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हापुड़ लिंचिंग: घायल को अमानवीय तरीके से ले जाने पर यूपी पुलिस ने मांगी माफ़ी

उत्तर प्रदेश के हापुड़ ज़िले के पिलखुआ क्षेत्र में 18 जून को ग्रामीणों ने गोहत्या के शक में दो मुस्लिम व्यक्तियों को पीटकर घायल कर दिया था. इनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई. परिवारवालों का आरोप, पुलिस से जैसा कहा वैसी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई.

घटना का फोटो. (फोटो साभार: ट्विटर)

घटना के बाद कासिम को पुलिस द्वारा घसीटकर ले जाता हुआ एक फोटो सामने आया, जिस पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफी मांगी है. (फोटो: ट्विटर)

लखनऊ/मेरठ/हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ ज़िले में बीते 18 जून को कथित तौर पर गोकशी के शक में दो लोगों की पिटाई तथा पुलिसकर्मियों के सामने अधमरी हालत में एक शख़्स को अमानवीय तरीके से ले जाने की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस घटना को लेकर माफी मांगी है.

इसके अलावा इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों को लाइन हाजिर कर जांच के आदेश दिए गए हैं.

हापुड़ में कथित तौर पर गोकशी के शक में भीड़ ने कासिम और समीउद्दीन नाम के दो व्यक्तियों की कथित रूप से पिटाई की थी.

घटना हापुड़ के पिलखुवा थाने के के बछेड़ा खुर्द गांव में 18 जून को हुई. गांववालों ने कासिम नाम के एक शख़्स को कथित रूप से पीट-पीटकर मार डाला था. गुरुवार को इससे जुड़ा फोटो वायरल हुआ, जिसमें इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों की मौजूदगी में भीड़ कासिम के शव को अमानवीय तरीके से घसीटकर ले जा रही है.

फोटो वायरल होने के बाद मृतक की पत्नी ने पुलिसकर्मियों समेत दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है. कासिम की पत्नी ने मीडिया को बताया कि उसके पति सोमवार की सुबह रुपये लेकर पशु खरीदने के लिए गए थे, लेकिन दोपहर बाद उन्हें सूचना मिली कि गोकशी का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने उन्हें पीट-पीट कर अधमरा कर दिया है और पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है. वह आनन-फानन में अस्पताल पहुंचीं, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

हापुड़ ज़िले के बछेड़ा खुर्द गांव में हुई इस घटना का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफी मांगी है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले को रोडरेज में दर्ज किया था. इस तस्वीर के वायरल होने के बाद पुलिस ने गुरुवार शाम अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से माफी मांगी.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने लिखा, ‘वी आर सॉरी, क़ानून व्यवस्था के मामले कई बार ऐसे होते हैं कि अनजाने अनचाहे कुछ बातें हो जाती हैं.’

ट्वीट के साथ टैग की गई तस्वीर में एक घायल व्यक्ति के हाथ पकड़कर उसे घसीट रहे लोगों के आगे एक पुलिसकर्मी चलता दिख रहा है जबकि दो अन्य सिपाही घसीटे जा रहे शख्स के इर्द-गिर्द नजर आ रहे हैं.

डीजीपी, मुख्यालय, यूपी पुलिस की ओर से इस घटना पर माफ़ी मांगते हुए ट्वीट किया गया, ‘हम इस घटना के लिए माफ़ी मांगते हैं. इन तस्वीरों में जो तीन पुलिसकर्मी दिख रहे हैं उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है. ये तस्वीर उस समय ली गई है जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची ही थी और पीड़ित को अस्पताल ले जाया जा रहा था लेकिन दुर्भाग्यवश उस वक़्त कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी इसलिए पीड़ित को इस तरह उठाना प़ड़ा.’

उन्होंने लिखा, ‘हम यह मानते हैं कि उस समय पुलिस को और अधिक संवेदनशील होना चाहिए था. जान बचाने की हड़बड़ी और क़ानून-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी के बीच मानवीय चिंताएं दरकिनार हो गईं… दूसरी तस्वीरों से स्पष्ट है कि पीड़ित को पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल से अस्पताल ले जाया गया.’

इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार, कॉन्स्टेबल कन्हैया कुमार और कॉन्स्टेबल अशोक कुमार से भी जवाब मांगा गया है.

उधर, पिलखुवा इंस्पेक्टर अश्विनी ने घटना पर सफाई देते हुए कहा कि घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो कासिम खेत के एक गड्ढे में बेहोश पड़े थे. एक स्ट्रेचर समीउद्दीन को लेकर जा रहा था, तो पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों की मदद से कासिम को खेत से बाहर निकाला. स्ट्रेचर नहीं था तो लोगों ने ही कासिम को पुलिस की पीसीआर के पास पहुंचाया और पुलिस उसे अस्पताल ले गई.

हापुड़ के एसपी संकल्प शर्मा ने कहा, ‘कोतवाली प्रभारी पिलखुवा समेत सिपाही कन्हैया और अशोक को लाइन हाजिर कर दिया गया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.’

मालूम हो कि हापुड़ जिले के पिलखुआ इलाके के बछेड़ा खुर्द गांव में गत 18 जून को समयुद्दीन और कासिम नामक व्यक्ति पर ग्रामीणों ने गोहत्या की शंका में हमला बोल दिया था. दोनों को इतना पीटा गया कि उनमें से एक कासिम की मौत हो गई थी.

हालांकि, पुलिस मानती है कि वे दोनों बाइक से कहीं जा रहे थे. रास्ते में पिलखुआ क्षेत्र के बछेड़ा गांव में एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति से किसी बात को लेकर उनकी कहासुनी हो गई थी. उस व्यक्ति ने अपने कई साथियों को बुलाकर कथित रूप से कासिम तथा समयुद्दीन की पिटाई कर दी थी. पुलिस ने मामले में रोडरेज़ का ही केस भी दर्ज किया है.

पुलिस ने दोनों को गंभीर रूप से घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कासिम की मौत हो गई.

परिवारवालों का आरोप, पुलिस से जैसा कहा वैसी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई

दिल्ली में दूसरे पीड़ित समीउद्दीन के बड़े भाई मेहरूद्दीन ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उस तरह से प्राथमिकी दर्ज नहीं की जिसकी उसका परिवार मांग कर रहा था.

घटना में गंभीर रूप से घायल हुए समीउद्दीन के भाई मेहरूद्दीन ने बीते शुक्रवार को कहा कि उसका परिवार ‘भय के साये’ में जी रहा है.

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, मवेशी व्यवसायी कासिम और समीउद्दीन का एक मोटरसाइकिल सवार से झगड़ा हुआ जिसके बाद उसने अपने दोस्तों को बुला लिया और उन्होंने दोनों को बुरी तरह पीटा.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले को रोडरेज़ की घटना के तौर पर दर्ज किया था. पुलिस ने हमले के बाद हत्या का मामला दर्ज किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया.

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक संकल्प ने तब कहा था, ‘गोकशी का कोण होने की बातें कही जा रही हैं लेकिन जांच में अब तक उनके सच होने का पता नहीं चला है.’

मेहरूद्दीन ने जांच में गड़बड़ी की तरफ इशारा किया है.

उन्होंने दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में संवाददाताओं से कहा कि जब उनके परिवार के लोग समीउद्दीन से अस्पताल में मिले, उन्होंने उसके अंगूठे पर स्याही का निशान देखा.

मेहरूद्दीन ने कहा, ‘हम जैसा चाहते थे, प्राथमिकी वैसे दर्ज नहीं की गई.’

उसने कहा कि उसके घरवाले डरे हुए हैं और डर के कारण ज़्यादा बात नहीं कर सकते, लेकिन पुलिस ने परिवार के बयान दर्ज ना करा पाने की बात से इनकार किया.

पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘पुलिस मेहरूद्दीन का बयान दर्ज करने के लिए तैयार है. पुलिस समीउद्दीन के एक दूसरे भाई यासिन का बयान पहले ही दर्ज कर चुकी है जिसकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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