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कॉलेजियम सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पदोन्नति के लिए दोबारा करेगी सिफ़ारिश

कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि जोसेफ के नाम के साथ ही कुछ अन्य उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को भी पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफ़ारिश की जाएगी.

**FILE PHOTO** New Delhi: A file photo of Chief Justice of Uttarakhand High Court K M Joseph during the inauguration of the Joint Conference of Chief Ministers and Chief Justices at Vigyan Bhavan in New Delhi on Sunday, April 24, 2016. PTI Photo by Shahbaz Khan (PTI4_26_2018_000058B)

केएम जोसफ (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की दोबारा सिफारिश करने पर सिद्धांत रूप में शुक्रवार को सहमति हो गई. केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले महीने जस्टिस केएम जोसेफ को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की सिफ़ारिश कॉलेजियम को वापस लौटा दी थी.

जस्टिस जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही 2016 में कांग्रेस शासित उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले को निरस्त किया था. हालांकि, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई थी.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कॉलेजियम की करीब एक घंटे बैठक हुई. इस बैठक में कॉलेजियम के अन्य सदस्यों में जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस जोसेफ कुरियन शामिल हैं.

कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि जोसेफ के नाम के साथ ही कुछ अन्य उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को भी पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की जाएगी.

कॉलेजियम ने एक प्रस्ताव पारित करके कहा कि केंद्र को अन्य नाम भेजे जाने के मसले पर आगे विचार की आवश्यकता है और इसलिए उसकी बैठक 16 मई के लिए स्थगित कर दी गई.

प्रस्ताव में कहा गया, ‘प्रधान न्यायाधीश और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों में सिद्धांत रूप में यह सहमति बनी है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (मूल उच्च न्यायालय केरल ) केएम जोसेफ को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की दोबारा सिफारिश की जाना चाहिए.’

प्रस्ताव में आगे कहा गया, ‘हालांकि, यह दोहराते समय शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के नामों की भी साथ में सिफारिश की जानी चाहिए, जिसके लिए विस्तृत विचार की आवश्यकता है.’

इसमें कहा गया, ‘इस तथ्य के मद्देनजर, बैठक बुधवार, 16 मई, 2018 के लिए स्थगित की जाती है.’

प्रस्ताव में आगे कहा गया कि कॉलेजियम की बैठक में विचारणीय मुद्दों में जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश करने संबंधी 10 जनवरी के प्रस्ताव को फिर दोहराने और शीर्ष अदालत में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति के लिए उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के नामों पर विचार करना शामिल था.

कॉलेजियम की हुई बैठक की कार्यसूची दो मई वाली ही थी जिसमें जस्टिस जोसेफ के अलावा कलकत्ता, राजस्थान और तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों को पदोन्नित देकर शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने पर विचार करना था.

न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर ने नौ मई को प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर उनसे शीघ्र बैठक करके जस्टिस जोसेफ का नाम पुन: केंद्र को भेजने का अनुरोध किया था.

इसके बाद ही 10 मई को प्रधान न्यायाधीश ने कॉलेजियम की 11 मई के लिए बैठक निर्धारित की थी.

कॉलेजियम ने 10 जनवरी को जस्टिस जोसेफ और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश सरकार से की थी. लेकिन सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी देने के साथ ही 26 अप्रैल को जस्टिस जोसेफ की फाइल प्रधान न्यायाधीश को पुन: विचार के लिए लौटा दी थी. विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसके साथ प्रधान न्यायाधीश को पत्र भी लिखकर जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता सहित कई मुद्दे उठाए थे.

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