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विपक्ष का एकमात्र एजेंडा मुझे हटाना है, मेरे प्रति घृणा ही उन्हें जोड़े रखती है: नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1977 में आपातकाल के बाद लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दल साथ आए, 1989 में बोफोर्स के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़. आज का गठबंधन अपने अस्तित्व और सत्ता की राजनीति से प्रेरित है, देशहित से कोई लेना देना नहीं है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the inaugural ceremony of the World Culture Festival, in New Delhi on March 11, 2016.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के प्रस्तावित महागठबंधन को अपने प्रतिद्वंदियो की प्रधानमंत्री बनने की महादौड़ करार दिया जो निजी अस्तित्व और सत्ता की राजनीति से प्रेरित है.

मोदी ने ‘स्वराज्य’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा कि विपक्ष के पास उन्हें हटाने के अलावा कोई और एजेंडा नहीं है और ‘मोदी के प्रति घृणा’ इन्हें बांधे रखने का एकमात्र कारक है.

प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले लोकसभा चुनाव में लोग भाजपा को जनादेश देकर सत्ता में दोबारा लाएंगे.

कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा खारिज कर दिये जाने के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी अब अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है और अपने सहयोगियों की तलाश में हर ओर जा रही है.

प्रधानमंत्री ने अगले लोकसभा चुनाव को सुशासन एवं विकास तथा अफरातफरी के बीच पसंद बनाने का मुकाबला बताया. उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस और जदएस ने सरकार बनाने के लिए जनादेश हथिया लिया और विकास का मुद्दा पीछे चला गया.

कर्नाटक को झलकी करार देते हुए उन्होंने कहा, ‘किसी भी चुनाव में बिना विचारधारा होना और अवसरवादी गठजोड़ अफरातफरी की गारंटी होता है.’

उन्होंने कहा कि आप उम्मीद करते हैं कि मंत्रियों की बैठक विकास के मुद्दों का निपटारा करने के लिए होगी लेकिन कर्नाटक में वे आपसी लड़ाई को सुलझाने के लिए बैठक करते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ती है और एक के बाद एक राज्य में उसे मिल रहा जनादेश ऐतिहासिक है.

उन्होंने कहा, ‘और इसलिए मुझे विश्वास है कि लोग हमारे ऊपर भरोसा करेंगे. उनका मोदी को हटाने के अलावा और कोई एजेंडा नहीं है. मोदी के प्रति धृणा उन्हें एक साथ जोड़े रखने का एकमात्र कारक है.’

प्रधानमंत्री ने विपक्ष की एकजुटता के प्रयासों की तुलना 1977 और 1989 के चुनाव के समय विपक्ष की पहल से करने को सिरे से खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा कि 1977 में आपातकाल के बाद लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दल साथ आए थे और उसके 12 वर्ष बाद बोफोर्स से जुड़े भ्रष्टाचार ने पूरे देश को आहत किया था.

मोदी ने कहा कि आज जो गठबंधन की बात हो रही है, वह अपने अस्तित्व और सत्ता की राजनीति से प्रेरित है. इनका देशहित से कोई लेना देना नहीं है.

उन्होंने कहा कि विपक्ष का पूरा ध्यान सत्ता की राजनीति पर है जहां राहुल गांधी कह रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की भी इस पद पर नजर है लेकिन वामदलों को उनसे समस्या है.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सोचती है कि उसके नेता किसी अन्य की बजाए प्रधानमंत्री बनने के पात्र हैं. उन्होंने कहा कि इन दलों के नेताओं की आपसी नापसंदगी और अविश्वास कितने समय तक एक दूसरे को साथ रख सकता है.

यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी सहयोगी दल क्या साथ हैं और क्या राजग आज कमजोर हुई है, प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि उनकी पार्टी गठबंधन को मजबूरी नहीं बल्कि विश्वास के प्रतीक के रूप में देखती है.

उन्होंने कहा कि बड़ा और विविधतापूर्ण राजग भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा है और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान करना सबसे जरूरी है. राजग इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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