दुनिया

अडाणी की कोयला परियोजना का पूर्व आॅस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों ने किया विरोध

पूर्व क्रिकेटर इयान व ग्रेग चैपल सहित ऑस्ट्रेलिया की अनेक हस्तियों ने पर्यावरण का हवाला देकर अडाणी समूह से अपील की है कि वह क्वींसलैंड में अपनी कोयला खनन परियोजना को बंद कर दें.

Gautam Adani

अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी. (फोटो: रॉयटर्स)

ऑस्ट्रेलिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने अहमदाबाद में अडाणी समूह के अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें खुला पत्र सौंपा है. इसमें अडाणी समूह से कारमाइकल कोयला खान परियोजना को विभिन्न पर्यावरण संबंधी चिंताओं की वजह से छोड़ने की मांग की गई है.

पत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर लोगों के विरोध, खननकर्मियों के स्वास्थ्य को जोखिम, जलवायु परिवर्तन तथा ग्रेट बैरियर रीफ पर संभावित असर जैसे कारणों का हवाला देते हुए कंपनी से अपील की है कि वह इस परियोजना पर काम नहीं करे.

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा तबका इस परियोजना का विरोध कर रहा है. कोयला खनन परियोजना का विरोध करने वालों में पूर्व क्रिकेटर इयान और ग्रेग चैपल भी शामिल हैं. उनका कहना है कि यह परियोजना पर्यावरण विरोधी है. चैपल बंधुओं ने इस परियोजना के कारण ऑस्ट्रेलिया में भारत की बुरी छवि निर्मित होने की भी बात कही है.

चैपल ने कहा है कि इस परियोजना को बंद करने में ही भलाई है, क्योंकि इससे ग्लोबल वार्मिंग तो बढ़ेगी और पर्यावरण पर बुरा असर होगा साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध में भी खटास आ जाएगी. चैपल ने मीडिया को यह भी कहा है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट की वजह से संबंध ज्यादा मजबूत है और अगर अडाणी ग्रुप ने खनन बंद नहीं किया तो असर क्रिकेट पर भी होगा.

coalmining-kimG--621x414@LiveMint

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

वैसे इस कोयला परियोजना को ऑस्ट्रेलिया सरकार और वहां के न्यायालय से मंजूरी मिली हुई है. अडाणी ग्रुप की यह कोयला खनन परियोजना मशहूर ‘द ग्रेट बैरियर रीफ’ के नज़दीक है. यह ऑस्ट्रेलिया का बेहद ख़ूबसूरत स्थान है, जहां 600 से अधिक कोरल पाए जाते हैं. यहां रंग बिरंगी मछली, शार्क, डॉल्फिन और स्टारफिश पाए जाते हैं. इस प्रोजेक्ट की वजह से इन सब जीवों पर बुरा असर पड़ेगा.

अडाणी ग्रुप द्वारा यहां 60 वर्षों तक खनन चलेगा जिससे प्रति वर्ष 6 करोड़ टन कोयला उत्पाद किया जाएगा. कोयला लादने वाले जहाज़ ‘द ग्रेट बैरियर रीफ’ से हो कर गुजरेंगे जिसके कारण भारी संख्या में समुद्री जीवों पर बुरा असर पड़ेगा.