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चित्रकथा: अमेरिका के नस्लीय इतिहास के बर्बर चेहरे से रूबरू कराता पहला स्मारक

अमेरिका में सदियों से चले आ रहे अश्वेत उत्पीड़न और नस्लीय हिंसा के शिकार हज़ारों अश्वेत पीड़ितों की याद में देश का पहला स्मारक ‘द नेशनल मेमोरियल फॉर पीस एंड जस्टिस’ अलबामा के मॉन्टगोमेरी में पिछले हफ्ते खोला गया.

National Memorial for Peace and Justice

नेशनल मेमोरियल फॉर पीस एंड जस्टिस, मॉन्टगोमेरी, अलबामा (संयुक्त राष्ट्र अमेरिका) (सभी फोटो: मैलोरी मैंच)

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पास इसके क्रूर नस्लवादी इतिहास का एक जीता-जागता स्मारक है. अमेरिका में सदियों से चले आ रहे अश्वेत उत्पीड़न और देश में नस्लीय हिंसा के शिकार हजारों अश्वेत पीड़ितों की याद में देश का पहला स्मारक ‘द नेशनल मेमोरियल फॉर पीस एंड जस्टिस’ अलबामा के मॉन्टगोमेरी में पिछले हफ्ते खोला गया.

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अमेरिका में अश्वेत हिंसा के पीड़ितों की याद में पहली बार कोई स्मारक बना है. अलबामा के मॉन्टगोमेरी में इसे बीते 28 अप्रैल को जनता के लिए खोला गया है.

इस प्रोजेक्ट को शुरू करने वाले संगठन इक्वल जस्टिस इनिशिएटिव का तर्क है कि दो सदी से चली आ रही गुलामी सिविल वॉर के साथ खत्म नहीं हुई थी. यह उत्पीड़न लिंचिंग, फिर नस्लीय अलगाव, नागरिक अधिकारों के दमन में बदला और उसके बाद नस्लीय आधार पर पक्षपातपूर्ण तरीके से हो रही कैद में बदल गया.

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1877 से 1950 के बीच अमेरिका में मारे गए 4,000 से ज्यादा अश्वेतों की याद में लगाए गए बॉक्स

दुनिया के कई देशों ने अपने शर्मनाक इतिहास को स्वीकार है: दक्षिण अफ्रीका ने रंगभेद को कुबूला. जर्मनी ने होलोकॉस्ट का स्मारक बनवाया. कनाडा ने शोषण का शिकार हुए मूल निवासियों से माफी मांगी. अमेरिका ने सदियों से अश्वेतों के खिलाफ हुई हिंसा को अब तक कभी इतने स्पष्ट और सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं किया.

इक्वल जस्टिस इनिशिएटिव के संस्थापक और डायरेक्टर ब्रायन स्टीवेंसन ने का कहना है कि देश को आगे बढ़ने के लिए नस्लीय अन्याय के इतिहास से निपटने में अपनी असफलता को स्वीकारना होगा.

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इन 800 डिब्बों में से हर एक पर लिंचिंग का शिकार हुए कम से कम एक अश्वेत व्यक्ति का नाम और मरने की तारीख लिखी हुई है

इस संगठन ने 1877 से 1950 के बीच देश भर, खासतौर पर दक्षिणी हिस्सों में हुई लिंचिंग का शिकार हुए 4,000 से ज्यादा अश्वेत पीड़ितों के बारे में जानकारी दर्ज की है.

अश्वेत महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को वोट देने की कोशिश करने, किसी श्वेत महिला के पीछे चलने या पीने का पानी मांगने जैसे कारणों के लिए पीटा गया, गोली मारी गयी, फांसी दी गयी या जिंदा जला दिया गया. इनमें से कुछ पर अपराध के आरोप भी थे, लेकिन कोर्ट से पहले भीड़ ने ही उनके साथ अपनी तरह का इंसाफ किया.

स्मारक के लिए मॉन्टगोमेरी को चुनने की खास वजह थी. पहली तो ये जगह गुलामी का समर्थन करने वाली सिविल वॉर कॉन्फेडेरेसी (संघ) का केंद्र था, यहां आज भी कॉन्फेडेरेट मेमोरियल दिन पर सरकारी अवकाश होता है. साथ ही यहीं से नागरिक अधिकार आंदोलन शुरू हुआ था, जिससे मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने शुरुआत की थी.

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स्मारक में आते ही सामने गुलामों की तरह रखे गए अश्वेतों की 6 प्रतिमाएं दिखाई देती हैं.

एक सदी से ज्यादा तक लिंचिंग के ये पीड़ित ज्यादातर अमेरिकी जनता के लिए अज्ञात और अनदेखे रहे हैं. अब जाकर लोग इनके बारे में जान पाएंगे.

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म्यूजियम के मुताबिक अश्वेत महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को वोट देने की कोशिश करने, किसी श्वेत महिला के पीछे चलने या पीने का पानी मांगने जैसे कारणों के लिए पीटा गया, गोली मारी गयी, फांसी दी गयी या जिंदा जला दिया गया था

म्यूजियम के अनुसार 20 लाख अमेरिकी अब भी कैद में है. इनमें ज्यादातर अश्वेत हैं. तीन में से एक अश्वेत अमेरिकी की उसके जीवनकाल में एक बार जेल जाने की उम्मीद होती है क्योंकि एक ही अपराध करने के पर किसी श्वेत आदमी की तुलना में उसके दोषी ठहराए की संभावना छह गुना है.

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नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और कांग्रेस नेता जॉन लेविस ने म्यूजियम और स्मारक के उद्घाटन के समय कहा कि कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा पहले हुआ था, हमें इसे भूल जाना चाहिए. हम नहीं भूल सकते कि सैंकड़ों-हजारों लोगों के साथ क्या हुआ. हम नस्लीय हिंसा को खत्म करेंगे.’

म्यूजियम और स्मारक के उद्घाटन के समय नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और कांग्रेस नेता जॉन लेविस ने कहा कि अमेरिका के नस्लवादी इतिहास को अनदेखा करना कोई विकल्प नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा पहले हुआ था, हमें इसे भूल जाना चाहिए. हम नहीं भूल सकते कि सैंकड़ों-हजारों लोगों के साथ क्या हुआ था. हम नस्लीय हिंसा को खत्म करेंगे.’

मैलोरी एक अमेरिकी मल्टीमीडिया पत्रकार हैं.

इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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