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कर्नाटक फ्लोर टेस्ट: भाजपा के सुरेश ने नाम वापस​ लिया, कांग्रेस के रमेश स्पीकर चुने गए

कर्नाटक में बहुमत परीक्षण पर बोले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी-कोई तनाव नहीं, स्पष्ट रूप से जीतने जा रहा हूं.

Bengaluru: JD(S) leader HD Kumaraswamy and party MLAs show victory sign to celebrate after chief minister BS Yediyurappa announced his resignation before the floor test, at Vidhana Soudha, in Bengaluru, on Saturday. Supreme Court had ordered Karnataka BJP Government to prove their majority in a floor test at the Assembly .(PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI5_19_2018_000111B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी शुक्रवार को बहुमत परीक्षण का सामना करेंगे और ऐसी उम्मीद है कि राज्य में दस दिनों की राजनीतिक अस्थिरता का अंत हो जाएगा.

शुक्रवार को बहुमत परीक्षण के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा, मुझे कोई टेंशन नहीं. मैं बहुमत परीक्षण जीतने जा रहा हूं.


वहीं, शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामाकंन वापस लिया. कांग्रेस के केआर रमेश कुमार सर्वसम्मति से कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए.

बीएस येदियुरप्पा ने कहा, विधानसभा अध्यक्ष पद की मर्यादा बनी रहे और विधानसभा अध्यक्ष बिना किसी चुनौती के जीते, इसके लिए हमने अपने प्रत्याशी को वापस ले लिया.

गौरतलब है कि जेडीएस-कांग्रेस-बसपा गठबंधन के नेता कुमारस्वामी ने बुधवार को विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं की मौजदूगी में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. कांग्रेस के 78 विधायक हैं जबकि कुमारस्वामी की जेडीएस के 36 और बसपा का एक विधायक हैं. गठबंधन ने केपीजेपी के एकमात्र विधायक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन का भी दावा किया है. कुमारस्वामी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी.

भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी. शपथ लेने के बाद कुमारस्वामी ने विश्वास मत हासिल किये जाने के बारे में विश्वास जताया था लेकिन उन्होंने आशंका भी जताई थीं कि उनकी सरकार को गिराने के लिए भाजपा ‘ऑपरेशन कमल’ दोहराने का प्रयास कर सकती है.

‘आपरेशन कमल’ या ‘ऑपरेशन लोटस’ नाम के शब्द 2008 में उस वक्त इस्तेमाल किए गए थे जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद संभाला था. पार्टी को साधारण बहुमत के लिए तीन विधायकों की दरकार थी. ‘ऑपरेशन कमल’ के तहत कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों को भाजपा में शामिल होने के लिए राजी किया गया था.

उनसे कहा गया था कि वे विधानसभा की अपनी सदस्यता छोड़कर फिर से चुनाव लड़ें. उनके इस्तीफे की वजह से विश्वास मत के दौरान जीत के लिए जरूरी संख्या कम हो गई थी और फिर येदियुरप्पा विश्वास मत जीत गए थे.

इससे पहले भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए अपने वरिष्ठ नेता और पांच बार के विधायक एस सुरेश कुमार को उतारा था. कांग्रेस के रमेश कुमार ने सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में इस पद के लिए अपना नामांकन भरा. भाजपा उम्मीदवार ने कहा था, ‘संख्या बल और कई अन्य कारकों के आधार पर हमारी पार्टी के नेताओं को विश्वास है कि मैं जीतूंगा. इसी विश्वास के साथ मैंने नामांकन दाखिल किया है.’

यह पूछने पर कि भाजपा के केवल 104 विधायक हैं तो ऐसे में उनके जीतने की संभावना क्या है, सुरेश कुमार ने कहा था, ‘मैंने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. शुक्रवार को दोपहर सवा बारह बजे चुनाव है. चुनाव के बाद आपको पता चल जाएगा.’

कांग्रेस विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गठबंधन उम्मीदवार की जीत के बारे में विश्वास जताया था. उन्होंने कहा, ‘मुझे पता चला है कि भाजपा ने भी नामांकन दाखिल किया है. मुझे उम्मीद है वे नामांकन वापस ले लेंगे. यदि चुनाव होता है तो रमेश कुमार की जीत निश्चित है.’

हालांकि कुमारस्वामी के विश्वास मत हासिल करने की संभावना है और उनके लिए मंत्रिमंडल का विस्तार मुश्किल साबित होने वाला है. ऐसा बताया जा रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री पद के लिए उनकी अनदेखी किए जाने से खुश नहीं है. पार्टी ने दलित चेहरा जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया है.

शिवकुमार ने कहा था, ‘क्या यह उन लोगों के लिए एक समान है जो एक सीट जीतते है और या जो राज्य जीतते है.मैं संन्यास लेने के लिए राजनीति में नहीं आया हूं. मैं शतरंज खेलूंगा फुटबाल नहीं.’

कुमारस्वामी को 5 साल के लिए सीएम बनाए जाने की चर्चा नहीं हुई है: जी परमेश्वर

वहीं, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन ने एचडी कुमारस्वामी के पूरे पांच साल मुख्यमंत्री बने रहने के तौर-तरीकों पर अब तक चर्चा नहीं की है. यह पूछे जाने पर कि क्या कुमारस्वामी पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे तो परमेश्वर ने कहा, ‘हमने उन तौर-तरीकों पर अब तक चर्चा नहीं की है.’

उन्होंने संवाददाताओं से यहां बातचीत में कहा, ‘अभी इस बात पर फैसला किया जाना भी बाकी है कि कौन से विभाग उन्हें दिये जाएंगे और कौन हम लोगों के पास रहेगा. उन्हें पांच साल रहना चाहिये या हमें भी मिलेगा. उन तमाम विषयों पर हमने अब तक चर्चा नहीं की है.’

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री का पद जेडीएस को पूरे पांच साल के लिए देने को लेकर कांग्रेस संतुष्ट है तो परमेश्वर ने कहा, ‘चर्चा के बाद- नफा और नुकसान को देखते हुए हम फैसला करेंगे- हमारा मुख्य ध्येय अच्छा प्रशासन देना है.’

शपथ ग्रहण से पहले कुमारस्वामी ने उन खबरों को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि उनकी पार्टी अपने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के साथ 30-30 माह के लिये सरकार का नेतृत्व करने के फार्मूले पर काम कर रही है. कुमारस्वामी ने कहा था, ‘इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है.’

यह पूछे जाने पर कि उप मुख्यमंत्री पद के लिये पार्टी की पसंद और विभागों से संबंधित मुद्दों पर कांग्रेस के कई नेताओं के नाखुश होने के बारे में पूछे जाने पर परमेश्वर ने कहा कि किसी ने भी उनसे या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से कोई पद नहीं मांगा है. परमेश्वर केपीसीसी के भी अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा, ‘मैंने इस बारे में सिर्फ मीडिया में खबरें देखी हैं.’

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जी परमेश्वर (फाइल फोटो: पीटीआई)

नेताओं के बीच किसी भी तरह के मतभेद से इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि पद मांगने में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में कई नेता हैं जो उप मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री बनने में सक्षम हैं-यह कांग्रेस पार्टी की ताकत है.’ उन्होंने कहा, ‘जब हम गठबंधन सरकार में हैं तो इस बात का फैसला कांग्रेस आला कमान को करना है कि इस स्थिति में किसे कौन सा पद दिया जाए.’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार के नाखुश होने और कुछ विधायकों के साथ अलग से बैठक करने के बारे में पूछे जाने पर परमेश्वर ने कहा, ‘सभी विधायक साथ हैं और हम शक्ति परीक्षण में सफल होंगे.’ उन्होंने कहा, ‘चर्चा, समूह बैठक हुई हो या नहीं, लेकिन तथ्य यह है कि हम एकजुट हैं. मैं सिर्फ यही कह सकता हूं.’ खबरों में कहा जा रहा है कि शिवकुमार पार्टी नेतृत्व से नाखुश हैं. वह भी उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार थे.

शिवकुमार ने येदियुरप्पा सरकार के विश्वास मत से पहले पार्टी के विधायकों को साथ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह कथित तौर पर उप मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने से नाखुश हैं. शिवकुमार को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग पर उन्होंने कहा, ‘यह खुशी की बात है कि वह अध्यक्ष बनेंगे क्योंकि कोई अनुभवी नेता पार्टी की अगुवाई करेगा.’

यह पूछे जाने पर कि क्या कोई और नेता उनके साथ उपमुख्यमंत्री बनेगा तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. परमेश्वर ने कहा कि शक्ति परीक्षण के बाद कांग्रेस और जेडीएस के नेता साथ मिलकर समन्वय समिति के बारे में फैसला करेंगे. उन्होंने कहा, ‘साथ ही हम न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार करने के लिये एक पैनल बनाएंगे.’

उन्होंने दावा कि चुनाव में पार्टी की हार नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मत प्रतिशत भाजपा से अधिक था. परमेश्वर ने कहा कि एक समिति का गठन किया जाएगा जो पूरे राज्य में घूमकर पार्टी की हार के कारणों का पता लगाएगी. हालांकि , उन्होंने कुछ क्षेत्रों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिये ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया.

परमेश्वर ने कहा कि इस बात की संभावना हो सकती है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई हो. उन्होंने कहा कि पार्टी को सूचना मिली है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में जहां 70-80 फीसदी मतदाता कांग्रेस के हैं, वहां भी भाजपा को सर्वाधिक बढ़त हासिल हुई. उन्होंने कहा, ‘इसलिये ईवीएम में छेड़छाड़ का संदेह है.’

उन्होंने कहा कि वह इस बात की शिकायत नहीं कर रहे हैं कि सभी 222 विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम में छेड़छाड़ हुई. यह कहे जाने पर कि उनकी पार्टी ने 12 मई का चुनाव ईवीएम की जगह मत पत्रों से कराने की मांग की थी तो इसपर परमेश्वर ने कहा , ‘आने वाले दिनों में हम मत पत्रों से चुनाव कराने की मांग करेंगे और हम ईवीएम नहीं चाहते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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