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सांप्रदायिक हिंसा के बाद श्रीलंका में लगाया गया आपातकाल हटा

बीते छह मार्च को कैंडी और अम्पारा जिलों में हुए बौधों और मुस्लिमों के बीच हुई हिंसा के बाद 10 दिनों के लिए श्रीलंका में आपातकाल घोषित कर दिया था.

श्रीलंका में हुए सांप्रदायिक हिंसा के बाद जलाया गया घर. (फोटो: रॉयटर्स)

श्रीलंका में हुए सांप्रदायिक हिंसा के बाद जलाया गया घर. (फोटो: रॉयटर्स)

कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सीरीसेना ने देश में छह मार्च से लगे अपातकाल को समाप्त कर दिया है.

गौरतलब है कि बहुसंख्यक बौद्धों और अल्पसंख्यक मुसलमानों के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी.

गृह युद्ध समाप्त होने के बाद देश में ऐसा पहली बार हुआ था.

भारत और जापान के आधिकारिक दौरे से शनिवार रात लौटे राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने देश में हालात सामान्य होने के बाद आपातकाल समाप्त करने की घोषणा की.

उन्होंने रविवार को ट्वीट किया है, ‘लोगों की सुरक्षा के हालात का जायजा लेने के बाद, मैंने शनिवार आधी रात से आपातकाल हटाने का निर्देश दिया.’

कैंडी और अम्पारा जिलों में मुसलमान विरोधी हिंसा फैलने, इसमें तीन लोगों के मारे जाने और एक मस्जिद सहित मुसलमानों की सैकड़ों संपत्तियों को नुकसान पहुंचाये जाने के बाद सरकार ने छह मार्च को आपातकाल की घोषणा की थी.

इस दौरान सरकार ने फेसबुक, वॉट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था.

बीबीसी की खबर के अनुसार, सांप्रदायिक हिंसा में दो लोगों की मौत हुई थी साथी ही 450 मुसलमानों का घर भी जला दिया गया था. 60 वाहनों को भी अलग के हवाले कर दिया गया था.

बौद्ध धर्म के मानने वाले बाहुल्य देश श्रीलंका में 2012 से यह विवाद चल रहा है. बौद्ध धर्म के कट्टरवादी संगठन ने आरोप लगाया है कि उनके इलाके में जबरन लोगों का धर्मान्तरण करा मुसलमान बनाया जा रहा है. उसके अलावा बौद्ध धर्म की संस्कृति को भी ख़त्म करने का प्रयास किया जा रहा है.

हिंसा के चलते 300 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जिसमें बौद्ध कट्टरवादी संगठन के नेता भी शामिल हैं.

पिछले सात वर्षों में यह पहली घटना थी कि देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ) 

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