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तमिलनाडु में नास्तिक होने के कारण हुई थी मुस्लिम युवक की हत्या

तमिलनाडु पुलिस का दावा है कि कोयंबटूर में बीते दिनों की गई एक मुस्लिम युवक की हत्या उनके नास्तिक होने के कारण हुई. मृतक के पिता ने कहा कि अगर पुलिस सच कह रही है तो वे भी हो जाएंगे नास्तिक.

Hamid Coimbtur Indian Express

मृतक फारूक के पिता हामिद (फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 10 दिन पहले हुए नास्तिक मुस्लिम युवक एच. फारूक की हत्या के पीछे कथित तौर पर कट्टरवादी मुस्लिम संगठन का हाथ सामने आया है. मृतक के पिता हामिद का कहना है कि अगर महज़ नास्तिक होने के नाते उनके बेटे की हत्या हुई है तो वो भी नास्तिक बन जाएंगे.

स्क्रैप कारोबारी 31 वर्षीय फारूक द्रविड़र विदुथलाई कषगम (डीवीके) के सदस्य थे. वह हामिद के बड़े बेटे थे और कोयंबटूर के पास उक्कदम में कारोबार करते थे.

16 मार्च, 2017 को फारूक की हत्या कर दी गई थी. हत्या के 15 दिन पहले उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से अपने बच्चे की एक फोटो पोस्ट की थी, जिसमें वो एक पोस्टर लेकर खड़ा था जिस पर लिखा था, कड़ावुल इल्लई, कड़ावुल इल्लई, कड़ावुल इल्लई यानी ईश्वर नहीं है, ईश्वर नहीं है, ईश्वर नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में हामिद कहते हैं, ‘जैसा कि पुलिस बता रही है कि मेरे बेटे की हत्या नास्तिक होने के कारण किसी कट्टरवादी मुस्लिम संगठन से जुड़े लोगों ने की तो उन लोगों ने क़ुरान के ग़लत मायने को समझा है. क़ुरान एक ऐसी पवित्र किताब है जो पैग़ंबर मोहम्मद के समय से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देती है. अगर सिर्फ़ नास्तिक होने की वजह से मेरे बेटे की हत्या हुई है तो मैं भी उसके संगठन से जुड़ूंगा और वही करूंगा जो उसने किया.’

निजी गेस्ट हाउस की देख-रेख करने वाले हामिद कहते हैं, ‘मैं हमेशा अपने बेटे का दोस्त बनकर रहा. वो धार्मिक रीति-रिवाज़ों में शामिल होने से बचने के लिए जब वह किसी रिश्तेदार के यहां शादी में जाने से मना करता था तो मैं कभी भी उस पर चलने का दबाव नहीं बनाता था.’

वे आगे कहते हैं, ‘मुझे बिलकुल नहीं पता था कि फारूक इस संगठन के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ था. उसने कभी भी अपने विचार किसी पर भी थोपने की कोशिश नहीं की, यहां तक की अपनी पत्नी रशीदा पर भी नहीं. वह दूसरों की इज़्ज़त करता था.’

फारूक की बीवी रशीदा अब तक यह मानने को तैयार नहीं कि उनके पति की हत्या हो गई है. कोयंबटूर के नज़दीक मुस्लिम बाहुल्य इलाके उक्कदम में फारूक परिवार के साथ रहते थे. उनके उसे बच्चे हैं.

हामिद कहते हैं, ‘उस रोज़ रात 12.10 बजे एक रिश्तेदार का फोन आया कि फारूक पर हमला हुआ है. मैं रोने लगा. मुझे स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा तब लगा जब उन्होंने दुआ करने की बात कही.’

कोयंबटूर पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को हिरासत में लिया है, जो कि दिहाड़ी मजदूरी का काम करते है. मुख्य आरोपी सद्दाम हुसैन, अब्दुल मुनाफ़ और ज़फर अली फारूक को अच्छी तरह से जानते थे.

पुलिस के अनुसार सभी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. फारूक एक ह्वाट्स ऐप ग्रुप भी चलता था, जिसका नाम ‘अल्लाहु मुरधर्त’ था, आरोपी अब्दुल मुनाफ़ भी इसका सदस्य था.

फारूक की बीवी रशीदा के भाई शाहजहां कहते हैं, ‘सबसे दुःख की बात है कि फारूक की हत्या उसके दोस्तों ने की है. मेरी बहन यह भरोसा नहीं कर पा रही कि इस सबके पीछे मुनाफ़ और ज़फ़र हैं. फारूक चेन्नई में पले बढ़े थे और खुले विचारों वाले युवा थे. उनके बहुत सारे ग़ैर मुस्लिम मित्र थे वे मज़हब को कुछ ख़ास नहीं मानते थे.

पुलिस के अनुसार, फारूक के फोन से मामले का सुराग मिला. फोन से पता चला है कि मुनाफ ने फारूक को उस रोज़ रात 11.20 बजे फोन कर घर से बाहर बुलाया था. फारूक की हत्या से पहले उसी नंबर पर फारूक के फोन से तीन कॉल किए गए थे.