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उत्तर प्रदेश: अलीगंज फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में लखनऊ के पूर्व डिप्टी मेयर सहित चार को उम्र कै़द

लखनऊ के अलीगंज इलाक़े में 24 साल पहले पुलिस ने एक मुठभेड़ में गैंगस्टर गोपाल मिश्रा को मार गिराने का दावा किया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: विकिमीडिया कॉमंस)

(प्रतीकात्मक फोटो: विकिमीडिया कॉमंस)

लखनऊ: एक स्थानीय अदालत ने लखनऊ के पूर्व डिप्टी मेयर और तीन अन्य लोगो ंको 24 साल पहले अलीगंज इलाके में हुई फर्ज़ी मुठभेड़ के एक मामले में उनकी संलिप्तता के चलते शुक्रवार को उम्र कैद की सजा सुनाई. मुठभेड़ में एक व्यक्ति मारा गया था.

लखनऊ के पूर्व डिप्टी मेयर अभय सेठ, अलीगंज ट्रेडर्स यूनियन के तत्कालीन महामंत्री अशोक मिश्रा और दो पुलिस कांस्टेबल- राम चंदर सिंह और शिवभूषण तिवारी-को अदालत ने दोषी माना है.

अलीगंज इलाक़ा थााना के तत्कालीन स्टेशन अफ़सर डी.डी.एस राठोर और कांस्टेबल मुंशीलाल का नाम भी चार्जशीट में शामिल था पर दोनों की ही ट्रायल के दौरान मौत हो गई.

सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साबित करने में सफल हुआ कि चारों आरोपी फर्जी मुठभेड़ में शामिल थे.

26 फरवरी 1994 को अलीगंज पुलिस ने दावा किया था कि उसने एक गैंगस्टर गोपाल मिश्रा को एक मुठभेड़ में मार गिराया था.

तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इस मामले की जांच के लिए 11 दिसंबर, 1997 को सीबी-सीआईडी को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था. जिसने अपनी जांच रिपोर्ट में पुलिस की मुठभेड़ को फर्जी बताया और इसे सुनियोजित हत्या का मामला ठहराया था.

अपनी जांच में सीबीसीआईडी ने पाया कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था और सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल  किया था.

7 अक्टूबर 2008 को अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर लिए थे और ट्रायल शुरू हुआ. अदालत में अभियोजन की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए थे, जिनमें मृतक की मां भी शामिल थी जो कि घटना की प्रत्यक्षदर्शी भी थीं.

अभियोजन पक्ष के अनुसार अशोक कंस्ट्रक्शन का काम करता था. उसने अलीगंज में एक कॉम्प्लेक्स बनाया था. उससे प्रभावित होकर गोपाल भी उसके साथ रहने लगा.

फैसले में कहा गया है कि बाद में गोपाल भी उस ज़मीन पर कॉम्प्लेक्स बनाना चाहता था जिस पर अशोक की पहले से नज़र थी.

घटना के दिन पुलिस की एक टीम ने गोपाल के घर पर छापा मारा. अशोक मिश्र और अभय सेठ भी पुलिस के साथ थे.

अभियोजन पक्ष ने कहा कि पुलिस ने गोली मारकर गोपाल को मार दिया और एक देसी बंदूक वहां रख दी जो कि अशोक द्वारा उपलब्ध कराई गई थी.

दोनों पुलिसकर्मी कांस्टेबल रामचंदर सिंह चंदेल और शिवभूषण तिवारी घटना के समय अलीगंज थाना में तैनात थे. फ़र्ज़ी एनकाउंटर में शामिल होने के आरोप में अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा के साथ चारों दोषियों पर दस-दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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