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वित्त सचिव को दीपावली पर ‘तोहफ़े’ में मिले थे सोने के बिस्किट


विशेष रिपोर्ट: वित्त सचिव हसमुख अधिया का कहना है कि उन्होंने यह क़ीमती तोहफ़ा तोषाखाने भिजवा दिया था, लेकिन वे यह नहीं बता पाए कि उन्होंने इस बारे में जांच के आदेश क्यों नहीं दिए.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त सचिव हसमुख अधिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: रॉयटर्स/पीटीआई/फ्लिकर)

नई दिल्ली: एक आश्चर्यजनक खुलासे में केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अधिया ने इस बात की पुष्टि की है कि 2016 में दीपावली के समय उन्हें अनाम व्यक्ति द्वारा 20-20 ग्राम के दो सोने के बिस्किट भेजे गए थे. इस बात के करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इस व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

न ही वित्त सचिव न ही उनके विभाग के मंत्री अरुण जेटली ने इस व्यक्ति की पहचान और उद्देश्य को जानने के लिए किसी जांच का आदेश दिया, जिसने संभवतया देश के ताकतवर अधिकारियों में से एक को रिश्वत देकर प्रभावित करने की कोशिश की.

इस तोहफे की कीमत करीब दो लाख रुपये बताई गई है. अधिया उस समय राजस्व सचिव कार्यालय में मुख्य जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इस पद की महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि वे उन चंद व्यक्तियों में से एक थे, जिन्हें 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के बारे में जानकारी थी.

अधिया ने इस बात की पुष्टि की है कि यह सोना न्यू मोती बाग में उनके घर भेजा गया था. उनका दावा है कि जब यह तोहफा पहुंचा, तब वे घर पर नहीं थे और न ही उन्हें इसे भेजने वाले दरियादिल व्यक्ति के बारे में कुछ पता है. लेकिन देश के ताकतवर राजस्व सचिव को ‘रिश्वत देने और प्रभावित’ करने की इस कोशिश के बारे में सीबीआई जांच का आदेश देने के बजाय अधिया ने कहा कि उन्होंने ये सोने के बिस्किट सरकार के तोषाखाने भिजवा दिए.

तोषाखाना विदेश मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली ऐसी व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और मंत्रियों को मिले एक निश्चित कीमत से ज़्यादा के तोहफों को जमा करना होता है.

गौर करने वाली बात है कि सूत्रों के अनुसार यह तोहफा मिलने की पुष्टि करने के महज 24 घंटे पहले अधिया ने करोड़पति हीरा व्यवसायी नीरव मोदी से कोई बेशकीमती तोहफा मिलने और उसे तोषाखाने भेजने की बात से इनकार किया था. नीरव मोदी हीरा व्यवसायी हैं, जिन पर देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक से 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने का आरोप है और जो किसी अज्ञात जगह छिपे हुए हैं.

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द वायर  को उसी दिन भेजे गए एक लिखित जवाब में अधिया ने ‘नहीं’ लिखा और कहा, ‘मुझे आश्चर्य है कि किसी डिफाल्टर समूह द्वारा फैलाई जा रही ऐसी झूठी कहानियों पर आप कैसे रिपोर्ट कर सकते हैं?’

अपने सूत्रों से इस तोहफे के अधिया के घर पहुंचने की बात की दोबारा पुष्टि करने के बाद द वायर  ने 7 मार्च को अधिया को दो सवाल भेजे. पहला, क्या उनके कार्यालय द्वारा तोषाखाने में दीपावली के बाद 5 गोल्ड बार जमा करवाए गए थे और दूसरा, क्यों उनके कार्यालय द्वारा यह नहीं बताया कि यह तोहफा किसने भेजा है. साल 2016 में दीपावली 30 अक्टूबर को थी.

इन सवालों के जवाब ईमेल में भेजते हुए अधिया ने कहा कि वे दीपावली के समय कभी कोई महंगे तोहफे स्वीकार नहीं करते हैं.

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वित्त सचिव हसमुख अधिया द्वारा भेजा गया जवाब

उन्होंने लिखा, ‘4 नवंबर को मैंने कैबिनेट सचिव को इस बारे में सूचित करते हुए एक पत्र भेजा था.’

उनके अनुसार इस पत्र में उन्होंने लिखा था, ‘हाल ही में दीपावली के दौरान, मुझे कुछ इस तरह के उपहार मिले जो कीमती थे और जिन्हें नियमानुसार मैं स्वीकार नहीं कर सकता. क्योंकि यह मेरी ग़ैर-मौजूदगी में मेरे घर पहुंचे थे, मैं इन्हें अस्वीकार नहीं कर सका. अब यह पता करना कि मुझे यह किसने भेजा, मुश्किल है.

इसलिए मैं इन्हें सरकार के तोषाखाने में सरेंडर कर रहा हूं जहां इससे नीलामी या जैसा नियम हो, उस तरह निपटा जा सके. सरेंडर किए जा रहे उपहार है:

  1. एक नया आईफोन 7

  2. 2 एमएमटीसी मार्क सोने के बिस्किट (दोनों 20 ग्राम के)’

अधिया ने द वायर  को बताया कि ‘कैबिनेट सचिव के दिशा-निर्देशों के अनुसार’ इन उपहारों को विदेश मंत्रालय के तोषाखाने में भिजवा दिया गया था.

जहां अधिया ने इस बात से इनकार किया है कि यह सोना उन्हें हीरा व्यवसायी नीरव मोदी ने नहीं भेजा, वहीं जांच न होने के कारण इस भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

तोषाखाने में सोना जमा करने का कोई रिकॉर्ड नहीं

गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय में जमा करवाए गए तोहफों की एक पूरी ऑनलाइन रजिस्ट्री लिस्ट बनाकर रखी जाती है, लेकिन अक्टूबर 2016 से दिसंबर 2016 या इसकी अगली तिमाही में भी हसमुख अधिया द्वारा जमा करवाए गए किसी तोहफे की कोई एंट्री नहीं है.

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति को मिले हुए उपहारों के लिए एक अलग तोषाखाना है. कहीं राजस्व सचिव के कार्यालय द्वारा भूलवश तोहफा विदेश मंत्रालय की बजाय इस तोषाखाने में न भिजवा दिया गया हो, यह सोचकर द वायर  द्वारा राष्ट्रपति भवन से भी संपर्क किया गया.

तब राष्ट्रपति के मीडिया सलाहकार अशोक मलिक ने बताया कि राष्ट्रपति भवन के तोषाखाने में केवल राष्ट्रपति को मिले उपहार हैं और इन तोहफों को राष्ट्रपति भवन के परिसर में बने म्यूजियम में रखा गया है.

जांच का आदेश न देने पर सवाल

जब इस संवाददाता ने अधिया से फोन पर हुई बातचीत में जांच के आदेश न देने के बारे में पूछा, तब उन्होंने जवाब दिया, ‘महत्वपूर्ण यह है कि मैंने यह तोहफा स्वीकार नहीं किया. दीपावली के समय ये बातें आम हैं और शिष्टाचारवश हम मिठाई जैसी चीजों के लिए मना नहीं कर सकते. लेकिन फिर कितने अधिकारी होंगे जिन्होंने मेरी तरह तोहफे को तोषाखाना में भिजवाया होगा?’

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पूर्व एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी रहे ईएएस शर्मा ने द वायर  से बात करते हुए कहा, ‘यह उपहार क्यों भेजा गया, कम से कम अधिया इस बारे जांच के आदेश दे सकते थे और भेजने वाले को सरकार की नाराजगी जता सकते थे.’ उन्होंने आगे कहा कि सोने के बिस्किट कोई आम तोहफा नहीं हैं और स्पष्ट है कि ये एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन अधिकारी को रिश्वत देने के उद्देश्य से भेजे गए थे.

उन्होंने कहा, ‘एक निजी कंपनी के प्रमोटर का एक सरकारी अफसर को सोने के बिस्किट तोहफे में देना, वो भी वह अधिकारी जो टैक्स से जुड़े मामले देखता है, एक गंभीर मामला है. जहां ऐसे तोहफों को सरकार को सरेंडर करना जरूरी है, साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे व्यक्तियों और कंपनियों को एक कड़ा संदेश दिया जाए कि सरकार आगे ऐसी कोई हरकत बर्दाश्त नहीं करेगी. जांच का आदेश न देने से न केवल कंपनी प्रमोटर को माफ कर दिया गया बल्कि यह संकेत भी गया कि कोई नागरिक ऐसा कोई घटिया काम करके आराम से निकल सकता है.’

शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ नौकरशाह पीवीआरके प्रसाद के साथ हुआ एक अनुभव भी साझा किया. प्रसाद को भी दीपावली के दौरान एक पैकेट मिला था जब वे घर पर मौजूद नहीं थे.

शर्मा ने बताया, ‘ये किसी ठेकेदार ने भेजा था. उनके बच्चों ने यह समझकर कि अंदर मिठाई होगी इसे खोला और उसके अंदर 2-3 लाख रुपये नकद थे. प्रसाद वो पैकेट लेकर सीधे एनटी रामा राव के पास भागे, जो उस समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. इसके बाद जांच आदेश जारी हुए और उस ठेकेदार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई.’

शर्मा का कहना है कि अगर अधिया को यह तोहफा भेजने वाले के बारे में जांच नहीं हुई तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि यह कोई ऐसा है जो सरकार के ऊपरी महकमे में पहुंच रखता है.

इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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