भारत

कॉलेजियम व्यवस्था लोकतंत्र पर धब्बा है: उपेंद्र कुशवाहा

पटना में हुए एक कार्यक्रम में बोले मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा, कॉलेजियम व्यवस्था से जजों की नियुक्ति नहीं होती बल्कि उत्तराधिकारी चुना जाता है.

केंद्रीय राज्य मानव संसाधन मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा (फोटो: एएनआई/ट्विटर)

केंद्रीय राज्य मानव संसाधन मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (फोटो: एएनआई/ट्विटर)

पटना: राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कॉलेजियम व्यवस्था से जजों की नियुक्ति पर सवाल खड़ा किया है. सोमवार को पटना में हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था न्यायपालिका पर धब्बा है और लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक कुशवाहा ने कहा, ‘मौजूदा न्यायपालिका में जज दूसरे जजों की नियुक्ति नहीं करते, बल्कि वे अपना उत्तराधिकारी चुनते हैं. वे ऐसा क्यों करते हैं? इसे एक उत्तराधिकारी चुनने की व्यवस्था क्यों बना दिया गया है?’

कुशवाहा ने यह भी कहा, ‘लोग आरक्षण का विरोध करते हैं, वे कहते हैं कि आरक्षण की वजह से मेरिट को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, लेकिन मैं समझता हूं कि कॉलेजियम व्यवस्था मेरिट को नज़रअंदाज़ कर रहा है. जब एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है और मछुआरे का बेटा राष्ट्रपति बन सकता है, लेकिन क्या एक नौकरानी का बच्चा जज बन सकता है? कॉलेजियम लोकतंत्र पर धब्बा है.’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुशवाहा की कॉलेजियम व्यवस्था पर टिप्पणी केंद्र सरकार और कॉलेजियम के बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ी है.

मालूम हो कि इस साल जनवरी में भी कुशवाहा ने न्यायपालिका में परिवारवाद की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 80 प्रतिशत जज न्यायपालिका से जुड़े परिवारों से हैं.

उन्होंने तब यह भी कहा कि न्यायपालिका में दलित, पिछड़ा और महिलाओं की न के बराबर प्रतिनिधित्व है. न्यायपालिका में चयन प्रक्रिया भारतीय प्रशासनिक सेवा की तरह होनी चाहिए और जुडिशियरी आयोग का गठन होना चाहिए.

Comments