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असम में दो युवकों की पीट-पीट कर हत्या के मामले में मुख्य आरोपी गिरफ़्तार: पुलिस

असम के कार्बी आंगलांग ज़िले में दो लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने, घृणा संदेश और अफवाहें फैलाने के संबंध में अब तक कुल 64 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.

अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास. (फोटो साभार: ट्विटर)

अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास. (फोटो साभार: ट्विटर)

गुवाहाटी: असम में भीड़ द्वारा दो युवकों की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी को बुधवार तड़के कार्बी आंगलोंग जिले से गिरफ्तार किया गया.

बीते 8 जून को कार्बी आंगलोंग के पंजूरी में निलोत्पल दास (29) और उसके दोस्त अभिजीत नाथ (30) को उनके वाहन से खींचकर गांववालों के एक समूह ने बच्चा चुराने के संदेह में पीट-पीटकर मार डाला था.

नीलोत्पल दास संगीतकार और साउंड इंजीनियर थे. वहीं अभिजीत नाथ इंजीनियर ग्रेजुएट थे और वह गुवाहाटी में व्यापार भी करते थे.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया शुक्रवार को कार्बी आंगलोंग में दो लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने और घृणा संदेश तथा अफवाहें फैलाने के संबंध में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 64 हो गई है.

पुलिस अधीक्षक एसपी गंजाला ने बुधवार को बताया कि कार्बी आंगलांग पुलिस ने डोकमोका पुलिस थाने के तहत आने वाले बेलुरघाट इलाके से मुख्य आरोपी जोज तिमुंग उर्फ ‘अल्फा’ को गिरफ्तार किया. यह घटना इसी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई थी.

एसपी ने बताया कि ऐसा आरोप है कि तिमुंग ने फोन पर गांववालों से दोनों युवकों के वाहन को रोकने के लिए कहा तथा यह अफवाह फैलाई कि वे बच्चा चुराने वाले लोग हैं.

उन्होंने बताया कि पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया था लेकिन वह फरार था. आखिरकार बुधवार सुबह उसे पकड़ लिया गया.

तिमुंग कांगथिलांग्सो गांव का रहने वाला है, जो एक पिकनिक स्थल है और बीते आठ जून को मार डाल गए दोनों युवक गए थे.

वहीं पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया इस हत्या के संबंध और घृणा संदेश व अफवाहें फैलाने आरोप में अब तक 64 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

कार्बी आंगलांग स्वायत्त परिषद (केएएसी) के प्रमुख कार्यकारी सदस्य तुलीरात रोंगहांग ने कहा कि संगठन ने दोनों मृतकों के माता-पिता को पांच-पांच लाख रुपये देने का फैसला किया है और साथ ही जिस स्थान पर उनकी हत्या की गई वहां पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने का भी फैसला लिया है.

कार्बी आंगलांग ज़िले के मुख्यालय दीफू में मंगलवार शाम मीडिया, सरकारी अधिकारियों और प्रतिष्ठित लोगों के साथ बैठक में परिषद ने घटना की निंदा की.

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसकी रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया. इस घटना को लेकर पूरे राज्य में प्रदर्शन जारी हैं.

इस संबंध में पुलिस ने परामर्श जारी किया है और लोगों से सोशल मीडिया पर अफवाहें नहीं फैलाने को कहा है.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) मुकेश अग्रवाल स्थिति पर नज़र रख रहे हैं.

इस बीच, असम सरकार ने अंधविश्वास और अफवाहों से होने वाली ऐसी घटनाओं को देखते हुए सभी विकास मंडलों और पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है.

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और किसान नेता अखिल गोगोई ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की और आरएसएस-भाजपा पर असल मुद्दों से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया.

बीते 12 जून को नीलोत्पल के माता-पिता गोपाल चंद्र दास और राधिका दास ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की. साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देने की भी अपील की.

पुलिस की लापरवाही की संभावना पर जांच के आदेश

इस मामले में यह भी पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया है कि कहीं इसमें पुलिस की ओर से कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई.

जांच का आदेश इन ख़बरों के आने के बाद सूचना है कि एक ‘पुलिसकर्मी’ को घटना का वीडियो बनाते हुए देखा गया.

आदेश में कहा गया है कि कार्बी आंगलांग ज़िले के उपायुक्त ने अतिरिक्त उपायुक्त जुनुमोनी सोनोवाल को जांच का जिम्मा सौंपा है.

आदेश में कहा गया, ‘अपुष्ट खबरों में कहा गया है कि खाकी पहने एक व्यक्ति को, जिसके पुलिसकर्मी होने का संदेह है, घटना का वीडियो क्लिप बनाते देखा गया.’

पीड़ित युवकों के अभिभावकों ने दोषी लोगों को सख़्त सज़ा की मांग की

दो युवकों के अभिभावकों ने मांग की है कि दोषी लोगों को सख्त सज़ा दी जानी चाहिए. इस अप्रत्याशित घटना से उनके दुख की कोई सीमा नहीं है. उनके अभिभावकों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ‘किसी भी अभिभावक को इस तरह के दुख का सामना नहीं करना पड़े.’

नीलोत्पल के पिता गोपाल चंद्र दास को अब तक यह भरोसा नहीं हो पा रहा है कि अपनी ही सरजमीं पर ऐसा होगा. अवकाश प्राप्त सरकारी कर्मचारी दास ने संवाददाताओं से कहा, ‘मेरे बेटे ने कितने स्थानों की यात्रा की लेकिन यह दुखद अंत अपनी ही सरजमीं पर हुआ.’

उन्होंने कहा कि सरकार कार्बी आंगलांग को पर्यटकों के लिए पूरब का स्विट्जरलैंड बनाने की बात करती है. लेकिन क्या पर्यटक आएंगे अगर अपनी सरजमीं पर अपने ही लोग सुरक्षित नहीं हों?

अभिजीत की मां शशिप्रभा नाथ का रो-रोकर बुरा हाल है. वह अब तक इस सदमे से नहीं उबर पायी हैं. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार तत्काल कदम उठाए जिससे किसी अभिभावक को ऐसे दुख का सामना नहीं करना पड़े.’

असम के मुख्यमंत्री शुरू करेंगे जागरूकता अभियान

असम सरकार ने अंधविश्वास और अफवाहों से होने वाली ऐसी घटनाओं को देखते हुए सभी विकास मंडलों और पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है.

एक सरकारी विज्ञप्ति में मंगलवार को कहा गया कि मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में 11 जून की शाम हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया.

विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय निकायों , महिला संगठनों और मीडियाकर्मियों के साथ मिलकर सभी स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम ‘संस्कार’ चलाने के तौर तरीके तैयार करने को कहा है.

उन्होंने कहा, ‘असम को उसके विशिष्ट सत्कार के लिए पूरे भारत में पहचाना जाता है और देशभर से आने वाले लोग राज्य में जहां भी जाएं तो उन्हें मैत्रीपूर्ण माहौल मिलना चाहिए.’

असम पुलिस प्रवक्ता ने कहा, ‘दीफू से गिरफ्तार लोग विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा करने के लिए मोबाइल फोन पर घटना की रिकॉर्डिंग करने या फिर उन्हें बयानों एवं टिप्पणियों के साथ सोशल मीडिया पर डालने में शामिल पाए गए.’

विज्ञप्ति के अनुसार, असम विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (एएसटीईसी) नोडल एजेंसी होगी और इस कार्यक्रम में सभी पुलिस उपायुक्त, अधीक्षक और किसी जिले में सभी संबंधित सरकारी विभाग शामिल होंगे.

विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्थानीय संस्थाएं, महिला संगठन, स्वयंसेवी संगठन, मीडियाकर्मी, प्रतिष्ठित लोग, विद्वान, सत्तारूढ़ तथा विपक्षी दलों के सांसद और विधायक भी इसका हिस्सा होंगे.

अंधविश्वास के खिलाफ लगातार लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता बीरूबाला राभा भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने उन दोनों युवकों के माता-पिता को भी कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी जिनकी बच्चा चुराने के संदेह में शुक्रवार को कार्बी आंगलांग जिले में हत्या कर दी गई थी.

विज्ञप्ति में कहा गया कि इनके माता-पिता ने राज्य में जागरूकता पैदा करने की ज़रूरत की वकालत की थी ताकि समाज में फिर ऐसी घटनाएं ना हो पाएं.

उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने की भी इच्छा जताई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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