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क्यों बिहार में आईएएस अधिकारियों ने ​नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है?

बिहार कर्मचारी चयन आयोग से जुड़े पेपर लीक मामले में आयोग के अध्यक्ष रहे सुधीर कुमार की गिरफ्तारी और निलंबन के बाद उनके समर्थन में राजभवन पर प्रदर्शन करने वाले 28 जिलाधिकारियों को सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

पटना राज भवन पर मानव श्रृंखला बना विरोध करते आईएएस अधिकारी (फोटो: पीटीआई)

पटना राज भवन पर मानव श्रृंखला बना विरोध करते आईएएस अधिकारी. (फोटो: पीटीआई)

सुधीर कुमार पर हुई कार्रवाई पर उनके तकरीबन 50 से ज्यादा साथी अधिकारियों ने 27 फरवरी को राज भवन के पास मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध ज़ाहिर किया था. अब इन सभी अधिकारियों को बिहार सचिवालय ने नोटिस जारी कर दिया है.

गौरतलब है कि यह पहली घटना है, जब इतनी बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारियों ने अपने किसी साथी आईएएस अफ़सर के ख़िलाफ़ लिए गए एक्शन के विरोध में प्रदर्शन किया है.

आईएएस ऑफिसर एसोसिएशन (आईएएसओए) की ओर से हुए इस प्रदर्शन में तकरीबन 28 जिलों के अधिकारी शामिल हुए थे. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार बिहार सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा, ‘अधिकारियों को यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने सचिवालय छोड़ने से पहले क्या अपने उच्च अधिकारी को सूचित किया था.’ इन अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया गया है.

ज्ञात हो कि सरकार कि ओर से यह आदेश आईएएसओए के उस फैसले के बाद आया है जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सहित किसी भी अधिकारी से मौखिक आदेश लेने से मना कर दिया था.

आईएएसओए ने यह भी कहा है कि जब तक सुधीर कुमार को इंसाफ नहीं मिलता तब तक बिहार में कोई भी आईएएस अफ़सर बिहार कर्मचारी चयन आयोग या टेक्निकल सर्विस रिक्रूटमेंट बोर्ड के अध्यक्ष या नियामक (कंट्रोलर) का पद स्वीकार नहीं करेगा. आईएएसओए ने इस मामले के विषय में मुख्यमंत्री, स्पीकर और मुख्य सचिव को भी ज्ञापन सौंपा हैं.

वहीं भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों ने 17 मार्च को सदन में आईएएस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के मामले पर जमकर हंगामा और नारेबाज़ी की. विपक्ष ने बीएसएससी प्रश्न पत्र लीक मामले की जांच सीबीआई द्वारा कराए जाने के आईएएसओए की मांग का समर्थन भी किया है.

वहीं नेता प्रतिपक्ष सुशील कुमार मोदी ने पत्रकारों से बात करते हुए बिहार में कांग्रेस शासनकाल की तरह आपातकाल लग जाने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि यह नोटिस आईएएस अधिकारियों को अपमानित करने तथा उनके द्वारा मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्रियों के मौखिक आदेश को नहीं मानने के कारण उन्हें धमकाने और उन पर दबाव बनाने के लिए जारी किया गया है.

मोदी का यह भी कहना था कि लोकतंत्र में आईएएस अधिकारियों को भी विरोध जताने और अपनी बात रखने का अधिकार है, पर सरकार द्वारा उन्हें सबक सिखाने की मंशा से ऐसा नोटिस जारी किया गया है. उन्होंने नीतीश कुमार को यह सुझाव भी दिया है कि राज्य में विकास कार्य बाधित न हो, यह बात ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री को आईएएस अधिकारियों के साथ टकराव की स्थिति नहीं उत्पन्न होने देनी चाहिए.

क्या है बिहार कर्मचारी चयन आयोग पर्चा लीक मामला

बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) की ओर से आयोजित चार चरणों की लिपिक भर्ती परीक्षा होने वाली थी. बीती 29 जनवरी और पांच फरवरी को परीक्षा शुरू होने के कुछ समय पहले ही इसका प्रश्न पत्र ह्वाट्स ऐप पर लीक हो गया था.

इस मामले में चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और 1987 बैच के आईएएस अधिकारी सुधीर कुमार को बीते 24 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद तीन मार्च को उन्हें निलंबित कर दिया गया.

इस मामले की जांच राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है. इससे पहले बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम को आठ फरवरी को गिरफ्तार किया जा चुका है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सुधीर कुमार के अलावा उनके भाई प्रो. अवधेश कुमार, उनकी पत्नी, बहू और भतीजे को भी हिरासत में लिया गया था. सुधीर कुमार ने पर्चा लीक मामले में अपनी भूमिका से साफ़ इनकार किया है.

सूत्रों के मुताबिक, कुमार के भतीजे और बहू भी इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे. सुधीर कुमार पर आरोप है कि उन्हें पास कराने के लिए उन्होंने परीक्षा के पेपर लीक करवाए हैं.

इस मामले में 23 फरवरी को अहमदाबाद स्थित पेपर प्रिंटिग प्रेस के मालिक को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. मामले का खुलासा होने के बाद अब तक कुल 33 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.