भारत

‘सच्चा पत्रकार’ वो होता है जो सरकार के विकास कार्यों को कवर करे: एनआईए

कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़ की गिरफ़्तारी को जायज़ ठहराते हुए एनआईए ने अदालत में उन्हें पत्रकार मानने से इनकार किया है. कामरान को पिछले साल सितंबर में गिरफ़्तार किया गया था.

जम्मू कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़. (फोटो साभार: फेसबुक)

जम्मू कश्मीर के फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मानती है कि एक पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वह सरकारी विभागों के विकास कार्यों, स्कूल और अस्पताल के उद्घाटन या सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के बयान को कवरेज दे.

जम्मू कश्मीर के स्वतंत्र फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़ की गिरफ़्तारी के पक्ष में एनआईए ने अदालत में पेश अपने आरोप-पत्र में इस बात को आधार बनाकर यह दलील दी है.

24 वर्षीय फोटो पत्रकार कामरान यूसुफ़ को पिछले साल पांच सितंबर को एनआईए ने गिरफ़्तार किया था. उन पर कथित रूप से पत्थर फेंकने वाले लोगों के साथ मिलकर काम करने का आरोप है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में कामरान की गिरफ़्तारी को वाज़िब बताते हुए एनआईए ने कहा है कि सरकारी विभागों के विकास कार्यों, अस्पताल या स्कूल के उद्घाटन या सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के बयान को कवर न करना, ये कुछ वजहें हैं जो बताती हैं कि कामरान यूसुफ़ ‘वास्तविक पत्रकार’ नहीं हैं.

एनआईए का यह कथन उस आरोप-पत्र का हिस्सा है जिसे उसने 18 जनवरी को घाटी में आतंकवाद और पत्थरबाज़ी की घटनाओं से ताल्लुक़ रखने के आरोप में 12 लोगों के ख़िलाफ़ पेश किया है. इन्हीं 12 लोगों में से एक कामरान यूसुफ़ भी हैं.

ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तरुण सहरावत की अदालत में बीते गुरुवार को एनआईए द्वारा कामरान यूसुफ़ के ख़िलाफ़ उपलब्ध दस्तावेज़ों को दोबारा पेश किया गया था.

अदालत ने ज़मानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. आरोपी कामरान यूसुफ़ और जांच एजेंसी की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला 19 फरवरी के लिए सुरक्षित रख लिया.

आरोप पत्र में एनआईए ने एक पत्रकार की नैतिक ज़िम्मेदारी को इस तरह सूचीबद्ध करते हुए कहा है, ‘क्या यूसुफ़ पेशे से वास्तव में एक पत्रकार हैं? फिर एक पत्रकार की किसी भी एक नैतिक ज़िम्मेदारी को उन्हें पूरा करना था और जो घटनाएं और गतिविधियां (अच्छी और बुरी) उनके कार्य क्षेत्र में हो रही थीं, उन्होंने उन्हें कवरेज दिया होता.’

आरोप पत्र में एनआईए ने यह भी कहा है, ‘उन्होंने (कामरान) कभी किसी भी सरकारी विभाग या एजेंसी के विकास की किसी गतिविधि को, किसी पुल, सड़क, इमारत, स्कूल, अस्पताल के उद्घाटन, सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के बयान या भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा किसी सामाजिक या विकास की गतिविधि को कवर नहीं किया.’

आरोप पत्र में एनआईए ने कहा है, ‘घाटी में सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेस द्वारा लोगों के बीच सामाजिक कार्य जैसे रक्तदान शिविर, नि:शुल्क चिकित्सा परीक्षण, कौशल विकास कार्यक्रम या इफ़्तार पार्टी आयोजित किए जाते हैं. कामरान यूसुफ़ ने ऐसे किसी भी कार्यक्रम या ऐसी किसी गतिविधि का कोई वीडियो और फोटो लिया हो, उनके लैपटॉप या मोबाइल में ऐसा नहीं देखा गया. यह साफ़ दिखाता है कि उनका इरादा सिर्फ़ उन गतिविधियों को कवर करना था जो ‘राष्ट्रविरोधी’ हों और उनके वीडियो फुटेज से उन्हें पैसा कमाना था.’

एनआईए के अनुसार, यूसुफ़ एक पेशेवर नहीं थे क्योंकि उन्होंने किसी संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है.

एनआईए के अनुसार, कामरान यूसुफ़ के कैमरे में मौजूद वीडियो की जांच के बाद पाया गया कि वीडियो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को कवर करने के एक ख़ास इरादे के चलते बनाए गए हैं और फिर उन्हें लोकल मीडिया को प्रकाशित करने के लिए दे दिए जाते थे.

जमानत पर सुनवाई के दौरान यूसुफ़ की वकील वरिशा फ़रासत ने कोर्ट से कहा कि एनआईए द्वारा ‘वास्तविक पत्रकार’ की परिभाषा के अलावा यूसुफ़ ने एनआईए द्वारा सूचीबद्ध पत्रकारिता के सभी मापदंड पूरे किए हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास दिखाने के लिए ऐसे कई फोटो हैं जिससे कामरान उनकी (एनआईए) परिभाषा पर खरा उतरता है.’

वहीं, समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा के अनुसार वरिशा ने कहा, ‘मेरे मुवक्किल के ख़िलाफ़ आरोप पत्र में कुछ नहीं है. इसमें सिर्फ़ यह दावा किया गया है कि वह अन्य पत्रकारों से संपर्क में थे लेकिन मामले में अन्य आरोपियों के साथ किसी साज़िश में शामिल होना नज़र नहीं आता.’

समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा के अनुसार, जांच एजेंसी ने कहा कि कामरान के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं. एनआईए ने कामरान यूसुफ़ सहित 12 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किया है.

आरोप पत्र में लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफ़िज़ सईद और हिज़बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का नाम शीर्ष पर है. इस सूची में कामरान यूसुफ़ का नाम पत्थर फेंकने वाले के तौर पर दर्ज है. एनआईए के पीआरओ आलोक मित्तल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया था कि टेरर फंडिंग के एक मामले में कामरान का नाम आया था जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया. बाद में हमें पता चला कि वह फोटो पत्रकार के तौर पर भी काम करते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, कामरान यूसुफ़ को गिरफ़्तार इसलिए किया गया था क्योंकि वह हर प्रदर्शन या आतंकी एनकाउंटर के समय घटनास्थल पर सबसे पहले मौजूद होते थे और एनआईए जानना चाहती थी कि वो हर घटनास्थल पर क्यों मौजूद होते थे? प्रदर्शन की हर ख़बर को कवर करने में क्यों इतनी गंभीरता दिखाते थे? प्रदर्शनकारी उन्हें फोन करके सूचना क्यों देते थे?

कामरान के वकील ने ज़मानत के लिए यह दलील दी कि वह बतौर पत्रकार काम कर रहे थे और विभिन्न पथराव स्थलों पर उनकी मौजूदगी महज़ इसलिए थी कि वह इन घटनाओं को कवर कर रहे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Comments