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प्रतिभाओं की कमी से कंपनियां बेहाल, भारत सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में: सर्वे

एशिया प्रशांत के देश सबसे अधिक प्रतिभाओं की कमी का सामना कर रहे हैं. जापान, ताइवान, हांगकांग, सिंगापुर और भारत शीर्ष दस देशों में शुमार हैं. विश्व में सबसे अच्छी स्थिति चीन की है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: दुनिया भर की कंपनियां 12 वर्षों में सबसे अधिक प्रतिभाओं की कमी का सामना कर रही हैं और भारत इससे प्रभावित होने वाले शीर्ष दस देशों में शुमार है. भारत में 56 प्रतिशत कंपनियों को पदों को भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई. मैनपॉवर समूह के हालिया प्रतिभा की कमी से संबंधित सर्वेक्षण के अनुसार, दुनियाभर की करीब 40,000 कंपनियों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, इसमें से 45 प्रतिशत कंपनियों को नौकरियों को भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

समूह के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनास प्रेजिंग ने कहा, ‘दुनियाभर में प्रतिभाओं की भारी कमी के बीच सवाल प्रतिभा खोजने का नहीं, बल्कि प्रतिभा का निर्माण करने का है.’

उन्होंने कहा कि संगठनों को कर्मचारियों को फिर से कुशल बनाने और उनकी प्रतिभा को बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए ताकि कंपनियां काम के इस नए माहौल में टिक सकें और लोगों के पास लंबे समय के लिए रोजगार सुरक्षा हो.

प्रतिभा की कमी के मामले में दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रभावित देश जापान है, यहां 89 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि उन्हें पदों को भरने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसके बाद रोमानिया (81 प्रतिशत) और ताइवान (78 प्रतिशत) का स्थान है.

प्रतिभाओं की कमी का सामना कर रहे शीर्ष दस देशों में हांगकांग (76 प्रतिशत), बुलगारिया (68 प्रतिशत), तुर्की (66 प्रतीत), यूनान (61 प्रतिशत), सिंगापुर (56 प्रतिशत) और स्लोवाकिया (54 प्रतिशत) हैं.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि जैसे-जैसे कंपनियां डिजिटल और बदलाव की ओर बढ़ रही हैं, सही तकनीकी कौशल वाले उम्मीदवार की तलाश करना उनके लिए और महत्वपूर्ण हो गया है.

इस बीच प्रतिभाओं की कमी का सबसे कम सामना चीन को करना पड़ रहा है. यहां केवल 13 प्रतिशत कंपनियों ने प्रतिभा की कमी की बात कही. इसके बाद 18 प्रतिशत के साथ आयरलैंड, 19 प्रतिशत के साथ ब्रिटेन, 24 प्रतिशत के साथ नीदरलैंड और स्पेन दोनों का नंबर आता है.

क्षेत्रीय आधार पर एशिया प्रशांत राष्ट्र सबसे अधिक इस समस्या का सामना कर रहे हैं. सर्वे में सबसे अधिक प्रभावित शीर्ष 10 में से 5 जापान, ताइवान, हांगकांग, सिंगापुर और भारत हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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