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मध्य प्रदेश: अपनी ही सरकार के मंत्री के ख़िलाफ़ सदन में धरने पर बैठीं भाजपा विधायक

रीवा ज़िले के सेमरिया से विधायक नीलम मिश्रा ने प्रदेश के खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर आरोप लगाते हुए कहा कि मैंने खनिज का मामला उठाया था, बदला लेने के लिए मंत्री मेरे पति और पूरे परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल (फोटो साभार: फेसबुक)

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल (फोटो साभार: फेसबुक)

भोपाल: मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से सत्तारूढ़ भाजपा की महिला विधायक नीलम अभय मिश्रा ने मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे एवं अंतिम दिन अपने परिवार पर पुलिस ज्यादती का आरोप लगाते हुए आसंदी के सामने बैठकर करीब 40 मिनट तक धरना दिया और इस दौरान वह रोईं भी.

नीलम ने अपना धरना राज्य सरकार द्वारा उन्हें सुरक्षा देने के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों के साथ उचित व्यवहार का आश्वासन देने के बाद समाप्त किया.

इस दौरान उनके साथ आसंदी के सामने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं बसपा की चार अन्य महिला विधायक भी बैठी रहीं. उनका आरोप था कि प्रदेश सरकार के एक मंत्री के इशारे पर पुलिस उनके परिवार को प्रताड़ित कर रही है.

धरने पर बैठने से पहले शून्यकाल के दौरान नीलम अपनी सीट पर खड़ी हुईं और कहा कि उनके परिवार के सदस्यों पर रीवा जिले की पुलिस द्वारा झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं. इससे सरकार दुविधा में आ गई. उन्होंने अपने एवं अपने परिजनों के लिए सरकार से सुरक्षा की मांग की.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के पावरफुल नेताओं के कहने पर रीवा के पुलिस अधीक्षक मेरे एवं मेरे परिवार के सदस्यों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं.’

नीलम ने कहा कि वह इस साल के अंत में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. इस मुद्दे पर भाजपा विधायक नीलम को विपक्षी दल कांग्रेस का पूरा समर्थन मिला.

दैनिक भास्कर के मुताबिक उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में खनिज एवं उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर आरोप लगाते हुए सदन में कहा, ‘मैंने खनिज का मामला उठाया था. इसलिए उसका बदला लेने के लिए मंत्री मेरे पति और पूरे परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘पहले कभी सदन में बोली नहीं, पहली बार अपनी व्यथा बताने के लिए दो मिनट का समय चाहती हूं. आखिरी बार अपनी बात रखूंगी, इसके बाद कभी नहीं बोलूंगी. मेरी बात सुननी पड़ेगी, नहीं सुनी गई तो सदन में खड़ी रहूंगी, बैठूंगी नहीं.’

इसके बाद उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, ‘मंत्री के दबाव में भारी पुलिस बल रोज मेरे घर भेजा जा रहा है. रीवा रेलवे स्टेशन पर भी मेरे पति को गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया. उनका कुसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने कांग्रेस की कोई बैठक ली. क्या यह कोई जुर्म है?’

वे आगे कहती हैं, ‘मंत्री के दबाव में वहां के एसपी काम कर रहे हैं. हमें झूठे प्रकरणों में फंसाया जा रहा है. मैं गृहमंत्री से आश्वासन चाहती हूं, वहां के एसपी को निर्देशित करें. मेेरे पूरे परिवार की रक्षा करें. स्थानीय मंत्री से क्षेत्र के सारे विधायक इतने प्रभावित हैं कि कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं. मेरी ही पार्टी के विधायक मुझे अपनी बात नहीं रखने दे रहे हैं. लेकिन मैं बोल रही हूं, मुझे कोई डर नहीं है.’

विधायक आगे बोलीं, ‘सत्तापक्ष में होने के बाद भी हमारी बात नहीं सुनी जा रही है तो मेरे विधायक रहने का क्या मतलब? क्या गृहमंत्री मुझे प्रताड़ित करने वाले एसपी पर कार्रवाई करेंगे.’

(फोटो साभार: फेसबुक)

सेमरिया से भाजपा विधायक नीलम अभय मिश्रा (फोटो साभार: फेसबुक)

कांग्रेस सदस्यों ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि इस सरकार में भाजपा की विधायक ही असहाय हैं तो आम लोगों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह को कहा कि नीलम की शिकायत का जवाब दें.

इस पर सिंह ने आश्वासन देते हुए कहा कि राज्य सरकार उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी.

हालांकि, इस आश्वासन के बाद भी नीलम शांत नहीं हुईं और कहा, ‘मेरे परिवार पर हो रहे जुल्मों को रोका जाये और झूठे मामलों में उन पर मुकदमे न चलाएं जाएं.’

इस पर गृहमंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि वे रीवा पुलिस अधीक्षक से बात करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी व्यक्ति पर अनुचित कार्रवाई न हो.

इस जवाब से असंतुष्ट होकर नीलम करीब दोपहर एक बजकर पांच मिनट पर अचानक अपनी सीट से उठकर आसंदी के पास चली गईं और वहां नीचे धरने पर बैठ गईं. पत्रिका के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मंत्री यहां आश्वासन दे रहे हैं, दूसरी तरफ पुलिस ने मेरे पति को हिरासत में ले लिया है.’

गौरतलब है कि नीलम के पति अभय मिश्रा को इंदौर-बैतूल हाईवे पर पुलिस ने मंगलवार को गिरफ़्तार कर लिया था.

इसके बाद कांग्रेस सदस्य भी आसंदी से पास जाकर नारेबाजी करने लगे.

इसी बीच, गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह भी नीलम के पास गए और धरने पर बैठकर रो रही महिला विधायक से बात की. इसी बीच, कांग्रेस एवं बसपा की चार महिला विधायक भी नीलम के पास गईं और उनके बगल में बैठ गईं.

हंगामे के कारण अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी. लेकिन, तब भी नीलम एवं चार अन्य महिला विधायक वहीं धरने पर डटी रहीं.

जब सदन की कार्यवाही दुबारा शुरू हुई तो विधानसभाध्यक्ष कार्यसूची में शामिल विषयों को तेजी से निपटाने लगे. इस दौरान भी पांचों महिलाएं धरने पर बैठीं रहीं.

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत ने सरकार को घेरते हुए कहा, ‘भाजपा विधायक आंसू बहा रहीं हैं. शर्म करो, शर्म करो.’

इसके बाद कांग्रेस के तकरीबन सभी सदस्य आसंदी के पास जाकर खड़े हो गए और चिल्लाने लगे, ‘महिलाओं का सम्मान बचाओ.’

पत्रिका के मुताबिक, जब  गृहमंत्री ने कहा कि पुलिस ने उनके पति को रिहा कर दिया है तब उन्होंने धरना खत्म किया. वहीं, इस दौैरान कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से जुड़ने का भी प्रस्ताव दिया.

गौरतलब है कि नीलम के पति अभय मिश्रा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं. पहले वे भाजपा में हुआ करते थे और 2008 में भाजपा के टिकट पर सेमरिया सीट से ही विधानसभा चुनाव जीते थे.  2013 में पार्टी ने उनकी पत्नी को टिकट दिया था.

वहीं, सोमवार को भी भाजपा विधायक ने पुलिस से अपने और अपने पति की जान का खतरा होने का हवाला देकर आवदेन के माध्यम से आईजी उमेश जोगा से सुरक्षा की मांग की थी. वे यहां तक कह चुकी हैं कि राजेंद्र शुक्ल उनके पति का एनकाउंटर करा देंगे.

वहीं, पूरे मामले पर सफाई देते हुए राजेंद्र शुक्ल ने का कहना है कि उन पर लगाए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. वे दैनिक भास्कर से कहते हैं, ‘जो यह कह रहे हैं कि खनिज का मामला उठाया तो हम बदले की कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इनका तो काम अवैध खनन करना और करवाना है. नीलम मिश्रा के पति तो कांग्रेस में जा चुके हैं. वे सब उनके इशारे पर कर रही हैं. आगे नीलम मिश्रा कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी में हैं. इसलिए अनर्गल आरोप लगा रही हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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