राजनीति

पालघर उपचुनाव: पूर्व भाजपा सांसद की पत्नी का आरोप, पार्टी पति की फोटो का ग़लत इस्तेमाल कर रही है

महाराष्ट्र के पालघर से भाजपा सांसद रहे चिंतामण वनगा की मौत के बाद ख़ाली हुई सीट पर 28 मई को है उपचुनाव. दिवंगत सांसद की शिवसेना में शामिल हुई पत्नी ने चुनाव आयोग से की भाजपा की शिकायत.

दिवंगत संसद चिंतामण वनगा

दिवंगत संसद चिंतामण वनगा

पालघर/मुंबई: महाराष्ट्र में पालघर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा के दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा की पत्नी ने भाजपा के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत की है. पत्नी जयश्री वनगा ने चुनाव आयोग से शिकायत कर कहा है कि भाजपा चुनाव प्रचार में बिना अनुमति उनके पति की तस्वीर का इस्तेमाल कर रही है.

भाजपा सांसद चिंतामण वनगा का 30 अप्रैल, 2018 को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.

एबीपी माझा की रिपोर्ट के अनुसार, चिंतामण वनगा के बेटे श्रीनिवास वनगा को शिवसेना ने अपना उम्मीदवार बनाया है. गौरतलब है कि चिंतामण की मौत के बाद टिकट न मिलने के चलते पत्नी जयश्री और दोनों बेटे शिवसेना में शामिल हो गए थे.

मालूम हो कि इस सीट को लेकर भाजपा और शिवसेना में ही घमासान मचा हुआ. भाजपा ने आरोप लगाया है कि दिवंगत सांसद के बेटे को शिवसेना से टिकट देकर भाजपा के साथ पार्टी ने विश्वासघात किया है. मुख्यमंत्री के इस बयान के शिवसेना ने भी भाजपा पर दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है.

जयश्री ने अपने शिकायत पत्र में कहा, ‘भाजपा के उम्मीदवार राजेंद्र गावित ने अपने प्रचार सामग्री (पोस्टर, बैनर और पर्चे) में कई जगह मेरे पति चिंतामण वनगा की तस्वीर का इस्तेमाल कर रहे हैं. तस्वीर के इस्तेमाल के लिए भाजपा ने परिवार के लोगों से कोई अनुमति नहीं ली है. यह आचार संहिता का उल्लंघन है और इसके लिए भाजपा पर कार्रवाई होनी चाहिए.’

जयश्री ने आगे कहा कि भाजपा वोटों की भीख के लिए इस तरह का निंदनीय कार्य कर रही है. वो आगे कहती हैं, ‘भाजपा की तरफ से किसी भी प्रचार सामग्री पर मेरे पति की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए अगर ऐसा हुआ तो मुझे अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा.’

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना में शामिल होते समय जयश्री वनगा का कहना था, ‘उन्होंने 35 साल भाजपा को दिए और आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार किया. भाजपा ने हमें छोड़ दिया. हमनें मुख्यमंत्री फड़णवीस और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने के वक्त मांगा था, लेकिन उन्होंने वक्त नहीं दिया. यह हमारे साथ अन्याय है.’

वनगा भाजपा के ठाणे जिला के 1990-1996 तक जिला अध्यक्ष भी रहे थे और पालघर के आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार में उनकी अहम भूमिका थी. वनगा 1996 में पहली बार दहानू से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. 1999 में वे फिर से दहानू लोकसभा सीट से सांसद चुने गए.

2009 में चिंतामण विक्रमगढ़ विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव जीतकर महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे. 2009 में ही हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पालघर लोकसभा से उम्मीदवार बनाया, लेकिन महज 13,000 वोटों से वे बहुजन विकास अघाड़ी के उम्मीदवार बलिराम जाधव से हार गए.

2014 में भाजपा ने चिंतामण को दोबारा पालघर से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था. तब उन्होंने बहुजन विकास अघाड़ी के उम्मीदवार बलिराम जाधव को लगभग 1,40,000 वोटों से हराकर तीसरी बार लोकसभा पहुंचे.

महाराष्ट्र में 28 मई को पालघर के अलावा नागपुर के भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है. यहां से भाजपा सांसद नाना पटोले ने कुछ महीनों पहले भाजपा को किसान और पिछड़ा विरोधी बताकर इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिस वजह से यह सीट ख़ाली हो गई थी. 31 मार्च को दोनों सीटों के परिणाम घोषित होंगे.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने शिवसेना पर विश्वासघात का लगाया आरोप

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने आरोप लगाया है कि पालघर लोकसभा सीट से दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा के बेटे को उतारकर शिवसेना ने भाजपा के साथ विश्वासघात किया है. पालघर लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव 28 मई को होना है.

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि शिवसेना जानती थी कि भाजपा उपचुनाव के लिए पहले से ही वनगा के परिवार से किसी सदस्य को उतारने की योजना बना रही है.

भाजपा के साथ वनगा के जुड़ाव की प्रशंसा करते हुए फड़णवीस ने कहा कि दिवंगत नेता पार्टी की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते थे.

अपनी गठबंधन सहयोगी भाजपा को झटका देते हुए शिवसेना ने पालघर सीट से सांसद चिंतामण वनगा के निधन के बाद हो रहे उपचुनाव के लिए उनके बेटे श्रीनिवास वांगा को उप चुनाव में मैदान में उतारा है.

ज़िले में एक रैली में फड़णवीस ने कहा कि उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को बताया था कि भाजपा उपचुनाव में चिंतामण वनगा के परिवार के किसी सदस्य को टिकट देने की योजना बना रही है.

पालघर के नालासोपारा इलाके में 20 मई की रात एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एक तरफ तो हमारी गठबंधन सहयोगी वनगा परिवार के किसी सदस्य को टिकट देने के निर्णय का स्वागत करती है और दूसरी ओर षड्यंत्र रचती है.’

चिंतामण वनगा की पत्नी ने 20 मई को भाजपा के ख़िलाफ़ चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन करने की शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा आगामी उपचुनाव के लिए प्रचार सामग्रियों पर उनके पति की तस्वीरों का इस्तेमाल कर रही है.

इस पर फड़णवीस ने कहा कि केवल भाजपा को ही दिवंगत नेता की तस्वीरों का इस्तेमाल करने का अधिकार है.

शिवसेना ने भी भाजपा पर अपने दिवंगत सांसद के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया

शिवसेना ने मंगलवार को भाजपा पर पालघर के अपने दिवंगत सांसद चिंतामन वनगा के परिवार से मुंह मोड़ने और कांग्रेस से आये व्यक्ति को उपचुनाव में लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाकर उनके साथ ‘विश्वासघात’ करने का आरोप लगाया.

शिवसेना ने दावा किया कि भाजपा ने वनगा के परिवार की सुध नहीं ली और इस साल नई दिल्ली में उनके निधन के बाद सांसद को अंतिम विदाई देने के लिए उसका कोई भी केंद्री नेता नहीं आया.

शिवसेना का यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के आरोप के लगाने के दो दिन बाद आया है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि शिवसेना ने पालघर उपचुनाव में वनगा के बेटे को उतार कर भाजपा के साथ ‘विश्वासघात’ किया है.

इस उपचुनाव के लिए भाजपा ने कांग्रेस से आए राजेंद्र गावित को अपना उम्मीदवार बनाया है.

शिवसेना में अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में गावित की तस्वीर के साथ लिखा है, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने लोकतांत्रिक रूप से विधायकों को खरीदने और उनके साथ भागने का अधिकार जीत लिया है, जैसा कर्नाटक में स्पष्ट देखने को मिला.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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