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रिज़र्व बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई, बैंक क़र्ज़ होगा महंगा

मोदी सरकार आने के बाद पहली बार रिज़र्व बैंक ने रेपो दरों में 0.25 फीसदी का इज़ाफ़ा किया है. अब रेपो रेट 6.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 6 प्रतिशत है.

Mumbai: RBI Governor Urjit Patel (C), Deputy Governor Viral Acharya (L) and Executive Director Micheal Patra (R) during the customary post monetary policy review press conference, in Mumbai on Wednesday, June 08, 2018. (PTI Photo/Shirish Shete)(PTI6_6_2018_000105B)

आरबीआई गर्वनर उर्जित पटेल (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: रिजर्व बैंक ने महंगाई बढ़ने की चिंता के बीच बुधवार को मुख्य नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.25 प्रतिशत कर दिया जिससे बैंक कर्ज महंगा हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ महीनों के दौरान कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है.

रिजर्व बैंक ने पिछले साढे चार साल में पहली बार रेपो दर में वृद्धि की है. चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति अनुमान को बढ़ाकर 4.8-4.9 प्रतिशत कर दिया है जबकि वर्ष की दूसरी छमाही के लिए इसे 4.7 प्रतिशत रखा गया है.

रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के इस अनुमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले बढ़े महंगाई भत्ते का असर भी शामिल है. मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल समेत सभी छह सदस्यों ने रेपो दर में वृद्धि के पक्ष में अपना मत दिया.

रिजर्व बैंक ने कहा है मौद्रिक नीति समिति ने ‘रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ा दिया है जबकि अन्य उपायों को तटस्थ बनाये रखा है.’

रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उनको फौरी नकद की सुविधा उपलब्ध कराता है. इसके बढ़ने से बैंकों के धन की लागत बढ़ जाती है.

रिजर्व बैंक ने समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर पूर्ववत बनाये रखा है. समीक्षा में कहा गया है , ‘कच्चे तेल के दाम में हाल के दिनों में हलचल पैदा हुई है जिससे मुद्रास्फीति परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है-यह अनिश्चितता इसमें वृद्धि और गिरावट दोनों को लेकर है.’

(ग्राफिक्स: पीटीआई)

(ग्राफिक्स: पीटीआई)

इससे पहले अप्रैल में जारी मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति के लिए पहली छमाही के दौरान 4.7-5.1 प्रतिशत और दूसरी छमाही में इसके 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. इसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों का आवास किराया भत्ता वृद्धि का प्रभाव भी शामिल था.

मौद्रिक नीति समीक्षा की मुख्य बातें

  • मुख्य नीतिगत दर (रेपो) 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत की गई
  • साढ़े चार साल में नीतिगत दर पहली बार बढ़ी.
  • रिवर्स रेपो 6 प्रतिशत, बैंक दर 6.50 प्रतिशत.
  • वर्ष 2018-19 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर बरकरार.
  • खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-सितंबर के लिए 4.8-4.9 प्रतिशत तथा दूसरी छमाही में 4.7 प्रतिशत रहने का संशोधित अनुमान.
  • कच्चे तेल के दाम में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा.
  • कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से मुद्रास्फीति परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ी.
  • निवेश में सुधार, ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता के तहत मामलों के निपटान से निवेश को बल मिला.
  • भू-राजनीतिक जोखिम, वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव, व्यापार संरक्षणवाद का घरेलू वृद्धि पर प्रभाव पड़ेगा.
  • केंद्र तथा राज्यों द्वारा बजटीय लक्ष्य पर कायम रहने से मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम कम होगा.
  • मौद्रिक नीति समिति के सभी सदस्यों ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत वृद्धि का समर्थन किया.
  • एमपीसी की अगली बैठक 31 जुलाई और एक अगस्त को.

रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति अनुमान में मामूली वृद्धि की

रिजर्व बैंक ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति के बारे में अपने पहले के अनुमान को बुधवार को मामूली रूप से बढ़ा दिया. रिजर्व बैंक ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में तेजी से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई. इस दौरान खाद्य, ईंधन को छोड़कर अन्य समूहों में तीव्र वृद्धि का इसमें अधिक योगदान रहा.

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अप्रैल में हुई बैठक के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारतीय बास्केट का दाम 66 डालर बढ़कर 74 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसमें करीब 12 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. विश्व बाजार में दूसरी उपभोक्ता जिंसों के दाम बढ़ने के साथ ही हाल के वैश्विक वित्तीय बाजार के घटनाक्रमों से विभिन्न उत्पादों के मामले में लागत दबाव बढ़ गया.

आरबीआई ने 2018-19 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर बनाए रखा

रिजर्व बैंक ने निवेश को गति मिलने तथा खपत अधिक रहने की उम्मीद में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. पिछले वित्त वर्ष में यह 6.7 प्रतिशत थी. मौद्रिक नीति समिति की 2018-19 की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद रिवर्ज बैंक ने कहा कि हालांकि पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में तीव्र वृद्धि खर्च करने योग्य आय को प्रभावित कर सकती है.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सतत रूप से सुधार दिखा है. उत्पादन क्षमता और उत्पादन का अंतर लगभग समाप्त हो गया है.

Mumbai: RBI Governor Urjit Patel (C), Deputy Governor Viral Acharya (L) and Executive Director Micheal Patra (R) during the customary post monetary policy review press conference, in Mumbai on Wednesday, June 08, 2018. (PTI Photo/Shirish Shete)(PTI6_6_2018_000105B)

मुंबई में बुधवार को रिजर्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल व अन्य (फोटो: पीटीआई)

आरबीआई की तरफ से जारी नीति बयान में कहा गया है, ‘विशेष रूप से निवेश गतिविधियों में पुनरूद्धार हो रहा है और ऋण शोधन तथा दिवाला संहिता के तहत अर्थव्यवस्था के दबाव वाले क्षेत्रों के सुगमता से निपटान से इसमें और तेजी आने की उम्मीद है.’

केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुल मिलाकर आकलन के आधार पर 2018-19 के लिए जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को 7.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. अमेरिकी की साख रेटिंग एजेंसी मूडीज ने पिछले सप्ताह देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को कम कर 7.3 प्रतिशत कर दिया. पूर्व में इसके 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था. उसका कहना था कि तेल की ऊंची कीमतों तथा कड़ी वित्तीय स्थिति का तेजी पर असर पड़ेगा.

आरबीआई ने अप्रैल-सितंबर अवधि के लिए आर्थिक वृद्धि दर 7.5 से 7.6 प्रतिशत तथा अक्टूबर मार्च के लिए 7.3 से 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.

उसने कहा कि क्षमता उपयोग तथा ऋण उठान में सुधार से निवेश गतिविधियां मजबूत बनी रहने की उम्मीद है. आरबीआई ने कहा कि वैश्विक मांग भी अच्छी बनी हुई है. इससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलना चाहिए तथा निवेश को और गति मिल सकती है. इसके अलावा ग्रामीण तथा शहरी दोनों खपत बेहतर बनी हुई है और इसमें और मजबूती की उम्मीद है.

हालांकि उसने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिम, वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव तथा व्यापार संरक्षणवाद को खतरा घरेलू पुनरूद्धार के रास्ते में चुनौती है.

आरबीआई ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक वित्त से निजी क्षेत्र की निवेश गतिविधियां प्रभावित नहीं हो. केंद्र तथा राज्यों के बजटीय लक्ष्यों पर कायम रहने से मुद्रास्फीति परिदृश्य के ऊपर जाने का जोखिम कम होगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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