नॉर्थ ईस्ट

नाॅर्थ ईस्ट डायरी: मिज़ोरम के स्थानीय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने हाथ मिलाया

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मिज़ोरम, असम, त्रिपुरा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के प्रमुख समाचार.

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आइजोल: एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम के तहत मिजोरम की चकमा स्वायत्त जिला परिषद (सीएडीसी) में भाजपा का कांग्रेस के छह सदस्यों के समर्थन के साथ सत्तारूढ़ होना लगभग तय है.

मिजोरम भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने रविवार को यह जानकारी दी. उल्लेखनीय है कि चुनाव में किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है.

सीएडीसी बांग्लादेश और म्यामांर की सीमा से लगे दक्षिण-पश्चिमी मिजोरम में रह रहे चकमा लोगों के लिए एक स्वायत्त परिषद है.

भाजपा और कांग्रेस राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और दोनों का एक साथ आना एक दिलचस्प घटनाक्रम होगा.

भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी सीएडीसी में पांच सदस्यों के साथ जिला परिषद की अगुवाई करेगी. राज्य के खेल मंत्री और कांग्रेस नेता जोदिंतलुंअगा ने 25 अप्रैल को कहा था कि चुनाव के बाद दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के बीच गठजोड़ हुआ है. उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम का दिल्ली या आगामी विधानसभा चुनावों में कोई असर नहीं होगा.

बीस सदस्यीय सीएडीसी के लिए हुए चुनाव में खंडित जनादेश मिला है. मिजो नेशनल फ्रंट को आठ सीटें मिली हैं जबकि कांग्रेस को छह और भाजपा को पांच सीटों पर जीत मिली है. अदालत के आदेश पर एक सीट के लिए चुनाव पर रोक लगी हुयी है.

असम: 275 पुलिसकर्मियों ने स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर की ब्रह्मपुत्र में कूदने की कोशिश

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फोटो साभार: eenaduindia.com

गुवाहाटी: असम में स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (एसपीओ) बल के 275 से ज्यादा कर्मियों ने असम औद्योगिक सुरक्षा बल (एआईएसएफ) में स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर सोमवार को यहां दूसरे सरायघाट पुल से ब्रह्मपुत्र नदी में कूदने की कोशिश की.

पुलिस ने बताया कि एसपीओ कर्मी अपनी खाकी वर्दी पहने पुल पर पहुंचे और वहां से कूदने की कोशिश की. हालांकि उनके प्रदर्शन के मद्देनजर पहले से वहां बड़ी संख्या में तैनात असम पुलिस और सीआरपीएफ के कर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई. उग्र एसपीओ कर्मियों को नियंत्रित करने के लिये पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा. उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज के दौरान किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

अधिकारी ने कहा कि किसी भी एसपीओ कर्मी के पुल से कूदने की दशा में उन्हें बचाने के लिये नदी पुलिस और एनडीआरएफ की नौकाओं को तैनात किया गया था.

प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाके में भारी जाम लग गया. कामरूप जिले के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे मुलाकात कर उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और शिकायतों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा.

त्रिपुरा: आईपीएफटी ने दी धमकी, अंतर-मंत्रालय समिति गठित नहीं होने पर करेगी आंदोलन

अगरतला: त्रिपुरा में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी पार्टी आईपीएफटी ने आज धमकी दी कि अगर तीन महीने के अंदर एक ‘अंतर-मंत्रालयी समिति’ गठित नहीं की गयी तो वह आंदोलन शुरू कर देगी. इसके साथ ही पार्टी ने राज्य की बिप्लव कुमार देव सरकार में एक और कैबिनेट मंत्री के पद की मांग की.

इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट आफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के उपाध्यक्ष अनंत देववर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘अंतर-मंत्रालयी समिति’ पूर्वोत्तर राज्य के मूल निवासियों से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों का अध्ययन करेगी.

उन्होंने दावा किया कि आईपीएफटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी. इसके बाद केंद्र ने आठ जनवरी को इस आशय की एक समिति बनाने की घोषणा की थी.

उन्होंने कहा कि हम अंतर-मंत्रालयी समिति के गठन के बारे में जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अगर अगले तीन महीनों के अंदर यह समिति गठित नहीं होती तो हम लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे.

देववर्मा ने अपनी पार्टी के लिए एक और कैबिनेट मंत्री का पद भी मांगा है.

मेघालय: शिक्षक भर्ती मामले में सीबीआई ने कांग्रेस विधायक के घर पर तलाशी ली

 नई दिल्ली: सीबीआई ने मेघालय में 2008-09 में शिक्षकों की भर्ती में हुई कथित अनियमितता के सिलसिले में शिलॉन्ग में कांग्रेस के एक विधायक के घर और प्राथमिक एवं जन शिक्षा निदेशालय सहित पांच स्थानों पर तलाशी ली है.

एक अधिकारी ने बीते बृहस्पतिवार को बताया कि जिन स्थानों पर तलाशी ली गई उनमें कांग्रेस विधायक ए लिंगदोह का अवास शामिल है. वह घोटाले के वक्त शिक्षा मंत्री थे.

उन्होंने बताया कि सीबीआई ने लिंगदोह और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीएस थंगखीव के खिलाफ मामला दर्ज किया है. साल 2008-09 में शिक्षकों की भर्ती के दौरान अंकपत्र में कथित तौर पर छेड़छाड़ करने को लेकर इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

मेघालय उच्च न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री लिंगदोह और 1984 बैच के आईएएस अधिकारी थंगखीव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की. थंगखीव उस वक्त प्रधान शिक्षा सचिव के पद पर थे.

असम: कैबिनेट का विस्तार, आदिवासी नेता को कैबिनेट में शामिल नहीं करने के विरोध में मध्य असम में बंद

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कैबिनेट में शामिल नए मंत्रियों के साथ राज्यपाल जगदीश मुखी (बीच में) और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (दाएं से 4th) (फोटो: पीटीआई)

मोरीगांव: असम कैबिनेट के विस्तार में आदिवासी विधायक रमाकांत देवरी को शामिल नहीं किए जाने के विरोध में शुक्रवार को मध्य असम में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के कारण राज्य के कुछ हिस्सों जनजीवन प्रभावित हुआ.

बंद के दौरान छिटपुट हिंसा भी हुई. साल 2016 के बाद गुरुवार को पहली बार सर्वानंद सोनोवाल कैबिनेट का विस्तार हुआ.

आदिवासी संगठनों ने यह आरोप लगाते हुए बंद का आह्वान किया है कि देवरी को कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाना आदिवासी संगठनों से धोखा है. उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने विधानसभा चुनावों से पहले वादा किया था कि सरकार बनने के बाद उन्हें कैबिनेट में जगह दी जाएगी.

पुलिस ने बताया कि सुबह पांच बजे से आयोजित बंद का मोरीगांव जिले के सात आदिवासी खंडों में अच्छा – खासा असर देखने को मिला जबकि नागांव और कामरूप ( मेट्रो ) जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ.

इलाके में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और गाड़ियां भी सड़कों से नदारद रही. हिंसा में शामिल होने के आरोप में मोरीगांव कस्बे में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया.

प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगाने की कोशिश की, ड्राइवरों पर हमला किया और दोपहर तक गाड़ियों की आवाजाही रोके रखी.

तिवा नेशनल सॉलिडैरिटी फोरम, ऑल तिवा छात्रसंघ, चुटिया सनमिलन और कोच-राजबोंग्शी सनमिलन ने मध्य असम में बंद का आह्वान किया है.

इससे पहले हुए मंत्रिमंडल विस्तार में सात नये मंत्री शामिल हुए हैं. शामिल किए गए सात मंत्रियों में से चार कैबिनेट मंत्री हैं वहीं तीन राज्य मंत्री हैं.

राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल जगदीश मुखी ने भाजपा के सिद्धार्थ भट्टाचार्य, भाबेश कलिता, सम रोंघांग, तपन गोगोई और पीयूष हजारिका, असम गण परिषद् (एजीपी) के फनी भूषण चौधरी और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चंदन ब्रह्मा को पद की शपथ दिलाई.

भट्टाचार्य, रोंघांग, चौधरी और ब्रह्मा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया जबकि बाकी राज्य मंत्री बनाए गए. इन सातों में से एजीपी और बीपीएफ के विधायक राज्य की पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान मंत्री रह चुके हैं.

सर्बानंद सोनोवाल के मंत्रिमंडल ने 11 मंत्रियों के साथ 24 मई 2016 को कार्यभार संभाला था. इनमें मुख्यमंत्री , कैबिनेट के आठ मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले दो राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी.

सिक्किम: बाइचुंग भूटिया ने ‘हमरो सिक्किम पार्टी’ बनाई

New Delhi: Former Indian football team captain Bhaichung Bhutia speaks during the launch of his political party 'Hamro Sikkim' during a press conference in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Arun Sharma (PTI4_26_2018_000103B)

दिल्ली में पार्टी की घोषणा करते बाईचुंग भूटिया (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने गुरुवार को अपनी नई पार्टी ‘हमरो सिक्किम’ की शुरुआत की. यह पार्टी उनके गृह राज्य सिक्किम पर आधारित होगी.

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में उन्होंने खुद को ‘एक बाहरी की तरह महसूस’ किया. भूटिया ने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का हिस्सा होने और कई वर्षों तक शीर्ष बंगाल क्लबों के लिए खेलने के बाद भी वह ‘बाहरी’  के तमगे  से छुटकारा नहीं पा सके और अब वह अपनी जड़ों की तरफ लौट आये है.

उन्होंने कहा, ‘मैं कई वर्षों तक बंगाल के लिए खेला लेकिन वहां हमेशा यह तमगा रहा. टीएमसी के प्रति मेरी प्रतिबद्धता वहां नहीं थी. मुझे लगता है कि पार्टी में बने रहने के लिए मेरी ओर से यह अनुचित था कि मैं प्रतिबद्ध नहीं हूं.’

भूटिया ने कहा, ‘अब मैं वापस लौट रहा हूं. मेरा परिवार, मेरा घर, सब कुछ सिक्किम में है. अब मैं खुद को प्रतिबद्ध करने में सक्षम हो जाऊंगा. मुझे लगता है कि मैं यहां और अधिक योगदान कर सकता हूं.’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उनकी हार के तुरन्त बाद टीएमसी और भूटिया के बीच मतभेद पैदा हो गये थे क्योंकि उन्होंने गोरखालैंड मुद्दे पर पार्टी के रुख का समर्थन नहीं किया था.

उन्होंने कहा, ‘गोरखालैंड के संबंध में एक या दो प्रमुख मुद्दे है, जिन पर मैं सहमत नहीं था. मैंने इस मुद्दे पर टीएमसी के रुख का समर्थन नहीं किया.’

भूटिया ने कहा कि उनकी पार्टी जाति और धर्म की छोटी राजनीति से ऊपर उठने की कोशिश करेगी और राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनायेगी क्योंकि यह वर्तमान राज्य सरकार के तहत भ्रष्ट लोगों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बन गया है.

अरुणाचल प्रदेश: मीडिया की कम मौजूदगी से प्रदेश के मुद्दों पर नहीं जाता ध्यान- मुख्यमंत्री

अरुणाचल प्रदेश के सीएम व भाजपा नेता पेमा खांडू. फाइल फोटो, पीटीआई.

अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू (फाइल फोटो: पीटीआई)

इटानगर: मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को कहा कि राज्य में मीडिया की नगण्य मौजूदगी के कारण राष्ट्रीय स्तर पर अरुणाचल प्रदेश और इसकी समस्याओं पर कम ध्यान जाता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ इलाकों तक आसान पहुंच नहीं होने से अरुणाचल प्रदेश की घटनाओं की खबरें ही नहीं आ पाती. हालांकि , सूचना और जन संपर्क विभाग ने राज्य में मीडिया संस्थानों को बढ़ावा देने की नीति बनायी है.

पूर्व विधायक किपा बाबू के अंग्रेजी अखबार और केबल टीबी नेटवर्क की शुरुआत के बाद खांडू ने कहा, ‘मैंने मंत्रियों , विधायकों और अधिकारियों को भी फेसबुक और टि्वटर जैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए राज्य के विकास कार्यों को रेखांकित करने को कहा है.’

उन्होंने पत्रकारों को मुख्यधारा की मीडिया में नजरंदाज किये गए इलाके को कवर करने का अनुरोध किया.

पूर्वोत्तर में आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को अब मिलेगा चार लाख रुपये का अनुदान

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर में आत्मसमर्पण करने वाले हर उग्रवादी को अब तत्काल चार लाख रुपये का अनुदान मिलेगा. यह अनुदान पहले एक लाख रुपये था. इसके अतिरिक्त उन्हें अन्य सुविधाओं के साथ हर महीने छह हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी.

कट्टर उग्रवादियों एवं गुमराह युवाओं को हिंसा के रास्ते से अलग करने के लिए 1998 में पूर्वोत्तर में आत्मसमर्पण – सह – पुनर्वास नीति को लागू किया गया था.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अधिक युवाओं को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए इस नीति में व्यापक संशोधन किये गए हैं, जो एक अप्रैल से प्रभावी होगा.

अधिकारी ने बताया, ‘संशोधित नियमों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले हर उग्रवादी को पूर्व के एक लाख रुपये की बजाय अब चार लाख रुपये का अनुदान तत्काल दिया जाएगा. अब तीन वर्ष तक 3,500 रुपये की बजाय 6,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी.’

हथियार और गोला-बारूद जमा करने के लिए अब एक हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की राशि दी जाएगी. इसके अतिरिक्त आत्मसमर्पण करने वाले हर आतंकी को स्वरोजगार के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा.

पुनर्वास शिविरों के लिए निर्माण की खातिर कोष का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वालों का अनिवार्य तौर पर आधार बॉयोमेट्रिक पंजीयन कराया जाएगा.

असम: बोडोलैंड पर बातचीत की मांग को लेकर बोडो समूहों का नेशनल हाईवे बंद का आह्वान

bodoland PTI Files

फाइल फोटो: पीटीआई

कोकराझार: बोडोलैंड मुद्दे पर राज्य सरकार के आगे बातचीत करने में कथित तौर पर असफल रहने के खिलाफ विभिन्न बोडो समूहों ने शुक्रवार को यहां प्रदर्शन किया और दो मई से बोडोलैंड इलाके में पांच दिन तक राष्ट्रीय राजमार्ग अवरूद्ध रखने का आह्वान किया है.

द ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन, द नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (प्रोग्रेसिव) और द पीपुल्स ज्वाइंट एक्शन कमिटी फॉर बोडोलैंड मूवमेंट ने आंदोलन की अगुवाई के लिए एक संयुक्त आंदोलन समूह बनाया है.

उन्होंने यहां उपायुक्त के कार्यालय के निकट प्रदर्शन किया और कोकराझार के उपायुक्त के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा. उन्होंने तत्काल एक अलग बोडोलैंड बनाने एवं बुधवार को राजनीतिक स्तर पर बोडोलैंड मुद्दे पर शीघ्र बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की.

प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने अपना सिर मुड़वा रखा था और काले रंग का बैज लगा रखा था.

एबीएसयू के अध्यक्ष प्रमोद बोरो ने संवाददाताओं को बताया, ‘संयुक्त आंदोलन समूह के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के वादे के बावजूद अब तक बातचीत नहीं होना बहुत निराशाजनक है.’

बोरो ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में दो मई से बोडोलैंड इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया है.

काजीरंगा में खनन और पत्थर तोड़ने के कार्य पर प्रतिबंध की मांग, एनटीसीए ने कहा बाघ और वन्य जीव हो रहे हैं प्रभावित

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प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने पत्र लिखकर असम सरकार से मांग की है कि वह काजीरंगा-कारबी आंगलोंग क्षेत्र में होने वाले खनन और पत्थरों के तोड़ ने के कार्य पर तत्काल प्रतिबंध लगाए क्योंकि इससे बाघ सहित अन्य वन्य जीवों का प्राकृतिक वास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है.

असम के मुख्य सचिव को लिखे एक पत्र में एनटीसीए ने कहा है कि खनन और पत्थरों को तोड़ ने के कार्य से बाघों के संरक्षण में गंभीर परेशानियां पेश आ रही हैं.

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाली इकाई एनटीसीए ने पत्र के साथ एक रिपोर्ट भी संलग्न की है. इसमें कहा गया है कि खनन की वजह से काजीरंगा के कई प्राकृतिक झरने या छोटी नदियां सूख गई हैं, या प्रदूषित हो रही हैं.

वन्यजीव कार्यकर्ता रोहित चौधरी की शिकायत के बाद राज्य सरकार को एनटीसीए रिपोर्ट सौंपी गई है. कार्यकर्ता ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य के निकट स्थित कारबी आंगलोंग में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

त्रिपुरा: सरकार ने एनसीटीई के नियमों में ढील देने की मांग की

अगरतला: त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और शिक्षा के अधिकार के तहत लागू किये गये नियमों में राज्य को छूट मिलना चाहिए, जिसकी वजह से राज्य के विभिन्न स्कूलों में 10,000 से अधिक शिक्षक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

नाथ ने यहां संवाददातओं को बताया कि हमारे पास स्कूल शिक्षक के 12,222 पर खाली पड़े हुए हैं. भले ही चाहे हम बी.एड किये हुए सभी प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को भी भर्ती कर लेते हैं, तो यह संख्या मात्र 1,500 ही होगी.

नाथ ने बताया कि यदि इसके नियमों में ढील नहीं दी गई तो हजारों छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.

इससे पहले भी 20 अप्रैल को मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं. त्रिपुरा में वर्तमान में लगभग 30,000 शिक्षक कार्यरत हैं.

नाथ ने हालांकि आश्वस्त किया कि उनकी सरकार किसी भी कीमत पर शिक्षक व शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं करेगी.

मेघालय: पांच साल में इंसान-हाथी संघर्ष में 25 लोगों ने जान गंवाई

A herd of elephants cross a road that passes through the flooded Kaziranga National Park in the northeastern state of Assam, India, July 12, 2017. Picture taken July 12, 2017. REUTERS/Anuwar Hazarika

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

शिलॉन्ग: मेघालय में पिछले पांच साल में इंसान और हाथियों के बीच संघर्ष के करीब 10,000 से अधिक मामले सामने आए और इसमें 25 लोग मारे गये हैं. इससे बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने यह बात कही है.

कैग ने 31 मार्च 2017 को समाप्त हुये वित्त वर्ष की रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में करीब 1,800 हाथी हैं. ऐसे करीब दो तिहाई संघर्ष गारो हिल्स क्षेत्र में हुए हैं.

मुख्यमंत्री कोनार्ड सी संगमा ने हाल ही में विधानसभा में रिपोर्ट पेश की है. इसमें बताया गया है, ‘वन विभाग ने इंसान और हाथियों के बीच संघर्ष (एचईसी) के 9,622 से अधिक मामला दर्ज किया जिसमें 25 लोगों की मौत हो गयी, 22 लोग घायल हो गये और करीब 4,009 हेक्टेयर भूमि पर लगी फसलों को नुकसान पहुंचा.’

2012 से 2017 के बीच की अवधि को कैग की रिपोर्ट में शामिल किया गया है. इसमें जोर दिया गया है कि बालपकरम नेशनल पार्क सहित गारो हिल्स क्षेत्र में 6,500 से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं. खासी हिल्स क्षेत्र से करीब 2,500 मामले दर्ज किये गये हैं.

इसमें बताया गया है कि लोगों की मौत , संपत्तियों और फसलों को हुये नुकसान के लिए ग्रामीणों को मुआवजे के तौर पर 4.41 करोड़ रूपये की राशि दी गयी है.

त्रिपुरा: चिटफंड घोटाले के संबंध में सीबीआई ने की पूर्व मंत्री से पूछताछ

अगरतला: केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) ने बुधवार को रोज वैली चिटफंड घोटाले के संबंध में त्रिपुरा की पूर्व मंत्री बिजिता नाथ से पूछताछ की.

बिजिता राज्य की माणिक सरकार के नेतृत्व वाली सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री थी.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘मुझसे रोज वैली मामले में पूछताछ की गयी. इस बार उन्होंने मेरा बयान दर्ज किया और कहा कि पिछली बार उन्होंने मुझसे पूछताछ की थी लेकिन बयान दर्ज नहीं किया था. ’’

सीबीआई ने पिछले साल जून में घोटाले के संबंध में बिजिता से पूछताछ की थी. सीबीआई के एक अधिकारी ने यहां एमएलए हास्टल में उनके आधिकारिक आवास पर उनसे पूछताछ हुई.

पूछताछ के दौरान उपस्थित रहे उनके वकील हरिबल देबनाथ ने संवाददाताओं से कहा कि उनसे गवाह के रूप में पूछताछ की गई, आरोपी के रूप में नहीं.

विधानसभा चुनाव के प्रचार के वक्त भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन ने घोषणा की थी कि वह सत्ता में आने के तुरंत बाद रोज वैली घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप देगा.

त्रिपुरा के विधानसभा अध्यक्ष रेबती मोहन दास ने इससे पहले बताया था कि सीबीआई ने उन्हें जानकारी दी कि वह करोड़ों के रोज वैली चिटफंड घोटाले के संबंध में बिजिता और माकपा के एक अन्य वरिष्ठ विधायक बादल चौधरी से पूछताछ करेगी.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री चौधरी से भी पूछताछ की जाएगी.

मेघालय से पूरी तरह और अरुणाचल से आंशिक रूप से हटाया गया आफस्पा

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: मेघालय से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफस्पा) को पूरी तरह हटा लिया गया है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में अब यह असम सीमा से लगे आठ थाना क्षेत्रों और पड़ोसी म्यांमार से लगे तीन जिलों में लागू रहेगा.

सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून 31 मार्च से मेघालय के सभी क्षेत्रों से हटा लिया गया है. यह कानून सुरक्षा बलों को बिना वारंट के ही तलाशी अभियान चलाने और किसी को भी कहीं से भी गिरफ्तार करने की शक्ति देता है.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में सुरक्षा हालात में उल्लेखनीय सुधार की वजह से यह फैसला किया गया है.

अधिकारियों ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में अब यह विवादित कानून असम सीमा से लगे 16 थाना क्षेत्रों से घटकर आठ थाना क्षेत्रों में लागू रहेगा. इसके अलावा यह तिरप, चांगलांग और लांगडिंग जिलों में भी लागू रहेगा.

विभिन्न संगठन पूर्वोत्तर के साथ-साथ जम्मू कश्मीर से इस कानून को हटाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह कानून सुरक्षा बलों को ‘असैनिकों’ के खिलाफ कार्रवाई करने की ‘अपार शक्ति’ देता है.

आफस्पा नगालैंड में कई दशकों और असम में 1990 के दशक की शुरुआत से लागू है.

तीन अगस्त, 2015 को नगा विद्रोही समूह एनएससीएन- आईएम महासचिव टी मुइवा और सरकार की ओर से वार्ताकार आर एन रवि के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मसौदा समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद नगालैंड से इसे वापस नहीं लिया गया है.

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

वर्ष 1997 से लेकर पिछले दो दशकों में 2017 ऐसा साल रहा जब उग्रवाद से संबंधित सबसे कम घटनाएं दर्ज की गईं और सबसे कम संख्या में असैनिक और सुरक्षाकर्मी हताहत हुए.

अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा और मिजोरम से उग्रवाद का सफाया हो चुका है, वहीं असम, मेघालय, नगालैंड और मणिपुर में सुरक्षा हालात में सुधार हुआ है.

कांग्रेस ने की अरुणाचल प्रदेश से पूरी तरह आफ्सपा हटाने की मांग

अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों से आफ्सपा हटाने के केंद्र के निर्णय पर राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से अलग अलग प्रतिक्रियाएं आयी हैं. इसमें सत्ताधारी भाजपा ने जहां सतर्कता बरती वहीं कांग्रेस ने इसे पूरी तरह से हटाने की मांग की है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तकाम संजय ने कहा कि किसी पूर्व सूचना के बिना अभियान संचालित करने और व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का सुरक्षा बलों को अधिकार देने वाला सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून अरुणाचल प्रदेश जैसे शांतिपूर्ण राज्य में ‘प्रासंगिक नहीं है.’

उन्होंने दावा किया, ‘जब केंद्र मेघालय से कानून हटा सकता है तो अरुणाचल प्रदेश से क्यों नहीं? पिछले कई वर्षों से राज्य में उग्रवादियों की किसी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है. ऐसी गतिविधि से निपटने के लिए अन्य कानून भी है और आफ्सपा लोक शांति को केवल खतरे में डालेगा.’

उधर, सत्ताधारी भाजपा का यह विचार है कि केंद्र को राज्य में जमीनी स्थिति का अध्ययन करना चाहिए और यदि वह इसकी अनुमति दे तो उसे क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए कानून को समाप्त करना चाहिए.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तपीर गाओ ने कहा, ‘ पूर्वोत्तर में राष्ट्रविरोधी तत्वों की मौजूदगी को नकारा नहीं जा सकता. यह केंद्र का विषय है और यदि केंद्र सरकार कानून को समाप्त करने को उपयुक्त समझे तो वह वह व्यापक भलाई के लिए होगा.’

अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ के अध्यक्ष हावा बागंग ने जोर देकर कहा कि आफ्सपा पड़ोसी राज्यों के उग्रवादी समूहों की असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करता है.

मेघालय: जैविक हल्दी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने शुरू किया अभियान

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लकाडोंग हल्दी (फोटो साभार: नॉर्थईस्ट टुडे)

शिलॉन्ग:  मेघालय सरकार ने राज्य में उगाई जाने वाली लकाडोंग हल्दी का उत्पादन पांच गुना बढ़ाने के लिए एक अभियान की शुरुआत की है. सरकार ने अगले पांच सालों में इसका उत्पादन कम से कम 50,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा है.

‘मिशन लकाडोंग’ के एक दस्तावेज के मुताबिक, अगले पांच साल में वर्तमान 2,577 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को बढ़ा कर 6,070 हेक्टेयर करने की योजना है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन के मुताबिक, जैनतिया पर्वतीय जिला दुनिया में बेहतरीन किस्मों की हल्दी के उत्पादन के लिए मशहूर है और उच्च करक्यूमिन वाली लकाडोंग हल्दी सबसे मशहूर किस्मों में से एक है.

‘मिशन लकाडोंग’ का शुभारंभ करते हुये राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कल कहा कि लास्कीन और थाडलास्कीन प्रखंडों में करीब 2,500 हेक्टेयर में कम से कम 1,000 किसान इस समय लकाडोंग हल्दी की खेती के काम में लगे हुये हैं और एक साल में करीब 10,000 मीट्रिक टन उत्पादन किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘इतना उत्पादन हमारे लकाडोंग प्रजाति के लिए वैश्विक छाप छोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है. लकाडोंग हल्दी के उत्पादन में वृद्धि के लिए कम से कम 50,000 मीट्रिक टन तक और खेती के क्षेत्र को दोगुना करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है.’

बेरोक-टोक नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर जा सकेंगे विदेशी नागरिक 

नई दिल्ली: विदेशी आगंतुक अब देश के कुछ उन खास इलाकों में जा सकेंगे जहां अभी तक उनकी पहुंच विशेष अनुमति के बिना असंभव थी. हालांकि पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान के नागरिकों को अभी भी यह छूट नहीं दी गई है.

अधिकारियों ने यह जानकारी दी. एक अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर के प्रोटेक्टेड एरिया परमिट रेजीम में पांच वर्ष के लिए ढील देने का निर्णय किया है जो कि एक अप्रैल से प्रभावी है.

विदेशी (प्रतिबंधित क्षेत्र) आदेश 1958 के अनुसार कुछ राज्यों के इनर लाइन तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा में पड़ने वाले सभी क्षेत्र निषेध क्षेत्र घोषित हैं.

इस निषेध क्षेत्र में वर्तमान में पूरा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम आते हैं. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कुछ क्षेत्र शामिल हैं. सिक्किम का कुछ भाग निषेध क्षेत्र में तथा शेष प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है.

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अन्य क्षेत्रों से पीएपी हटाने पर विचार किया जा रहा है.

पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान से आने वाले लोगों पर अभी भी पीएपी क्षेत्र में जाने पर पाबंदी है. इसमें नगालैंड, मिजोरम तथा मणिपुर भी शामिल हैं.

दिशानिर्देशों के अनुसार किसी विदेशी नागरिक को आमतौर पर निषिद्ध अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र में आने की अनुमति तब तक नहीं होती जब तक कि सरकार इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाती कि उसके वहां जाने के पीछे कोई बहुत बड़ा कारण है.

हालांकि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार समय समय पर अधिसूचना जारी करके कुछ ऐसे क्षेत्रों को निषेध अथवा प्रतिबंधित से छूट देती है.

त्रिपुरा: शाही वंशज ने महल को संग्रहालय में तब्दील करने का विरोध किया

Tripura raj bhavan

पुष्बंत पैलेस, फोटो साभार: Wikimapia

अगरतला: त्रिपुरा के शाही घराने के वंशज और आखिरी राजा बीर बिक्रम किशोर के पौत्र प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने राज्य के सदी पुराने ‘पुष्वंत महल ’ को संग्रहालय में तब्दील करने के त्रिपुरा सरकार के फैसले का विरोध करने के साथ ही इसे ‘स्थानीय मूल धरोहरों को हथियाने’ वाला कदम करार दिया.

त्रिपुरा सरकार ने हाल में एक अधिसूचना जारी कर यह घोषणा की थी कि ‘पुष्वंत महल’ को संग्रहालय में परिवर्तित किया जायेगा और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर को समर्पित शोध केंद्र स्थापित किया जायेगा.

वर्ष 1972 से यह महल राज्य के राज्यपालों के आधिकारिक आवास के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है.

राज्यपाल तथागत रॉय का निवास स्थान अब नया राजभवन हो गया है. 18 अप्रैल को यहां राजधानी परिसर में नये राजभवन का उद्घाटन हुआ था.

देबबर्मा ने कहा, ‘मैं किसी भी प्राचीन धरोहर या महल का नाम बदले जाने के खिलाफ हूं. यह सुनकर दुख होता है कि त्रिपुरा सरकार पुष्पावंत महल (राज्यपाल के आवास) का नाम बदलकर रवींद्रनाथ टैगोर संग्रहालय करेगी.’

राजभवन के सचिव समरजीत भौमिक ने हालांकि स्पष्ट किया कि महल का नाम बदलने का कोई सवाल नहीं उठता लेकिन इसे टैगोर संग्रहालय के रूप में तब्दील किया जायेगा.

बहरहाल देबबर्मा को जब यह बताया गया कि राज्य सरकार की महल का नाम बदलने की कोई मंशा नहीं है, इस पर उन्होंने कहा, ‘वे सांस्कृतिक रूप से हर धरोहर को हथियाने की कोशिश कर रहे हैं. अंतत: वे महल का नाम बदल देंगे. मैं जानना चाहता हूं कि किसी ऐतिहासिक स्थल को संग्रहालय में क्यों तब्दील किया जायेगा?’’

उन्होंने कहा कि टैगोर त्रिपुरा के महाराजाओं के अच्छे मित्र थे और सरकार बेवजह इसे विवाद में घसीट रही है.

देबबर्मा ने मौजूदा सरकार को पूर्ववर्ती वाम मोर्चा शासन को एक समान बताया, जिसने उज्जयंत महल को संग्रहालय में तब्दील करने की कोशिश की थी.

(समाचार एजेंसी से इनपुट के साथ)

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