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कठुआ मामले में सीबीआई जांच की ज़रूरत नहीं, राज्य की पुलिस ने अच्छी जांच की है: महबूबा मुफ़्ती

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने इस मामले को अच्छी तरह संभाला है. कोई भी ग़लत कदम ऐसे हालातों को जन्म दे सकता था जहां पूरा राज्य सांप्रदायिकता की आग में जल गया होता.

महबूबा मुफ़्ती. (फोटो: पीटीआई)

महबूबा मुफ़्ती. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में सीबीआई जांच की बिल्कुल जरूरत नहीं है और अगर आपको जम्मू कश्मीर पुलिस पर यकीन नहीं है तो इसका मतलब हुआ कि राज्य में ऐसा कोई नहीं बचा है जिस पर यकीन किया जा सके.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘क्राइम ब्रांच टीम के अधिकारियों पर उनके धर्म या वे किस क्षेत्र के रहने वाले हैं, को आधार बनाकर सवाल खड़े करना शर्मनाक और खतरनाक है. हर वक्त एक अपराध होता है, हम जांचकर्ताओं की टीम चुनने के लिए एक जनमत संग्रह नहीं कर सकते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जो क्राइम ब्रांच की जांच पर सवाल उठा रहे हैं, उनके अपने निहित स्वार्थ हैं और उनका उद्देश्य अपराधियों के इस जघन्य अपराध को संरक्षण देना है. ’

गौरतलब है कि पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर मामले की सुनवाई चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की मांग की है. जम्मू कश्मीर सरकार राज्य के बाहर सुनवाई के खिलाफ है. मामला सीबीआई को सौंपे जाने की मांग को लेकर भी एक जनहित याचिका लगाई गई है, लेकिन अभी तक उसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकारा जाना बाकी है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट को दी अपनी रिपोर्ट में मामले में सीबीआई की जांच को न्यायोचित ठहराया है.

हालांकि मुफ्ती के गठबंधन साझेदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मामला सीबीआई को सौंपे जाने से कोई आपत्ति नहीं है. बल्कि, भाजपा और संघ से जुड़े कई नेता हिंदू एकता मंच का हिस्सा रहे हैं. हिंदू एकता मंच कठुआ में आरोपियों को सहायता देने और मामले की सीबीआई जांच की मांग के लिए बनाया एक संगठन है.

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री का कहना है, ‘मैं इस मामले को लेकर बिल्कुल साफ हूं. जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बहुत अच्छी जांच की है, वैज्ञानिक तरीके से सारे सबूत जुटाए हैं. अब अदालत में ट्रायल होगा, जो परिणामों का फैसला करेगा. हम आश्वस्त हैं कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है. हम ऐसा कोई फैसला सिर्फ इसलिए नहीं ले सकते क्योंकि आरोपी इसकी मांग कर रहे हैं.’

राज्य की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जब बडगाम में सेना द्वारा एक ग्रामीण को जीप से बांधा गया था, हमें कहा गया था कि हम इस अवैध कृत्य को लेकर अधिक आलोचनात्मक रवैया न अपनाएं क्योंकि इससे बलों का मनोबल गिरेगा. इस लिहाज से जम्मू कश्मीर पुलिस के बारे में क्या कहेंगे?

उन्होंने अपनी बात में आगे जोड़ा, ‘अगर आपको उस राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं है, जो राज्य में पसरे युद्ध के हालातों से निपटने हमेशा आगे रहती है और बहुत ही कठिन परिस्थितियों से जूझ रही है, तो फिर कौन बचा है जिस पर यकीन करेंगे?’

उन्होंने कहा, ‘मेरा सवाल है कि इस मामले में अभियुक्त सीबीआई जांच की सख्ती से मांग क्यों कर रहे हैं? वे इस तरह की जांच के नतीजे को लेकर क्यों आश्वस्त हैं? और कब एक सरकार ऐसे मामलों में जांच एजेंसी का निर्णय इस आधार पर करती है कि आरोपी क्या चाहते हैं? हमारे सामने आगे गंभीर चुनौतियां हैं और हम एक सांप्रदायिक आग को हमारे राज्य में सब कुछ जलाने की अनुमति नहीं दे सकते हैं. हमारी सरकार ने इस मामले को अच्छी तरह से संभाला है. कोई भी गलत कदम ऐसे हालातों को जन्म दे सकता था जहां पूरा राज्य सांप्रदायिक आग मे जल गया होता.’

उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे भी लोग हैं जो इस जघन्य अपराध को हिंदू-मुस्लिम मुद्दे में बदलना चाहते हैं.’

महबूबा ने आगे कहा, ‘हम चिंतित हैं क्योंकि महीने भर में अमरनाथ यात्रा शुरू होनी है. हालात पहले से ही संदिग्ध हैं. मैंने दिल्ली में केंद्र सरकार को भी बताया कि अगर यह सांप्रदायिक आग तुरंत नहीं बुझाई जाती है तो यह पूरे राज्य को निगल लेगी.’

वे आगे बोलीं, ‘इस मामले से संबंधित जानकारी देखिए, क्राइम ब्रांच की जांच में जो सामने आया, एक आठ साल की बच्ची का अपहरण किया गया, उसे नशीली दवा दी गई, देवस्थान जहां पूजा की जाती है, वहां बलात्कार हुआ, और फिर बुरी तरह मार दिया गया. इस अपराध की जघन्यता शब्दों से परे है और हम बहुत ही चिंतित हैं कि यह हर ओर सांप्रदायिक हिंसा फैलने का कारण बन सकता है. लेकिन हमारे प्रशासन की सख्ती ने इसकी अनुमति नहीं दी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘दुर्भाग्यवश, इस भयानक अपराध का राजनीतिकरण किया गया.’

उन्होंने कहा, ‘मैं केवल एक मुख्यमंत्री नहीं हूं जो इस प्रशासन की मुखिया है. मैं एक औरत भी हूं और दो लड़कियों की मां भी. मुझे उम्मीद थी कि विभिन्न वर्गीय और राजनीतिक विचारधाराओं के लोग इस घृणित कृत्य के खिलाफ एक साथ आ जाएंगे. मुझे उम्मीद थी कि हमारी मासूम बच्ची के साथ हुए इस घृणित अपराध से सभी को धक्का लगेगा, वे दुखी होंगे, पीड़िता के परिवार की सहायता के लिए एक साथ आगे आएंगे, उस दुखी मां के लिए रैलियां करेंगे जिसकी आठ साल की बच्ची को इतने क्रूर तरीके से उससे छीन लिया गया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन दुखद है कि इस घृणित अपराध का प्रयोग बांटने वाली राजनीति के तौर पर किया गया. पीड़िता के परिवार की सहायता करने के बजाय, एक पूजने के स्थान को अपवित्र करने पर गुस्सा होने के बजाय लोगों ने आरोपियों के समर्थन में रैलियां कीं, क्योंकि उन्होंने इसमें राजनीतिक फायदा देखा. यह बहुत ही नीचतापूर्ण है.’

मुफ्ती ने कहा कि वे इन बांटने वाली राजनीति के पीछे के कारणों को अच्छी तरह जानती हैं. उन्होंने कहा, ‘इसके पीछे कई कारण हैं. अब तक हीरानगर एक आरक्षित विधानसभा सीट रही है और ऐसी चर्चाएं हैं कि इसे अनारक्षित किया जा सकता है. इस राजनीति के पीछे का एक कारण यह भी है.’

उन्होंने कहा, ‘हम किसी को भी हमारी जम्मू कश्मीर पुलिस के अधिकारियों और जवानों पर सवाल करने की अनुमति इसलिए नहीं देंगे कि वे एक विशेष मत या धर्म से जुड़ाव रखते हैं. जो हमारी पुलिस पर सवाल उठाते हैं उन्हें जानने की जरूरत है कि जम्मू कश्मीर पुलिस एक संस्था है और सभी से ऊपर रहकर काम कर रही है. यह बांटने के उद्देश्य के साथ नहीं चल रही. वे अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं, उनके घरों पर हमले किए जा रहे हैं. और अब बताइए कैसे मैं उन्हें कह सकती हूं कि आप एक ऐसे मामले की जांच के लिए पर्याप्त विश्वास योग्य नहीं हैं, जहां आरोपी आपके ऊपर सवाल उठा रहे हैं.’

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