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कश्मीरी को मानव ढाल के तौर पर घुमाने वाले मेजर गोगोई को लेकर फिर हुआ विवाद

मेजर लीतुल गोगोई एक लड़की के साथ श्रीनगर के होटल में पहुंचे थे, जहां स्टाफ द्वारा लड़की को साथ रुकने की अनुमति न देने पर गोगोई का होटलकर्मियों से विवाद हुआ. गोगोई को पुलिस ने गिरफ़्तार कर पूछताछ के बाद उन्हें उनकी यूनिट के हवाले कर दिया.

Leetul Farook

मेजर लीतुल गोगोई (बाएं) फ़ारूक़ अहमद डार (दाएं)

श्रीनगर: पिछले साल एक आम कश्मीरी नागरिक को मानव ढाल के तौर पर अपने जीप के बोनट से बांधकर घुमाने के कारण विवादों में रहे सेना के मेजर नितिन लीतुल गोगोई को बुधवार को पुलिस ने एक युवती और उनके ड्राइवर के साथ हिरासत में ले लिया.

लीतुल गोगोई को होटल मैनेजर ने एक युवती के साथ उनके द्वारा बुक कराए गए कमरे में घुसने नहीं दिया. इससे पहले वहां मेजर के ड्राइवर और होटल के कर्मचारियों के बीच झगड़ा हो गया, जिसमें बाद में गोगोई खुद शामिल हो गए. मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस गोगोई, उनके ड्राइवर और युवती को पूछताछ के लिए खनयार पुलिस स्टेशन लेकर गयी.

हालांकि, पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया, लेकिन इसने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. गोगोई को वापस होटल जाने की इजाजत नहीं दी गयी और उन्हें उनकी यूनिट को सौंप दिया गया.

क्या है मामला

सेना के इस मेजर ने एक ऑनलाइन सर्विस का इस्तेमाल करते हुए उसी दिन अपने नाम से होटल में कमरा बुक कराया था. यह बुकिंग दो मेहमानों के लिए एक रात ठहरने के लिए थी. अपनी बुकिंग में उन्होंने अपने पहुंचने का समय 11 बजे सुबह बताया था.

होटल के एक मैनेजर में द वायर  को बताया कि सुबह करीब 9:30 बजे गोगोई ने होटल मैनेजमेंट को फोन करके यह सूचना दी थी कि वे थोड़ा पहले चेक-इन करना चाहते हैं. वे होटल के फ्रंट डेस्क पर 10:30 बजे सुबह में पहुंच गए. उन्होंने एक नीली टोपी पहन रखी थी. (देखें जिफ)

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होटल के कर्मचारी ने बताया कि जब रिसेप्शनिस्ट ने उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए कहा, तो उन्होंने सेना का अपना परिचय-पत्र न देकर अपना ड्राइविंग लाइसेंस निकाल करके दिखाया.

मैनेजर के मुताबिक, ‘उनके साथ एक लड़की थी. उन्होंने (गोगोई ने) बताया कि वह उनके साथ है. लेकिन, जब हमने उसका परिचय-पत्र मांगा, तो हमने पाया कि वह बडगाम की है. इससे हमें शक हुआ और हमने बुकिंग रद्द करके उनसे विनम्रता के साथ वहां से चले जाने के लिए कहा. हमने उन्हें बताया कि हमारा नियम ऐसे मेहमानों को एक साथ ठहरने देने की इजाजत नहीं देता है, जिनके बीच नातेदारी न हो.’

वे बताते हैं कि शुरू में गोगोई यह कहते हुए जाने के लिए तैयार नहीं हुए कि उन्हें होटल में कमरे में ठहरने का पूरा अधिकार है. लेकिन कहासुनी के बाद वे वहां से जाने के लिए तैयार हो गए. गोगोई और उस लड़की को सादी पोशाक पहने एक नौजवान ने होटल में छोड़ा था. होटल के कर्मचारियों का कहना है कि वह बाहर उनका इंतजार कर रहा था.

मैनेजर का कहना है, ‘होटल से बाहर निकलते वक्त वे (गोगोई) ड्राइवर पर चिल्लाए कि होटल के कर्मचारियों ने उनके साथ बदसलूकी की है. इस पर गाड़ी में बैठा व्यक्ति बाहर आ गया और उसने होटल के गेस्ट-रिलेशन मैनेजर के साथ हाथापाई की. मामला तब तनावपूर्ण हो गया जब हमारे मेहमानों को लेने के लिए आए कुछ गाड़ियों के ड्राइवरों ने उस आदमी को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी. इसके बाद गोगोई, उनके ड्राइवर और होटल कर्मचारी के बीच झगड़ा हो गया.’

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मेजर गोगोई द्वारा की गई होटल बुकिंग की डिटेल्स

हालात को बिगड़ते देखकर होटल के मैनेजमेंट ने पुलिस को बुला लिया और तीनों- गोगोई, लड़की और उन्हें गाड़ी से वहां पहुंचाने वाले शख्स, को सुबह 11 बजे के करीब, नीचे शहर में खनयार पुलिस स्टेशन ले जाया गया.

एक स्थानीय युवक, जिसने अपना नाम जावेद अहमद बताया, का कहना है कि किसी को यह अनुमान नहीं था कि होटल में आया मेहमान वही व्यक्ति है, जिसने मानव ढाल वाली घटना को अंजाम दिया था. अहमद बताते हैं, ‘(पुलिस द्वारा उसे अपने साथ ले जाने के बाद ही) हमें यह पता चला कि वह मेजर गोगोई है.’

पुलिस का पक्ष

इस घटना पर अभी तक सेना की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. अपने बयान में पुलिस ने भी मेजर गोगोई या उस लड़की की पहचान नहीं की है, लेकिन उनके साथ आए नौजवान की पहचान समीर अहमद के तौर पर की है.

पुलिस के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि ‘यह जानकारी मिली है कि एक औरत और एक व्यक्ति, जिसका नाम समीर अहमद है और जो बडगाम का रहनेवाला है, किसी व्यक्ति से मिलने के लिए आए थे. यह पता चला है कि वह औरत एक सेना के अधिकारी से मिलने आयी थी. सेना के अधिकारी की पहचान और उसके बारे में जानकारी पुलिस ने जमा कर ली है.’

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि समीर भी सेना में काम करता है. ‘वे (गोगोई और समीर) शायद एक ही यूनिट में हैं.’ साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों को बाद में सेना को सौंप दिया गया. उस लड़की को भी उसका बयान लेने के बाद उसके परिजनों को सौंप दिया गया.

हालांकि, लड़की की उम्र को लेकर विरोधाभासी जानकारियां सामने आयी हैं. होटल के मैनेजर ने द वायर  को बताया कि उसके आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 1999 दर्ज थी. लेकिन, कुछ खबरों में उसे नाबालिग बताया गया. पुलिस का कहना है कि वह 18 साल से ज्यादा उम्र की थी.

बुधवार को देर दोपहर में कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एसपी पाणी ने इस मामले मे जांच के आदेश दिए. पुलिस अधीक्षक (नॉर्थ ज़ोन श्रीनगर) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है.

कौन हैं गोगोई?

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के बीरवाह में सेना के 53 आरआर में तैनात गोगोई पिछले साल तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 9 अप्रैल, 2017 को जिले के चिल-ब्रास गांव के निवासी फ़ारूक़ अहमद डार को सेना की जीप पर बांधा था.

यह घटना श्रीनगर-बडगाम लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव के दिन की है. गोगोई ने डार को इस तरह से जीप से बांध कर करीब पांच घंटे तक कई गांवों में घुमाया. उन्होंने ऐसा कश्मीरियों को यह चेतावनी देने के लिए किया कि सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने वालों का यही अंजाम होगा.

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फोटो साभार: ट्विटर

शॉल बुनने का काम करने वाले डार दरअसल वोट देने वाले चंद गांव वालों में शामिल थे. गौरतलब है कि इस चुनाव में महज 7 फीसदी मत पड़े थे जो इस क्षेत्र के लिए अब तक सबसे कम है. इस दिन गुस्साई हुई भीड़ ने कुछ मतदान केंद्रों पर हमला करने की कोशिश भी की, जिसमें सुरक्षा बलों की गोलीबारी में आठ नागरिक मारे गए थे.

डार के साथ हुए बर्ताव पर दुनिया भर से कड़ी प्रतिक्रियाएं आयीं, मगर सेना ने यह कहकर इस कदम का बचाव किया कि बडगाम का युवक ‘पत्थर फेंकनेवाली भीड़ को भड़का रहा था’ और ‘वह शायद उनका नेता था’.

29 मई को सेना अध्यक्ष बिपिन रावत ने यह कहकर डार के मानव कवच के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का बचाव किया था कि सेना जम्मू और कश्मीर में एक ‘गंदा युद्ध’ लड़ रही है, जिसे नये तरीकों से लड़े जाने की जरूरत है. बाद में उन्होंने मेजर गोगोई को उग्रवाद विरोधी कार्रवाइयों में उनके योगदान के लिए सेना प्रमुख के प्रशंसा मेडल से सम्मानित भी किया था.

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