आर्थिक क्षेत्र के कथित तौर पर धीमी रफ्तार से चलने को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, ‘इसके लिए भारत के सुस्त और लालची आर्थिक क्षेत्र को जिम्मेदार ठहराना चाहिए ना कि चीन को. हमें चीन के मुकाबले में सस्ते एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाने चाहिए.’

उन्होंने कहा कि चीन में बने उत्पादों ने बहुत पहले ही भारत में कब्जा जमा लिया. उन्होंने कहा कि चीन से मुकाबला करने के लिए भारत के निर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाना चाहिए.

एशिया की अर्थव्यवस्था के पश्चिमी अर्थव्यवस्था से अधिक वृद्धि करने पर नारायणन ने कहा, ‘दुनिया में एक समय पर दो आबादियों के एक साथ वृद्धि करने और वो भी एक ही क्षेत्र में, ऐसा विरले ही देखा गया है तथा इसके परिणाम हितकारी नहीं रहे हैं. चीन और भारत राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा सेना जैसे कई मोर्चो पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं.’

पूर्व एनएसए ने कहा कि हालांकि मौजूदा समय में अमेरिका उनका मुख्य विरोधी है लेकिन चीन मानता है कि उन्हें असली चुनौती भारत से मिलेगी.

भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर मार्शल (सेवानिवृत) अरुप राहा ने कहा कि अपने पड़ोसियों से मित्रवत व्यवहार करने पर चीन के खतरे से निपटने के लिए भारत को पड़ोसियों को सैन्य साजो-सामान बेचकर तथा संयुक्त सैन्य अभ्यास करके इन देशों से दोस्ती बढ़ानी चाहिए.

मिज़ोरम: केंद्र से बेहतर सुविधा चाहता है ब्रू शरणार्थी संगठन

आइजोल: त्रिपुरा में छह राहत शिविरों में रह रहे ब्रू शरणार्थियों के सर्वोच्च संगठन ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है और केंद्र से बेहतर समझौते की मांग की है.

संगठन के एक पदाधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. मिजोरम ब्रू डिस्पलेस्ड पीपुल्स फोरम (एमबीडीपीएफ) के महासचिव ब्रूनो मशा ने उत्तरी त्रिपुरा जिले के कंचनपुर उप संभाग में नैसिंगपारा राहत शिविर से ‘पीटीआई  भाषा’ को बताया कि उन्होंने शनिवार को क्लेक्टर शरदेंदु चौधरी के जरिए एक ज्ञापन भेजा.

1997 में मिजोरम से ब्रू आदिवासी अपने घरों से भाग आए थे और त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे हैं. ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले साल जुलाई से शरणार्थियों को आर्थिक सहायता नहीं मिली है. यहां वयस्कों को पांच रुपये प्रतिदिन और बच्चों को 2.50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Categories: नॉर्थ ईस्ट, राजनीति

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