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क्या मध्य प्रदेश में राज्यमंत्री बनाए गए बाबा नर्मदा में अवैध खनन रोक पाएंगे: मेधा पाटकर

शिवराज सरकार ने पांच बाबाओं को राज्यमंत्री बनाकर नर्मदा संरक्षण का काम सौंपा है. पाटकर ने सवाल उठाया कि क्या इन बाबाओं को पता है कि नदी पर बने बांधों के कारण कितना नुकसान हो रहा है?

कम्प्यूटर बाबा (फोटो साभार: फेसबुक/ फैंस ऑफ कम्प्यूटर बाबा)

कम्प्यूटर बाबा (फोटो साभार: फेसबुक/ फैंस ऑफ कम्प्यूटर बाबा)

इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पांच बाबाओं को नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर नर्मदा बचाओ आंदोनल की प्रमुख मेधा पाटकर ने विरोध जताया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले बाबा नर्मदा में अवैध खनन रोक पाएंगे?

पत्रिका की खबर के मुताबिक, मेधा पाटकर ने कहा कि क्या ये बाबा नर्मदा नदी में हो रहे अवैध खनन को रोक पाएंगे? क्या इन बाबाओं को पता है कि नदी पर बने बांधों के कारण कितना नुकसान हो रहा है? मध्य प्रदेश और गुजरात में नदी किस हाल मे है?

पाटकर ने कहा, ‘पिछले साल जिस नदी से डूब प्रभावितों को बचाने के लिए प्रयास हो रहे थे, वही नदी आज नदी सूखी पड़ी है. सरकार की योजनाओं के चलते हर रोज नर्मदा का करोड़ों लीटर पानी बड़ी-बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए दिया जा रहा है.’

उन्होंने आगे सवाल किया, ‘नदीं संरक्षण के नाम पर प्रदेश सरकार की नर्मदा सेवा यात्रा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले कम्प्यूटर बाबा ने क्या अपने आरोप वापस ले लिए हैं?’

मीडिया ने संवाददाताओं से बीतचीत में आगे कहा, ‘सरकार ने पहले नर्मदा सेवा यात्रा के नाम पर करीब दो हजार करोड़ रूपये बर्बाद कर दिए. अवैध खनन रोकने, नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में शराब दुकान न खोलने और नदी किनारे छह करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लेकर की गई यात्रा के ये तीनों ही काम नहीं हुए हैं.’

गौरतलब है कि बीते दिनों मध्य प्रदेश सरकार ने पांच हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं को राज्यमंत्री का दर्जा सौंपा था. राज्य मंत्री का दर्जा देने से पहले राज्य सरकार ने इन पांच संतों के नेतृत्व में नर्मदा से लगे क्षेत्रों में पौधरोपण, जल संरक्षण और साफ-सफाई जैसे विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया था.

नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत राज्यमंत्री बनाए गए थे.

इन्हीं बाबाओं के नेतृत्व में 28 मार्च को इंदौर में हुई संत समाज की बैठक में फैसला लिया गया था कि प्रदेश के 45 जिलों में उन 6.5 करोड़ पौधों की गिनती कराई जाएगी, जिन्हें पिछले साल 2 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा नर्मदा किनारे रोपित करने का दावा किया गया था.

उन्होंने इस सरकारी दावे को महाघोटाला करार दिया था और नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने का ऐलान किया था. लेकिन जब इन बाबाओं को राज्यमंत्री बना दिया गया तो इन्होंने न सिर्फ रथ यात्रा रद्द कर दी, बल्कि सरकार के साथ खड़े नजर आने लगे.

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