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शराबबंदी का हो रहा दुरुपयोग, समीक्षा होगी, ज़रूरत पड़ी तो संशोधन होगा: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी का सबसे अधिक फायदा गरीब और गांवों में रहने वालों को हुआ है. इसने कुछ लोगों को चोट पहुंचाई है लेकिन राज्य की 90 प्रतिशत जनसंख्या को लाभ पहुंचाया है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सरकारी मशीनरी में कुछ लोगों द्वारा शराबबंदी कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है और इस समस्या का समाधान इसकी समीक्षा करने पर मिलेगा.

मंगलवार को जद (यू) के एक समारोह में उन्होंने कहा कि शराबबंदी ने कुछ लोगों को चोट पहुंचाई है लेकिन राज्य की 90 प्रतिशत जनसंख्या को लाभ पहुंचाया है.

उन्होंने कहा, ‘यह गरीबों के घर में खुशी वापस लेकर आई है और इसने शांति और सौहार्द्र तथा घरेलू कलह से मुक्त माहौल पैदा किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘फिर भी हम अपनी नीतियों की समीक्षा करते रहते हैं. शराबबंदी क़ानून के दुरुपयोग और इसमें सरकारी मशीनरी के शामिल होने के आरोपों संबंधित शिकायतें आ रही हैं.’

उन्होंने विपक्षी दलों, विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी, द्वारा आलोचनाओं के संदर्भ में कहा, ‘वास्तव में लोग जो शराबबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुए, वे हर प्रकार का आकलन कर रहे हैं और कई बातें कर रहे हैं. मांझी ने हाल ही में सत्तारूढ़ एनडीए छोड़ राजद-कांग्रेस गठबंधन में शामिल हो गए थे.’

मांझी आरोप लगा रहे हैं कि वंचित वर्ग के अधिकांश लोग शराबबंदी क़ानून के तहत उठाए जा रहे हैं.

नीतीश कुमार ने यह भी कहा, ‘शराबबंदी के कारण आजीविका की समस्या का सामना करने वाले लोगों पर एक सर्वे कराया जा रहा है और उनके लिए कई पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.’

दैनिक भास्कर के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘शराबबंदी कानून के सहारे कुछ लोग तरह-तरह का खेल कर रहे हैं. ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि लोगों को फंसाया जा रहा है. हम जल्द ही इस कानून की समीक्षा करेंगे. जरूरत होगी तो इसमें संशोधन भी किया जाएगा. कानून में कमियों का सरकारी तंत्र में बैठे लोग भी लाभ उठाने लगते हैं. हम ऐसा नहीं होने देंगे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जब हमने शराबबंदी की घोषणा की, तब हमारे खिलाफ क्या-क्या नहीं बोला गया. अब भी दुष्प्रचार किया जाता है कि शराबबंदी की वजह से एससी-एसटी, ओबीसी और ईबीसी के गरीब जेल जा रहे हैं. ऐसा कहने वाले पहले यह तो बताएं कि दूसरे अपराधों में किस-किस जाति के लोग जेल में हैं.’

उन्होंने कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

बिहार के मुख्यमंत्री आगे बोले, ‘शराबबंदी का सबसे अधिक फायदा गरीब और गांवों में रहने वालों को हुआ है. यही बात विरोधियों को पसंद नहीं है. खैर, कुछ बड़ा करने पर भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए. और, हम तैयार रहते हैं.’

गौरतलब है कि 2015 के विधानसभा चुनावों में मतदाता से किए अपने वादे पर अमल करते हुए नीतीश कुमार ने दो साल पहले बिहार में शराब पीना और बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था.

उसके बाद से ही ऐसी खबरें आती रही हैं कि शराबबंदी कानून का बिहार में दुरुपयोग हो रहा है और गरीब, दलित, आदिवासी समुदाय को इस कानून की आड़ में प्रताड़ित किया जा रहा है.

शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक दो सालों में बिहार में इस कानून के तहत लगभग सवा लाख लोग गिरफ्तार किए गए हैं. जिसमें बच्चे, बूढ़े और विधवाएं भी शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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