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मध्य प्रदेश में 60 लाख फ़र्ज़ी मतदाता होने की कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग ने दिए जांच के आदेश

आयोग ने भोपाल ज़िले की नरेला, रायसेन की भोजपुर, होशंगाबाद और सिवनी-मालवा विधानसभा सीट की मतदाता सूची में गड़बड़ी की जांच के लिए दो-दो सदस्यीय दल बनाया हैं. कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा प्रशासनिक दुरुपयोग कर रही है.

कमल नाथ और शिवराज सिंह चौहान (फोटो: पीटीआई)

कमल नाथ और शिवराज सिंह चौहान (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस की शिकायत पर चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में 60 लाख से अधिक फर्जी मतदाता होने के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने भोपाल जिले की नरेला, रायसेन की भोजपुर, होशंगाबाद और सिवनी मालवा विधानसभा सीट की मतदाता सूची में गड़बड़ी की जांच के लिए दो-दो सदस्यीय जांच दल गठित किए हैं.

टीमें सोमवार को भोपाल पहुंचेगी. चार दिन में उन्हें अपनी जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के लिए साल के अंत में चुनाव होना प्रस्तावित हैं.

पत्रिका के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने रविवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत से मतदाता सूची में फर्जीवाड़े की शिकायत की थी और इस संबंध में सबूत भी सौंपे.

कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में 60 लाख फर्जी मतदाता पाए गए हैं जो भाजपा के इशारे पर बनाए गए हैं.

आयोग पहुंचने वाले नेताओं में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, राज्यसभा सांसद विवेक तलखा और सत्यव्रत चतुर्वेदी शामिल थे.

कमलनाथ ने कहा, ‘आयोग ने उन्हें आश्वस्त किया है कि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अब 20 जून की बजाय 31 जुलाई को किया जाएगा.’

जिन सीटों पर मतदाता सूची की जांच के लिए टीम बनी है उनमें मंत्री विश्वास सांरग की नरेगा सीट,मंत्री सुरेंद्र पटवा की भोजपुर सीट, विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा की होशंगाबाद सीट और पूर्व मंत्री सरताज सिंह के सिवनी-मालवा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं.

जांच के दौरान टीमें घर-घर जाकर सूची का सत्यापन करेंगी और पता लगाएंगी कि यह कैसे और किसकी सांठगांठ से हुआ.

टीमें आयोग को रोजाना रिपोर्ट करेंगी, हालांकि अंतिम रिपोर्ट 7 जून को आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी.

हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं. उनका कहना है, ‘चुनाव आयोग की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. आरोप लगाना कांग्रेस की फितरत है. चुनाव हारने के डर से वे आरोप लगा रहे हैं.’

ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं, ‘सब भाजपा का किया धरा है. वरना कैसे मुमकिन है कि 10 साल में मध्य प्रदेश की जनसंख्या 24 प्रतिशत बढ़ी लेकिन वोटरों की तादाद में 40 फीसद का इजाफा हो गया. हमने हरेक विधानसभा में पड़ताल की तो पाया कि एक वोटर का नाम 26 लिस्टों में है. ऐसा दूसरी जगहों पर भी हुआ है.’

कमलनाथ कहते हैं, ‘सीमावर्ती राज्यों की सूची में कई मतदाताओं के नाम दोनों प्रदेशों की मतदाता सूची में हैं. ये नाम जानबूझकर लिस्ट में शामिल किए गए हैं. यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, प्रशासनिक दुरुपयोग है. हमने संबंधित दस्तावेज आयोग को सौंप दिए हैं.’

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