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पर्यटन मंत्रालय को संसदीय समिति का सुझाव, विज्ञापन पर कम ख़र्च करें

संसदीय समिति ने मंत्रालय से कहा कि विज्ञापन की अपेक्षा आधारभूत ढांचे पर अधिक ख़र्च करें. ऐसा न हो कि विज्ञापन के ज़रिये ऊंची उम्मीदें जता दी जाएं और अनुभव वैसा न हो.

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पर्यटन मंत्रालय का एक विज्ञापन (फोटो साभार: coloribus.com)

नई दिल्ली: संसद की एक स्थायी समिति ने पर्यटन मंत्रालय को आधारभूत ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर अधिक व्यय करने की सलाह दी है. साथ ही मंत्रालय को विज्ञापन के जरिये पर्यटकों की आकांक्षाएं बढ़ाने तथा वास्तविकता में वह अनुभव नहीं होने के बारे में आगाह किया है.

मंगलवार को पर्यटन मंत्रालय की अनुदान मांगों के बारे में परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति मामलों की स्थायी समिति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है.

इसमें कहा गया कि विदेशी पर्यटकों के भारत आने के रुझान बढ़ाने एवं प्रचार के तहत आवंटित धन का उपयोग निष्ठा से किया जाना चाहिए ताकि अधिक विदेशी पर्यटक आकर्षित हो सकें.

इसमें कहा गया, ‘हमें आधारभूत ढांचे पर अधिक व्यय करना होगाऔर विज्ञापन पर कम. इस तरह का मामला नहीं होना चाहिए कि हमारे अभियान के जरिये ऊंची उम्मीदें जता दी जायें और उसके अनुसार अनुभव न हो.’

तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन की अध्यक्षता वाली इस समिति ने ध्यान दिलाया कि विदेशी संवर्धन एवं प्रचार जिसमें बाजार विकास सहायता शामिल है, के लिए 2018-19 के बजटीय अनुमान में 452.25 करोड़ रुपये आवंटित किये गये जबकि 2017-18 का संशोधित अनुमान 297.59 करोड़ रुपये था. 2016-17 में इस मद में वास्तविक अनुमान 194.44 करोड़ रुपये रहा.

समिति ने मंत्रालय से विदेशों में बने प्रमोशन ऑफिस और ओवरसीज प्रमोशन और पब्लिसिटी के अंतर्गत काम कर रहे अधिकारियों की आवश्यकता पर दोबारा गौर करने के लिए कहा है.

समिति द्वारा यह प्रस्ताव भी दिया गया है कि मंत्रालय  विभिन्न पर्यटन स्थलों  से जुड़ी परेशानियों और उससे जुड़ी नीतियों के लिए कुछ पेशेवर कर्मचारियों को नियुक्त करे.

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