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स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करें मीडिया संस्थान: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने हाल ही में कई पत्रकारों पर हमले की धमकियों और सोशल मीडिया पर उनके लिए अपशब्दों के इस्तेमाल की पुरजोर निंदा की है.

फोटो: (Cobrapost.com)

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नई दिल्ली: विभिन्न मीडिया संस्थानों के संपादकों के संगठन ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने हाल ही में सामने आये एक स्टिंग आपरेशन पर चिंता व्यक्त करते हुए इसमें दिखाई देने वाली कथित अनुचित बातचीत के लिए मीडिया संस्थानों से अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है.

इसके साथ ही गिल्ड ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में 2002 में उसके द्वारा अपनाई गई और बाद में 2007 में संशोधित हुई ‘कोड ऑफ प्रैक्टिस फॉर जर्नलिस्ट्स’ की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है.

गिल्ड ने कहा कि वह इस संहिता में रेखांकित इन दिशानिर्देशों पर कायम है. अगर स्टिंग करने हैं तो इन नियमों के अनुसार जायज होने चाहिए जिनमें चीजों को पूरी तरह सामने लाने और निष्पक्षता के बुनियादी पत्रकारीय सिद्धांतों का पालन किया गया हो.

संगठन ने कोबरापोस्ट के हाल ही में सामने आये स्टिंग के संबंध में बयान में कहा कि वह ‘इस स्टिंग आॅपरेशन की सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकता लेकिन उन मीडिया संस्थानों से अपने पाठकों और आम जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह करता है जिनके प्रतिनिधि कथित रूप से अनुचित बातचीत करते कैमरे में कैद हुए. कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा पैसों के लिए संपादकीय विषयवस्तु  बेचने को तैयार दिखने के विषय पर उन्हें जरूर ध्यान देना चाहिए.’

गौरतलब है कि कोबरापोस्ट के ‘ऑपरेशन 136’ में देश के कई नामचीन मीडिया संस्थान सत्ताधारी दल के लिए चुनावी हवा तैयार करने को राजी होते नजर आए थे.

एक अन्य बयान में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने हाल ही में कई पत्रकारों पर हमलों की धमकियों और सोशल मीडिया पर उनके लिए अपशब्दों के इस्तेमाल की पुरजोर निंदा की. इसके अनुसार , ‘गिल्ड केंद्र और राज्यों की सरकारों से अनुरोध करता है कि जिन पत्रकारों को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी मिली है, उन्हें तुरंत सुरक्षा प्रदान की जाए और ऐसी धमकी देने वालों पर मामले दर्ज किए जाए. सरकार को इन पीड़ितों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई शुरू करनी चाहिए.’

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ) 

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