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भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती के लिए आगे आईं जशोदा बेन

जसोदा बेन साबरमती आश्रम से निकली ‘भारत-पाक मैत्री एवं शांति यात्रा’ में शामिल हुईं और कहा, ‘इन यात्रियों को मैं बधाई देती हूं जो विश्व शांति चाहते हैं. मैं भी भगवान से प्रार्थना करती हूं इन यात्रियों की प्रार्थना कुबूल हो.’

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भारत-पाक मैत्री एवं शांति यात्रा के कार्यकर्ताओं के साथ जसोदा बेन.

अहमदाबाद: जसोदा बेन 19 जून को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से निकली ‘भारत पाक मैत्री एवं शांति यात्रा’ में शामिल हुईं और कहा, ‘इन यात्रियों को मैं बधाई देती हूं जो विश्व शांति चाहते हैं मैं भी भगवान से प्रार्थना करती हूं इन यात्रियों की प्रार्थना कुबूल हो.’

जसोदा बेन ने सरहद पर सैनिकों की हत्याओं को भी गलत बताया साथ ही किसी भी सैनिक की किसी भी सरहद पर हत्या न हो इसकी भगवान से प्रार्थना की.

जसोदा बेन के साथ उनके भाई अशोक मोदी भी यात्रा के स्वागत के लिए आये. इस दौरान भारत-पाकिस्तान यात्रा जिंदाबाद, युद्ध नहीं शांति चाहिए, पूरी दुनिया में शांति कायम हो, परमाणु शस्त्र नष्ट करो, दक्षिण एशिया को परमाणु मुक्त घोषित करो जैसे नारे लगाये गए जिसे जसोदा बेन और अशोक मोदी ने समर्थन दिया.

आप को बता दें सोशिलिस्ट विचारधारा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित संदीप पांडेय की अगुआई में 19 जून को भारत-पाकिस्तान मैत्री एवं शांति यात्रा निकाली गई लेकिन अहमदाबाद पुलिस द्वारा अनुमति न मिलने पर पहले दिन पांडेय सहित अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया था. उनके छूटने के बाद गांधीनगर से दोबारा यात्रा शुरू की गई थी जो 30 जून को भारत-पाक सीमा नडाबेट पर समापन कार्यक्रम के साथ समाप्त होगी. 30 जून को समापन समारोह में बड़ी संख्या में सिविल सोसाइटी तथा राजनैतिक लोगों के शामिल होने की संभावना है.

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भारत-पाक मैत्री एवं शांति यात्रा के कार्यकर्ताओं के साथ जसोदा बेन.

इस मौके पर संदीप पांडेय ने बताया, ‘पूरी यात्रा में अब तक केवल तीन से चार लोग ही ऐसे मिले हैं जिन्होंने यह कहा कि भारत-पाक मित्रता हो ही नहीं सकती अधिकतर लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और इस मुद्दे को समर्थन भी दिया.’

पांडेय ने आगे बताया, ‘मोदी सरकार के चार वर्षीय शासन के बाद जनता को समझ में आ गया है मुंहतोड़ जवाब देने वाली सरकार के पास भी कोई विकल्प नहीं है अब सही रास्ता यही है कि दोनों देश रिश्ते अच्छे करें. इस यात्रा की सब से बड़ी उपलब्धि यही है कि इस मुद्दे को आम जनता और जसोदा बेन का समर्थन मिला.’

पांडेय ने बताया यात्रा जब बलिसना गांव पहुंची तो लोगों ने जोरदार स्वागत किया. इस गांव में 100 से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनकी रिश्तेदारियां पाकिस्तान में है लेकिन इन्हें पाकिस्तान का वीजा मिल पाना असंभव सा है.

 

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