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केरल के कोझीकोड में निपाह वायरस से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

आठ लोगों को निगरानी में रखा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित डॉक्टरों का उच्च स्तरीय दल केरल पहुंचा. निपाह वायरस के स्वाभाविक वाहक चमगादड़ हैं.

Kozhikode: Doctors wear safety masks as a precaution after the outbreak of 'Nipah' virus, at a hospital in Kozhikode, on Monday. (PTI Photo)(PTI5_21_2018_000161B)

केरल के कोझीकोड ज़िले में निपाह वायरस फैलने की पुष्टि के बाद एक अस्पताल में सेफ्टी मास्क पहने हुए डॉक्टर. (फोटो: पीटीआई)

कोझीकोड/नई दिल्ली: केरल के कोझीकोड ज़िले में निपाह वायरस से अब तक तीन लोगों की मौत हो गई है और एक व्यक्ति का इलाज चल रहा है जबकि आठ अन्य लोगों को निगरानी में रखा गया है.

इसके बाद मामले की जांच के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित डॉक्टरों का उच्च स्तरीय दल केरल पहुंच गया है.

राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने सोमवार को समाचार एजेंसी भाषा/पीटीआई को बताया कि पिछले एक पखवाड़े में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, वे एक ही परिवार के हैं. इनमें से दो भाई थे और उनकी आयु 20 साल से अधिक थी. जिस व्यक्ति का इलाज चल रहा है वह वायरस से मरने वाले दोनों भाइयों के पिता हैं.

द न्यूज़ मिनट से बातचीत में केरल स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. आरएल सरिता ने कहा, ‘पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने वायरस की पुष्टि की है. हमने उन्हें चार सैंपल भेजा था, उनमें से तीन में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है.’

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो हफ़्तों में कोझीकोड ज़िले के चंगरोथ पंचायत में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई. वलाचुकेट्टी मूसा के दो बेटे 26 वर्षीय मोहम्मद सादिक और 28 वर्षीय मोहम्मद सलीह की मौत क्रमश: पांच मई और 18 मई को हो गई.

रिपोर्ट के अनुसार, मूसा के भाई की 50 वर्षीय पत्नी मरियम 19 मई को हो गई. अब 62 वर्षीय मूसा और उनके बेटे मोहम्मद सलीह की 19 वर्षीय मंगेतर आतिफा की स्थिति काफी गंभीर है. दोनों का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार बीते 20 मई को कोझीकोड में दो और लोगों की मौत हुई है. ज़िला चिकित्सा अधिकारी वी. जयश्री ने बताया की मृतकों की पहचान कूट्टालीडा के इस्माइल और कोलाथुर के वेलायुधान के रूप में हुई. अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि उनकी मौत निपाह वायरस से हुई है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है. नौ लोगों का इलाज किया जा रहा है. छह लोगों का इलाज कोझीकोड के मेडिकल कॉलेज में हुआ था, जबकि एक का इलाज कोझीकोड और एक अन्य का इलाज कोच्ची के निजी अस्पतालों में चल रहा है.

वहीं समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक तेज़ बुखार की वजह से कोझीकोड ज़िले में नौ लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से दो लोग निपाह वायरस से पीड़ित थे. दूसरे मारे गए लोगों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है. ज़िलाधिकारी यूवी जोश के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है.

निपाह वायरस पशुओं से मनुष्य में फैलता है. इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं.

इस विषाणु के स्वाभाविक वाहक फ्रूट बैट (चमगादड़) हैं.

राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि एक चमगादड़ मृतकों के घर के कुएं में पाया गया था. उसे अब बंद कर दिया गया है.

इन लोगों का इलाज करने वाली एक नर्सिंग सहायक लिनी की सोमवार सुबह मौत हो गई. हालांकि, इस बात की पुष्टि होनी अभी बाकी है कि क्या वह विषाणु से संक्रमित थी.

पांच और लोगों की यहां और पड़ोसी मलप्पुरम ज़िले में तेज़ बुखार और विषाणु के अन्य समान लक्षणों से मौत हो चुकी है.

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने हालांकि बताया कि अभी इस बात की पुष्टि होनी बाकी है कि क्या ये मौतें विषाणु की वजह से हुईं.

स्वास्थ्य मंत्री शैलजा और श्रम मंत्री टीपी रामकृष्णन ने अधिकारियों के साथ चर्चा की और आश्वासन दिया कि सरकार ने विषाणु के प्रसार को रोकने के लिये सभी ज़रूरी क़दम उठाए हैं. राज्य पहली बार इस विषाणु से प्रभावित हुआ है.

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र का एक उच्चस्तरीय दल पहले ही हालात का जायज़ा लेने के लिए कोझीकोड ज़िले में पहुंच गया है.

राज्य को हाई अलर्ट पर रखा गया है और यहां दो नियंत्रण कक्ष खोले गए हैं.

मंत्री ने कहा कि डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह विषाणु संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है.

उन्होंने कहा, ‘हमने उन लोगों की सूची बनाई है जो उन मरीज़ों के संपर्क में आए थे. एहतियाती उपाय के तौर पर उन्हें अलग कर दिया गया है.’

मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के आसपास के अस्पतालों से विशेष वार्ड स्थापित करने को कहा गया है और अगर मरीज़ों में विषाणु के लक्षण हों तो उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजने का निर्देश दिया गया है.

उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक के नेतृत्व में एक मल्टी डिसिप्लीनरी टीम का गठन किया है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सकों के एक उच्चस्तरीय दल के गठन का निर्देश दिया है और चुनी हुई टीम केरल पहुंच गई है. इस बात का संदेह है कि चमगादड़ से विषाणु का प्रसार हो रहा है.’

अधिकारी ने कहा, ‘टीम में पशुपालन, राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद समेत अन्य संस्थानों के अधिकारी शामिल हैं. मंत्रालय हालात की निगरानी के लिए केरल के स्वास्थ्य विभाग के साथ क़रीबी संपर्क में हैं.’

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस से मनुष्य में कई बिना लक्षण वाले संक्रमण से लेकर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और प्राणघातक इंसेफलाइटिस तक हो सकता है.

डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट के अनुसार, एनआईवी (निपाह वायरस) से सुअरों और अन्य घरेलू जानवरों में भी बीमारी हो सकती है. अभी न तो मनुष्य और न ही पशुओं के उपचार के लिए इसका टीका विकसित हुआ है. मनुष्य के मामलों में इसका प्राथमिक उपचार इंटेंसिव सपोर्टिव केयर (सघन सहायक देखभाल) के ज़रिये किया जा सकता है.

निपाह वायरस (एनआईवी) की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया के कामपुंग सुंगई निपाह में बीमारी के फैलने के दौरान हुई थी. उस समय सूअर इसके वाहक थे.

हालांकि, बाद में एनआईवी के प्रसार में बीच का कोई वाहक नहीं था.

बांग्लादेश में 2004 में इस विषाणु का मनुष्य में संक्रमण हुआ था. यह विषाणु संक्रमित चमगादड़ से दूषित, खजूर का रस पीने से फैला था.

केरल में दुर्लभ विषाणु से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

केरल के कोझिकोड ज़िले में पिछले दो हफ्ते में कथित रूप से ‘निपाह’ नामक एक विषाणु एक ही परिवार के तीन व्यक्तियों की मौत के बाद राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग सावधान हो गया है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोझिकोड के ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता में ज़िलास्तरीय एक विशेष कार्यबल बनाया गया है. स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. आरएल सरिता ने इस बैठक के बाद विशेष कार्यबल के गठन का फैसला किया. किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आपात उपचार की निगरानी के लिए एकल खिड़की व्यवस्था की गई है.

इससे पहले लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने केरल के कोझिकोड ज़िले में एक विषाणु के प्रकोप को रोकने के लिए केंद्र की मदद मांगी थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में रामचंद्रन ने कहा कि उनके लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वताकरा में कुट्टियाडी तथा पेरम्ब्रा सहित कुछ पंचायत क्षेत्र ‘घातक विषाणु’ की चपेट में हैं.

सांसद ने पत्र की एक प्रति यहां प्रेस को भी उपलब्ध कराई.

उन्होंने कहा कि कुछ चिकित्सकों ने इसे निपाह नामक विषाणु बताया है, जबकि अन्य ने इसे जूनोटकि विषाणु बताया है जो तेज़ी से फैलता है.

इस बीच, दिल्ली से प्राप्त ख़बर के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक को राज्य सरकार की सहायता करने के लिए केरल के कोझिकोड़ की यात्रा करने का निर्देश दिया.

मंत्री के निर्देश पर एक केंद्रीय टीम केरल जाएगी. नड्डा ने ट्वीट कर कहा कि उन्होंने स्थिति की समीक्षा की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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