नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: मणिपुर के सरकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, 7वें वेतन आयोग की मांग

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिज़ोरम के प्रमुख समाचार.

Govt Office PTI

प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

इंफाल: मणिपुर की एन बीरेन सिंह सरकार के 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न करने के चलते राज्य के सरकारी कर्मचारी 22 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.

ज्ञात हो कि बीते साल विधानसभा चुनाव से पहले जारी भाजपा के ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ में कहा गया था कि अगर वे राज्य में सत्ता में आते हैं तो ये 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करेंगे.

अब सरकार को उसके इस वादे की याद दिलाते हुए आल मणिपुर ट्रेड यूनियन काउंसिल (एएमटीयूसी) और आल मणिपुर गवर्नमेंट एम्प्लाइज ऑर्गेनाईजेशन की एक जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी (जेएसी) ने 21 मार्च को मीडिया से बात करते हुए कहा कि जहां बाकी भाजपा नीत राज्यों में ये सिफारिशें लागू करने के लिएआधिकारिक घोषणा की जा चुकी है, वहीं मणिपुर सरकार केवल मौखिक आश्वासन दे रही है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जेएसी के महासचिव लैतोंजाम बिकेन ने कहा कि इस कमेटी ने अपनी 22 मांगों का एक चार्टर राज्य सरकार को सौंपा है, साथ ही इस मुद्दे को लेकर राज्य के वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और सरकार को रिपोर्ट बनाकर देने वाली फिटमेंट समिति के अलावा वे चार बार मुख्यमंत्री से भी मिले हैं.

बताया जा रहा है कि राज्य के मुख्य सचिव ने इन संगठनों को कहा है कि फिटमेंट कमेटी द्वारा इन सिफारिशों के अनुरूप जरूरी वेतन की गणना करके सरकार को सौंप चुकी है. अब यह सरकार के हाथ में है कि वे कब इस पर अमल में लाएगी.

इस बारे में इन संगठनों ने राज्य सरकार को इस विषय में घोषणा करने के लिए 21 मार्च की समय सीमा दी थी, जिसके बाद उन्होंने 22 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी.

बिकेन ने रिपोर्टरों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार उन्हें आश्वासन देते रहे कि वे जब प्रधानमंत्री मोदी 16 मार्च को मणिपुर आएंगे तो पर इस बारे में दबाव डालेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के ऐसे रवैये को देखकर ही कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की सोची.

वहीं इसी बीच विधानसभा में बोलते हुए राज्य के वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री वाय जॉयकुमार ने कहा, ‘अभी इन सिफारिशों को लागू करने की कोई तात्कालिक योजना नहीं है क्योंकि वेतन वृद्धि से (राज्य पर) 1,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ेगा.’

वहीं आईएएनएस के मुताबिक मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों को चेतावनी देने के बावजूद मणिपुर में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रही जिस वजह से सरकारी काम-काज ठप रहा.

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार रात को कर्मचारियों को सोमवार तक काम पर लौट आने का आग्रह किया था और कहा था कि ऐसा न करने पर ‘सरकार को उनके कार्यो के लिए दूसरे व्यक्तियों की तलाश करनी पड़ेगी.’

सरकार की स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा, ‘सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद राज्य के 85,000 कर्मचारियों व 45,000 पेंशनधारियों को भुगतान करने से राज्य सरकार पर 1400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

मणिपुर ज्यादातर केंद्र सरकार की उदारता पर निर्भर है. उन्होंने कर्मचारियों को काम पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा, ’31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले राशि को विभिन्न विकास कार्यो के लिए अनुमोदित करना है.’

असम: स्थायी कुलपति की नियुक्ति और स्वायत्तता के लिए असम महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं का प्रदर्शन जारी

Assam Womens University protest Twitter

फोटो साभार: twitter/@SUNDARmyth

गुवाहाटी: असम महिला विश्वविद्यालय (एडब्ल्यूयू) की छात्राएं स्थायी कुलपति की नियुक्ति करने और इसे पूरी तरह स्वायत्त विश्वविद्यालय बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं. एडब्ल्यूयू पूर्वोत्तर में अपनी तरह का पहला संस्थान है.

आंदोलन की शुरुआत पांच मार्च को हुई थी और इसके समर्थन में ऊपरी असम में प्रदर्शन हो रहे हैं.

सरकार अधिनियम को वापस लेकर इसका दर्जा कमतर करना चाहती है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अधिनियम को 2013 में राज्य विधानसभा ने पारित किया था. जानकारी के मुताबिक कैबिनेट की अगली बैठक में इस विषय पर चर्चा हो सकती है.

वहीं असम के उच्च शिक्षा प्रधान सचिव अजय तिवारी ने कहा, ‘इस मामले में सरकार ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है. चूंकि फिलहाल इस पर परिचर्चा चल रही है तो सरकार निश्चित तौर पर इस पर विचार करेगी.’

तिवारी ने कहा, ‘संभवत: कैबिनेट की अगली बैठक में यह मामला उठेगा. अगर कैबिनेट ने विश्वविद्यालय को खत्म करने का निर्णय किया तो फिर इसे विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी.’

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने छात्राओं के इस आंदोलन को लेकर राज्य की भाजपा सरकार से सवाल किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, ‘असम महिला विश्वविद्यालय महिला के सशक्तिकरण के लिए मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट था. ये न केवल असम का बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है. इस बारे में असम की सरकार का इस विश्वविद्यालय को लेकर हालिया फैसला उनके ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के खोखले दावों का खुलासा करता है.’

गौरतलब है कि असम महिला विश्वविद्यालय की छात्राएं विश्वविद्यालय को तकनीकी संस्थान में बदलने के विरोध को लेकर 19 मार्च से हड़ताल पर हैं. छात्राएं सरकार से ये मांग भी कर रही है कि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को स्थायी तौर नियुक्त किया जाए.

इसके अलावा यूनिवर्सिटी के पूर्ण विकास के लिए बुनियादी ढांचे और स्थायी फैकल्टी स्टाफ की नियुक्ति की जाए. ये छात्राएं जोरहाट में डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस के सामने छात्राओं ने बैनर और पोस्टर्स के साथ सड़क पर बैठकर भूख हड़तालकर रही हैं.

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में अपने पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए उन्हें बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

उनका आरोप है कि ये यूनिवर्सिटी सिर्फ नाम की है, न तो यहां पर कोर्इ बुनियादी ढांचा है और न ही संस्थान को चलाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था है.

छात्राओं ने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं पूरा किया तो वे आंदोलन शुरू करेंगी. इस विरोध प्रदर्शन में असम जिले के 176 कॉलेजों की स्टूडेंट्स शामिल हैं. छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है.

पांचवी क्लास की बच्ची के साथ बलात्कार कर आग लगाई, मौत

नगांव (असम) : नगांव जिले के धनियाभेती लालगंज गांव में एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार कर उसे आग के हवाले कर दिया. पुलिस ने बताया कि जाकिर हुसैन नाम के एक व्यक्ति और चार अन्य लोगों ने पांचवीं कक्षा की एक लड़की के साथ उस समय बलात्कार किया जब वह शुकवार शाम अकेली घर लौट रही थी.

उन्होंने बताया कि अपराध को अंजाम देने के बाद उन्होंने बच्ची पर मिट्टी का तेल डाल उसे आग लगा दी. शनिवार सुबह लड़की की बीपी सिविल अस्पताल में मौत हो गई, जहां उसे गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था.

पुलिस जाकिर और उसके साथियों की तलाश कर रही है. गुस्साए स्थानीयों ने जाकिर हुसैन के घर पर हमला किया. वहीं बच्ची के स्कूल के छात्र और अखिल असम छात्र संघ (आसू) आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं.

स्थानीय मीडिया की खबर के अनुसार पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया है. जाकिर घटना के बाद से गायब है. बलात्कार के आरोपियों में से दो नाबालिग हैं.

विकास कार्यों को जारी रखने के लिए पूर्वोत्तर से ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतने की आवश्यकता है: अमित शाह

Amit shah Assam Twitter

गुवाहाटी में बूथ अध्यक्ष सम्मलेन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह (फोटो साभार: ट्विटर/अमित शाह)

गुवाहाटी: अगले आम चुनावों के लिये कमर कसते हुए शनिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में पूर्वोत्तर से 25 संसदीय क्षेत्रों में से 21 सीटों पर जीत का लक्ष्य तय किया है.

भाजपा के बूथ इकाई प्रमुखों की एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कार्य करने के लिये कहा.

शाह ने कहा, ‘वर्ष 2019 के चुनाव के लिये मैं लक्ष्य तय करना चाहता हूं. पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से हम 21 से अधिक सीटों पर जीतना चाहते हैं.’

शाह ने कहा, ‘मिज़ोरम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) घटकों का शासन है. इसलिए आप सभी को इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है.’

वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने क्षेत्र से आठ सीटें जीती थीं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूती प्रदान करने के लिये भाजपा को पूर्वोत्तर से अधिक से अधिक सीटें जीतने की आवश्यकता है ताकि क्षेत्र में विकास के कार्यों को जारी रखा जाये.

 

त्रिपुरा: रेबती मोहन दास बने विधानसभा के अध्यक्ष

अगरतला: भाजपा विधायक रेबती मोहन दास को शुक्रवारको सर्वसम्मति से त्रिपुरा विधानसभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया.

अस्थायी अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती ने सदन में घोषणा की कि उन्हें इस पद के लिये सिर्फ रेबती मोहन दास का नामांकन मिला है और उन्हें निर्वाचित घोषित किया जाता है. हालांकि उप विधानसभाअध्यक्ष का निर्वाचन अभी बाकी है.

दास ने घोषणा की कि माणिक सरकार को विपक्ष का नेता चुना गया है जबकि पूर्व मंत्री बादल चौधरी सदन में विपक्ष के उप नेता होंगे. तपन चक्रवर्ती विपक्षी सदस्यों के सचेतक होंगे.

उन्होंने यह भी घोषणा की कि कल्याणी रॉय को सत्ताधारी का मुख्य सचेतक चुना गया है.

मिज़ोरम: राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत वीआईपी ने 69 बार किया हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल

आइजोल: मिज़ोरम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी ने 2013 से 69 बार हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ लिया. राज्य विधानसभा में शुक्रवार को यह जानकारी दी गयी.

मिजो नेशनल फ्रंट( एमएनएफ) के डॉक्टर के. बैछुआ के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ललथनहवला ने बताया कि राज्यपाल ने 10 बार सरकारी पवन हंस हेलीकॉप्टर की सेवा ली जबकि मुख्यमंत्री ने 53 बार और अन्य वीआईपी ने छह बार सेवा ली.

विपक्षी विधायकों ने जब हेलीकॉप्टर की सेवा लेने पर आने वाले खर्च के बारे में सवाल किया तब मुख्यमंत्री जवाब टाल गये.

उन्होंने कहा कि पवन हंस हेलीकॉप्टर के लिए एक घंटे का 70,000 रुपये लेती थी, जिसे जनवरी से बढ़ाक र80,000 रुपये कर दिया गया है.

मिज़ोरम सरकार ने कुछ समय पहले केंद्र से पत्र लिख कर आइजोल और इंफाल के बीच और अधिक विमान सेवा शुरू करने की मांग की थी. इस समय दोनों राजधानियों के बीच सप्ताह में एयर इंडिया की एक विमान उड़ान भरती है.

उन्होंने कहा, ‘मणिपुर में कई लोग मिजो हैं और हम दोनों राज्यों के बीच हवाई यातायात संपर्क बेहतर करना चाहते हैं.’

असम: भाजपा विधायक ने पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई

तरुण गोगोई (फोटो: पीटीआई)

तरुण गोगोई (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम के भाजपा विधायक पीजूष हजारिका ने असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा पर वित्तीय और आपराधिक मामलों में संलिप्त रहने के आरोप को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के खिलाफ बीते मंगलवार एक पुलिस शिकायत दर्ज कराई.

गोगोई ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि उनके कैबिनेट में मंत्री रहने के दौरान शर्मा कई वित्तीय और आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे थे. सहायक पुलिस आयुक्त (दिसपुर) सुजीत सैकिया ने शिकायत दर्ज किए जाने की पुष्टि की.

हालांकि, उन्होंने यहां समाचार एजेंसी भाषा को बताया कि अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. प्राथमिकी दर्ज करने से पहले इसे (शिकायत) जांच के लिए रखा गया है.

शिकायत दर्ज होने के बाद हजारिका ने संवाददाताओं से कहा, ‘गोगोई ने कहा है कि शर्मा ने अनियमितता बरती, जो 15 साल कांग्रेस सरकार में थे. अब जाकर यदि ऐसा आरोप लगाया गया है तो इसका मतलब है कि गोगोई भी दोषी हैं और उन्होंने अपने संवैधानिक दायित्वों का निवर्हन नहीं किया.’

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने कई मौकों पर भाजपा विधायक को बचाया था.

गोगोई ने यह आरोप भी लगाया था कि शर्मा टाडा मामले से बचने के लिए आसू से कांग्रेस में शामिल हुए थे और बाद में सारदा पोंजी मामला और लुईस बर्जर रिश्वत मामले से मुक्त होने के लिए भाजपा में शामिल हो गए.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर यह भी दावा किया था कि उन्होंने 1,000 करोड़ रूपये के नॉर्थ कछार हिल घोटाला में शर्मा की संलिप्तता को नजरअंदाज किया.

मेघालय: आरटीआई कार्यकर्ता का शव मिला, हत्या की आशंका

शिलांग: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक पुल के निकट एक आरटीआई कार्यकर्ता का शव मिला है. पूर्वी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक एआर मावठोह ने बताया कि मरने वाले की पहचान पी मावजाव के रूप में की गयी है.

शव के पास से धातु का एक रिंच भी मिला है. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मावजाव के सिर पर प्रहार किया गया, जिसकी वजह से  उनकी मौत हुई .

पुलिस अधिकारी ने बताया कि हत्या के कारण का पता नहीं चल पाया है. मावजाव जयंतिया यूथ फ्रंट नामक एक सामाजिक संगठन चला रहे थे. वे एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे जो सरकारी पैसे के दुरूपयोग के ख़िलाफ़ काम करते थे.

त्रिपुरा: उपमुख्यमंत्री बोले, भाजपा-आईपीएफटी की सरकार बड़े वित्तीय बोझ का सामना कर रही है

Agartala: Senior BJP leader and Union minister Nitin Gadkari congratulates Jishnu Devvarman after he was selected as Tripura's Deputy Chief Minister in a party meeting, in Agartala on Tuesday. Also seen is Tripura BJP President and Chief Minister-designate Biplab Deb. PTI Photo (PTI3_6_2018_000058B)

भाजपा नेताओं के साथ त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री जिष्णु देबबर्मन (फोटो: पीटीआई)

अगरतला: त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री जिष्णु देबबर्मन ने कहा है कि भाजपा-आईपीएफटी की सरकार पिछली सरकार के उपयुक्त योजना बनाने में ‘विफल’ रहने के कारण ‘काफी वित्तीय बोझ’ का सामना कर रही है.

देवबर्मन ने कहा कि राज्य सरकार 11,355.53 करोड़ रुपये के वित्तीय घाटा का सामना कर रही है.

देवबर्मन ने संवाददाताओं से 18 मार्च को कहा, ‘16  मार्च को एक बैठक में राज्य की आर्थिक स्थिति की समीक्षा की गई और पाया गया कि नई सरकार पर काफी वित्तीय बोझ है. नई सरकार 11,355.53 करोड़ रुपये के वित्तीय घाटे का सामना कर रही है. पिछली सरकार के उपयुक्त योजना बनाने में विफल रहने के कारण ऐसा हुआ.’

देवबर्मन राज्य के वित्त मंत्री भी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्ष में त्रिपुरा का कुल खर्च इसके बजट से ज्यादा है, क्योंकि पिछली सरकार संतुलन नहीं बना सकी.

सीमा पर शांति बनाए रखने पर असम-मिज़ोरम सहमत

शुक्रवार 22 दिसंबर को गुवाहाटी में मीडिया को संबोधित करते केंद्रीय गृह सचिन राजीव गाबा (फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय गृह सचिन राजीव गाबा (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: असम और मिज़ोरम सरकारों ने मंगलवार दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में यथास्थिति बनाए रखने और सीमा पर शांति सुनिश्चित करने का फैसला किया.

गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी. करीब एक पखवाड़े पहले एक विवाद के बाद असम-मिज़ोरम सीमा पर स्थित बैराबी में हिंसा के बीच यह बैठक बुलाई गई.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि दोनों राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य सचिवों ने किया और उन्होंने शांति कायम रखने तथा मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाने की प्रतिबद्धता दोहराई.

अधिकारी ने कहा कि बैठक में क्षेत्र में यथास्थिति कायम रखने का फैसला हुआ. मौके पर लोगों के जमावड़े को अनुमति नहीं दी जाएगी और दोनों राज्य सरकारें अपने अपने क्षेत्रों में शांति कायम रखने के लिए सभी उपाय करेंगी.

बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर) और असम तथ मिज़ोरम सरकारों के प्रधान सचिवों वाली टीम एक सप्ताह में क्षेत्र का दौरा करेगी.

टीम की भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा मदद की जाएगी और यह केंद्रीय गृह सचिव को अपने निष्कर्ष सौंपेगी. अधिकारी ने कहा कि इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा असम तथा मिज़ोरम के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई जाएगी.

असम-मिज़ोरम सीमा विवाद को लेकर बैठक ऐसे समय बुलाई गई जब मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ललथनहवला ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात करके इस मुद्दे में हस्तक्षेप की मांग की थी.

असम-मिज़ोरम सीमा पर स्थिति करीब एक पखवाड़े पहले हिंसक हो गई थी जब पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया था. इस घटना में एक पत्रकार सहित अन्य घायल हुए थे.

मिज़ोरम की सीमा से सटे असम के हैलाकांडी जिले के प्रशासन ने सात मार्च को दूसरी तरफ से अतिक्रमण के प्रयासों की आशंका पर कुछ क्षेत्रों में सीआरपीएफ की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी.

असम: पॅाबितोरा वन्यजीव अभयारण्य है दुनिया में गैंडों की सबसे घनी आबादी

A one-horned rhino named Baghekhaity stands next to its 10-day-old calf at a zoo in Guwahati, in the northeastern Indian state of Assam, September 10, 2013. The calf was born on September 1 under the conservation breeding programme for one-horned rhinos in the state, local media reported. REUTERS/Utpal Baruah (INDIA - Tags: ANIMALS) - RTX13FCW

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

मोरीगांव: राज्य सरकार के वन विभाग की तरफ से पॉबितोरा वन्यजीव अभयारण्य में कराई गई वन्यजीवों की गणना के दौरान कुल 102 गैंडे पाये गये.

वरिष्ठ अधिकारी ने बीते रविवार को बताया कि अभयारण्य में एक सींग वाले गैंडों की गिनती करीब छह साल बाद की गयी है, जहां दलदली भूमि वाले बड़े क्षेत्र हैं.

गुवाहाटी वन्यजीव संभाग के वन अधिकारी( डीएफओ) पी बरुआ ने पत्रकारों को बताया कि 48 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैले पॅाबितोरा वन्यजीव अभयारण्य में कुल 102  गैंडे पाये गये हैं, ‘जो दुनिया में गैंडों की सबसे घनी आबादी है.’

डीएफओ ने बताया कि पिछले छह सालों के दौरान शिकारियों ने छह गैंडों की हत्या की है, जबकि अन्य 20 गैंडों की प्राकृतिक मौत हुई है.

बरुआ ने बताया कि साल 2017 की बाढ़ में अभयारण्य बुरी तरह प्रभावित हुआ था, लेकिन इसकी मरम्मत के बाद यहां आने वाले घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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