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अब चुनाव में हिंदू-मुस्लिम नहीं होने देंगे, भाजपा के प्रयासों को विफल करेंगे: जयंत चौधरी

राष्ट्रीय लोक दल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि उपचुनाव के नतीजों ने लोगों को एक संभावित विकल्प दिखाया है. लोगों को लगता था कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ‘चाणक्य नीति’ का सामना कोई नहीं कर सकता है.

जयंत चौधरी (फोटो: फेसबुक/जयंत चौधरी)

जयंत चौधरी (फोटो: फेसबुक/जयंत चौधरी)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश के कैराना एवं नूरपुर में साझा विपक्षी उम्मीदवारों की जीत को विपक्ष की एकजुटता के लिए जनता का संदेश करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावों को ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ करने के प्रयास को सामाजिक गठजोड़ के जरिए विफल करेगी. साथ ही उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह क्षेत्रीय दलों के प्रभुत्व वाले राज्यों में सहयोगी की भूमिका निभाए.

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व का फैसला संख्या के आधार पर और सामूहिक रूप से विचार-विमर्श के बाद होगा.

चौधरी ने कहा, ‘हालिया उपचुनावों में जनता ने साफ संदेश दिया है कि सभी पार्टियां एकजुट हों. मुझे लगता है कि विपक्ष में अनुभवी लोग हैं और उनको पता चल गया है कि जनता क्या चाहती है.’

उन्होंने कहा, ‘जिसे अपना राजनीतिक दायरा बनाना है और बरकरार रखना है, उसे इस गठजोड़ में आना होगा. दूसरा कोई रास्ता नहीं है.’

गौरतलब है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में विपक्ष समर्थित रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन और नूरपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के नईमुल हसन ने जीत हासिल की थी.

अगले लोकसभा चुनाव के संभावित गठबंधन के नेता के बारे में पूछे जाने पर चौधरी ने कहा, ‘यह फैसला संख्या के आधार पर होगा, लेकिन विपक्ष के सभी अनुभवी नेता मिलकर इस पर फैसला करेंगे.’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व करने की संभावना को लेकर रालोद नेता ने कहा, ‘मैंने उनके साथ काम किया है. उनको राजनीति का लंबा अनुभव हो चुका है. पहले कांग्रेस को तय करना है और फिर विपक्षी दल के नेता मिलकर तय करेंगे.’

उन्होंने भाजपा पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाया और कहा, ‘अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावों में हिंदू बनाम मुस्लिम नहीं होने दिया जाएगा. भाजपा के प्रयासों को सामाजिक गठजोड़ के जरिए हम विफल करेंगे जैसे इस उपचुनाव में किया है.’

रालोद उपाध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा, कांग्रेस और उनकी पार्टी एकजुट होंगी और सीटों के तालमेल को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी.

उन्होंने कहा, ‘2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को सीट साझा करने के समझौते के तहत उन राज्यों में सहायक की भूमिका निभानी चाहिए जहां क्षेत्रीय दलों का प्रभुत्व है.’

विशेषकर कि उत्तर प्रदेश, जहां चार प्रमुख दल हैं, में सीटों के बंटवारे को एक कठिन चुनौती मानते हुए चौधरी ने कहा कि सभी साझेदारों को भाजपा को रोकने के लिए आपसी दरियादिली दिखानी होगी.

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन राज्यों में कांग्रेस मुख्य दल है, वहां क्षेत्रीय दलों को उसका समर्थन करना होगा.

सभी को एक साथ रखने के फॉर्मूले का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा, ‘दूसरे राज्यों में जहां क्षेत्रीय दल अगुवा की भूमिका में हैं, कांग्रेस को सहायक की भूमिका निभानी होगी.’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि इस पर कांग्रेस को फैसला करना है लेकिन सभी घटकों ने महसूस किया है कि आगे बढ़ने का यही तरीका है.’

उन्होंने कहा कि इसकी अनुभूति कर्नाटक में पहले ही हो गई थी जहां कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने सरकार बनाई है.

उन्होंने जोड़ा कि मध्यप्रदेश में भी हालात समान दिशा में बढ़ रहे हैं जहां से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में एक साथ उतरने वाले हैं.

पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में विपक्ष द्वारा जीते जाने का उदाहरण देते हुए चौधरी ने कहा, ‘तीनों उपचुनावों ने भाजपा अपराजय है, यह मिथक तोड़ दिया है. और सभी दलों को इस तथ्य का अहसास हो गया है कि आगे बढ़ने का यही रास्ता है. अगर चीजें उत्तरप्रदेश में सही तरीके से प्रबंधित की जाती हैं तो 2019 के लोकसभा चुनावों के नतीजे अलग होंगे.’

चौधरी ने कहा, ‘सच्चाई यह है कि तीन प्रमुख दल कांग्रेस, सपा और रालोद का नेताओं की नई पीढ़ी द्वारा नेतृत्व किया जा रहा है. जो बहुत लाभकारी होगा.’

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के नेता इतिहास का कोई बोझ लेकर नहीं चलते और एक-दूसरे के साथ बहुत ही सहज हैं और इसको आप राजनीतिक विकल्प के तौर पर देख सकते हैं.

रालोद प्रमुख अजित सिंह के बेटे और जाट नेता चरण सिंह के पोते जयंत पिछली लोकसभा में मथुरा से सांसद थे.

जयंत ने कहा, ‘गठबंधन की राजनीति देश के लिए कोई नई नहीं है. यह देश की विविधता को नेतृत्व देने में मदद करती है. साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भी गठबंधन की सरकार चला रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘उपचुनाव के नतीजों ने लोगों को एक संभावित विकल्प दिखाया है. अब तक हवा भाजपा के पक्ष में थी और लोगों को लगता था कि कोई भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चाणक्य नीति का सामना नहीं कर सकता है.’

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के पास ये बहाना भी नहीं है कि उसका उच्च नेतृत्व इस दौरान कैराना से अनुपस्थित रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वहां दो बार गए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनाव के ठीक पहले आसपास के क्षेत्रों में होकर आए. जबकि उपमुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्री और सांसदों ने भी क्षेत्र में डेरा डाला था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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