मीडिया

पश्चिम बंगाल में सोशल मीडिया से प्रसारित फ़र्ज़ी ख़बरों पर रोक लगाने की तैयारी

झारखंड के गोड्डा ज़िले में मवेशी चोर और असम के कार्बी आंगलांग ज़िले में बच्चा चोर समझ चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों की भूमिका की वजह से राज्य सरकार नया क़ानून बनाने पर विचार कर रही है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो: पीटीआई)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो: पीटीआई)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी खबरों और फ़र्ज़ी पोस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक नए कानून पर काम कर रही है. देश के कई हिस्सों में इस तरह के पोस्ट से हो रही परेशानियों और अशांति की पृष्ठभूमि में यह कदम सामने आया है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि पश्चिम बंगाल में फ़र्ज़ी खबरों के मामलों से निपटने के लिए नए कानून की जरूरत है. राज्य में इस तरह की कई ओछी हरकतें सामने आ रही हैं. नए कानून का एक मसौदा प्रस्ताव कानून विभाग के पास भेज दिया गया है.

उन्होंने कहा, ‘हम इस काम को काफी संवेदनशीलता से कर रहे हैं. हमने मसौदा तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा है कि जहां एक तरफ फ़र्ज़ी खबरें और हिंसा भड़काने वाले पोस्ट लिखने वालों को सज़ा मिले वहीं दूसरी तरफ़ अभिव्यक्ति  की स्वतंत्रता को भी बचाया जा सके.’

गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि समाज में शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या घृणा पैदा करने के उद्देश्य से फ़र्ज़ी खबरें फैलाने वालों और तस्वीरों को छेड़छाड़ कर उन्हें पोस्ट करने के जिम्मेदार लोगों के अपराध और सजा की प्रकृति पर अधिक स्पष्टता लाई जाए.

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नया कानून बनाते हुए अपराधियों के रिकॉर्ड रखने के अलावा पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल तथा देश के अन्य हिस्सों में सोशल मीडिया पर फैली फ़र्ज़ी खबरों पर एक डेटा बैंक तैयार कर रही है.

झारखंड के गोड्डा ज़िले में मवेशी चोर और असम के कार्बी आंगलांग ज़िले में बच्चा चोर समझ चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं की वजह से राज्य सरकार नया कानून बनाने पर विचार कर रही है.

इसके अलावा मेघालय के शिलॉन्ग में बीते दिनों लगे दो समुदायों में विवाद के बाद लगे कर्फ्यू की वजह से राज्य सरकार ये कदम उठाने जा रही है. मालूम हो कि इन तीनों ही घटनाओं में सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर फैली अफवाहों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की इसी ख़बर के मुताबिक़ गृह विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘हाल के दिनों में कई घटनाएं हुई हैं जब सोशल मीडिया पर लिखे गए पोस्ट के प्रमुख प्रभाव देखे गए. इन पोस्ट और अपराधों की गंभीरता के अनुसार भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं. अब राज्य सरकार प्रयास कर रही कि इन मामलों में आरोपी पाए गए व्यक्तियों और संस्थानों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए.’

उन्होंने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में जनता के बीच डर या चिंता पैदा करने या अपराध करने की मंशा से ऐसे पोस्ट डालने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया जाता है. आईपीसी धारा 504 उन मामलों के प्रयोग की जाती है जहां ‘शांति का उल्लंघन करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान पाया जाता है.’

नया कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस की सहायता भी ले रही है. अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने कई पेड ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट की पहचान की है जिनका ऐसे पोस्टों के लिए अलग -अलग तरीके से लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने इसकी भी पहचान की है कि फ़र्ज़ी ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट चलाने वालों साथ ही फ़र्ज़ी खबरें, तस्वीरें तथा लेख साझा करने वाले लोगों का कैसे विभिन्न माध्यमों से वित्त पोषण किया जाता है.’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Comments