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गडकरी से तुलना पर उमा भारती का रामदेव को पत्र, चालाकी, चापलूसी और साजिश मुझे नहीं आती

एक टीवी चैनल से बातचीत में बाबा रामदेव ने गंगा स्वच्छता कार्यक्रम को लेकर एक सवाल के जवाब में कहा था कि उमा जी की फाइल ऑफिस में अटक जाती है, जबकि गडकरी जी की फाइल नहीं अटकती. देश में सबसे ज्यादा किसी मंत्री का काम दिखता है तो वह नितिन गडकरी का है.

(फोटो साभार: ट्विटर/@yogrishiramdev)

(फोटो साभार: ट्विटर/@yogrishiramdev)

नई दिल्ली: गंगा सफाई कार्यक्रम को लेकर बाबा रामदेव द्वारा नितिन गडकरी से तुलना किए जाने की खबर से आहत केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने योग गुरू को पत्र लिखकर कहा है कि उनके मुंह से निकला ऐसा कोई भी जुमला उन्हें (उमा भारती) हानि पहुंचा सकता है.

बाबा रामदेव को लिखे पत्र में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने कहा कि मुझे आपके द्वारा गंगा की विवेचना करते समय दो मंत्रियों की तुलना करना अजीब लगा. मैं स्वयं भी नितिन गडकरी जी की प्रशंसक हूं.UBL 1

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के सामने लंदन से किसी टीवी चैनल पर मेरे बारे में चर्चा करते समय शायद यह आपको ध्यान नहीं रहा कि आप मुझे निजी तौर पर आहत और मेरे आत्मसम्मान पर आघात कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आठ साल की उम्र से अभी तक इन 50 सालों में घोर परिश्रम, विचारनिष्ठा और राष्ट्रवाद मेरी शक्ति हैं और इसी विश्वसनीयता ने राजनीति में मुझे उचित स्थान दिलाया है.

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उन्होंने कहा कि आप मेरे मार्गदर्शक रहे हैं. अक्टूबर महीने में गंगोत्री से गंगासागर तक लाखों लोग गंगा के किनारे स्वच्छता और वृक्षारोपण कार्यक्रम में भागीदारी करेंगे.  मैं आपसे और सभी संतों से इसके लिए निवेदन करती हूं.

उन्होंने आगे लिखा, ‘चूंकि आपने सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी की है, इसलिए मैं भी इस पत्र को सार्वजनिक करूंगी.’

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उल्लेखनीय है कि लंदन में एक टीवी चैनल से बातचीत में योगगुरू रामदेव ने गंगा स्वच्छता कार्यक्रम के संदर्भ में एक सवाल के जवाब में कहा था कि उमा जी की फाइल आफिस में अटक जाती है जबकि गडकरी जी की फाइल नहीं अटकती. उन्होंने कहा था कि देश में सबसे ज्यादा किसी मंत्री का काम दिखता है तो वह नितिन गडकरी का है.

हालांकि, उमा भारती के पत्र के बाद रामदेव का भी बयान आया है. उन्होंने एक ट्वीट किया है और अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया है.

उन्होंने लिखा है, ‘उमा भारती जी के साथ मेरा आध्यात्मिक भाई-बहन का संबंध है. उनके सम्मान को आहत करने की मेरी कोई मंशा नहीं थी. मेरा मकसद गंगा की कार्ययोजना पर उन्हें आ रही प्रारंभिक, व प्रशासनिक कठिनायों की ओर इशारा करना भर था. उनकी गंगा-निष्ठा, धर्म-निष्ठा और राष्ट्र-निष्ठा प्रशंसनीय है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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