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फ़र्ज़ी जन्मतिथि को लेकर बर्खास्त नेपाल के प्रधान न्यायाधीश पाराजुली ने दिया इस्तीफ़ा

नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र कांतिपुर डेली ने सिलसिलेवार आलेखों के ज़रिये कहा था कि पाराजुली ने विभिन्न आधिकारिक दस्तावेज़ों पर जन्म की पांच अलग-अलग तारीख़ें दी हैं.

नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश गोपाल पाराजुली. (फोटो साभार: द हिमालय टाइम्स)

नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश गोपाल पाराजुली. (फोटो साभार: द हिमालय टाइम्स)

काठमांडू: नेपाल में विवादों में रहे प्रधान न्यायाधीश गोपाल प्रसाद पाराजुली ने अपने पद से गुरुवार को इस्तीफा दे दिया. दरअसल, अपनी जन्मतिथि में विसंगतियों और सेवानिवृत्ति की उम्र पार करने के बाद भी पद पर उनके बने रहने को लेकर एक दिन पहले ही न्यायिक परिषद ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था.

विद्या भंडारी को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाने के कुछ ही मिनट पहले यह फैसला आया. विद्या भंडारी बीते बुधवार को दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुनी गईं.

गुरुवार को पाराजुली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिले और अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया.

न्यायिक परिषद ने पाराजुली को बुधवार को उनके पद से हटाते हुए कहा था कि दस्तावेज़ों की छानबीन से पता चलता है कि उन्होंने सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 साल, सात महीने पहले ही पांच अगस्त 2017 को पूरी कर ली थी.

यह नेपाल में सेवानिवृत्ति की आधिकारिक उम्र सीमा है.

न्यायिक परिषद ने बर्खास्तगी पत्र में इस बात का ज़िक्र किया है कि पाराजुली ने अपनी नागरिकता और अकादमिक प्रमाणपत्रों में अलग-अलग जन्म तिथियों का ज़िक्र किया है.

परिषद सचिव निराउला द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 14 मार्च 2018 के सचिव स्तर के एक फैसले के मुताबिक हम यह सूचित करते हैं कि माननीय गोपाल प्रसाद पाराजुली प्रधान न्यायाधीश के पद नहीं रहेंगे क्योंकि उन्होंने पांच अगस्त 2017 को 65 साल की उम्र सीमा पार कर ली जो सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा है.

बहरहाल, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश दीपक राज जोशी ने कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश के तौर पर गुरुवार को पदभार ग्रहण कर लिया.

गौरतलब है कि परिषद का फैसला पाराजुली के जन्म की तारीख को लेकर विवाद और नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र कांतिपुर डेली पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाने संबंधी उनके क़दम की व्यापक निंदा किए जाने के मद्देनज़र आया है.

दरअसल, अख़बार ने सिलसिलेवार आलेखों के ज़रिये कहा था कि पाराजुली ने विभिन्न आधिकारिक दस्तावेज़ों पर जन्म की पांच अलग-अलग तारीख़ें दी हैं.

जब नौ न्यायाधीशों ने ख़ुद को दी गई पीठों की ज़िम्मेदारियों का बहिष्कार किया था, उसके बाद पाराजुली इस्तीफ़ा देने या न्यायिक प्रक्रिया से दूर रहने के दबाव में थे.

वहीं, भंडारी के शपथ ग्रहण की वैधता पर भी सवाल उठ रहा है क्योंकि परिषद ने पाराजुली द्वारा भंडारी को शपथ ग्रहण कराने से कुछ ही मिनट पहले पाराजुली को बर्खास्त करने का पत्र जारी किया था.

बहरहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भंडारी को फिर से शपथ ग्रहण करना होगा या नहीं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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