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6 महीने में सीबीआई ने किया व्यापमं ब्रांच के 70 फीसदी अधिकारियों का तबादला

घोटाले के 50 से ज़्यादा मामले लंबित होने के बावजूद सीबीआई ने 1 दिन में विशेष व्यापमं शाखा के 20 अधिकारियों का तबादला किया है.

CBI VYAPAM

फोटो: ncsexam.in/विकिपीडिया

भोपाल: मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापमं घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष व्यापमं शाखा से एक दिन में 20 अधिकारियों का तबादला किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इन सभी अधिकारियों को दिल्ली में सीबीआई की एंटी-करप्शन शाखा में भेजा गया है. घोटाले से जुड़े 50 से ज़्यादा मामले अब भी लंबित हैं.

मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा विभिन्न विभागों में हुई नियुक्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में धांधली के आरोप मई 2012 में सामने आये थे. तब इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स ने शुरू की थी.

2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को व्यापमं से जुड़े सभी मामलों की जांच सौंपी गई थी, जिसके लिए सीबीआई डायरेक्टर की अगुवाई में 40 अफसरों की एक टीम गठित हुई थी.

इसके बाद 2016 में सीबीआई ने एक ‘विशेष व्यापमं स्कैम ब्रांच’ का गठन किया था, जिसमें करीब 100 अधिकारियों को शामिल किया गया था. इसमें डीआईजी स्तर से लेकर एएसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारी शामिल थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार हाल ही में हुए इन 20 तबादलों के बाद बीते 6 महीनों में इस टीम का लगभग 70 फीसदी स्टाफ कम हो चुका है. इन तबादलों की खबर सामने आने के बाद विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने इस अखबार से बात करते हुए कहा, ‘कांग्रेस ने बहुत उम्मीदों के साथ इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन इसने इस घोटाले के कर्ता-धर्ताओं को ही क्लीन चिट दी है. मैं सोचता हूं कि उन्हें यह ब्रांच बंद कर देनी चाहिए.’

हालांकि केंद्रीय एजेंसी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लंबित 50 मामलों में से 40 एडवांस्ड स्टेज पर हैं और अधिकारियों का तबादला ‘रूटीन’ के तहत हुआ है.

एक सीबीआई अफसर ने इस अखबार को बताया, ‘100 से ज्यादा मामलों में, आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाख़िल कर दी गई है और सुनवाई चल रही है. रूटीन के चलते कुछ अधिकारियों का तबादला होगा. ब्रांच बंद करने की कोई वजह नहीं है.’

इस खबर के मुताबिक सूत्रों के अनुसार जब व्यापमं स्पेशल ब्रांच की शुरुआत हुई थी, तब बहुत कम अधिकारियों ने इससे जुड़ने में दिलचस्पी दिखाई थी. इसके बाद सीबीआई ने खुद विभिन्न शाखाओं से अधिकारियों को चुना था.

सूत्रों ने बताया कि कुछ अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस मामले की जड़ तक पहुंचने में दो दशक का समय लगेगा.

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