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एससी-एसटी एक्ट पर फैसला देते वक़्त दिमाग में आपातकाल था: जस्टिस एके गोयल

जस्टिस एके गोयल शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हो गए हैं. उन्हें एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

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आदर्श कुमार गोयल (फोटो साभार: orissahighcourt.nic.in)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए. वह हरियाणा से ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्हें शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनने का गौरव प्राप्त हुआ.

कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश के मुताबिक, न्यायमूर्ति गोयल को पांच साल के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है.

अपने विदाई समारोह में आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कानून से जुड़ी सुनवाई के समय व्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा सामने आने पर उनके दिमाग में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने के लिए आपातकाल के दौरान की गई गलतियां थीं.

न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में बीस मार्च के अपने फैसले का बचाव करते हुये कहा, ‘अगर अदालतें निर्दोषों के मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकतीं तो अदालतों को बंद हो जाना चाहिए.’

इस फैसले में कड़े अजा, अजजा (अत्याचार निवारण) कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए दिशानिर्देश तय किए गए थे. न्यायमूर्ति गोयल इस कानून के कथित अंधाधुंध दुरुपयोग पर चिंता जताने वाले फैसले से सुर्खियों में आ गए थे.

इस फैसले में कहा गया था कि कानून के तहत शुरुआती जांच के बिना गिरफ्तारी नहीं होगी और कोई कार्रवाई करने से पहले पुलिस द्वारा शुरुआती जांच की जानी चाहिए. इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह उपस्थित थे.

इसके अलावा जस्टिस गोयल ने तीन तलाक और वैवाहिक विवादों में महिलाओं के लिए सुरक्षा मानक जैसे सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर कई विवादास्पद मामलों को देखा.

सुप्रीम कोर्ट में उनका चार साल का कार्यकाल था. गोयल को जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था.

वह मुसलमानों में एक बार में तीन तलाक के मुद्दे को पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेजने जैसे महत्वपूर्ण कदम के लिए जाने जाएंगे. संविधान पीठ ने एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक एवं गैर कानूनी घोषित कर दिया था.

हाल में जस्टिस गोयल ने यह पड़ताल करने का फैसला किया था कि क्या किसी पुरुष पर तब कोई दीवानी दायित्व लगाया जा सकता है जब वह किसी महिला के साथ लंबे समय तक रहने और पारस्परिक सहमति से यौन संबंधों के बाद शादी के वायदे से मुकर जाए.

जस्टिस गोयल ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में अदालतों में सीसीटीवी लगाए जाने का पक्ष लेते हुए कहा कि अदालत कक्षों में निजता की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहां कुछ निजी नहीं होता है.

उन्होंने गुरुवार को जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन को निर्देश दिया था कि वह मंदिर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भगवान के दर्शनों की अनुमति देने पर विचार करे चाहे उसका धर्म कोई भी हो.

न्यायमूर्ति गोयल 16 अक्तूबर 2016 को दिए गए एक और ऐतिहासिक आदेश से जुड़े थे जिसमें राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को निरस्त कर दिया गया था.

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल को अब एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. पिछले साल 20 दिसंबर को न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की सेवानिवृति के बाद एनजीटी अध्यक्ष का पद छह महीने से अधिक समय से खाली था.

न्यायमूर्ति कुमार की सेवानिवृति के बाद न्यायमूर्ति उमेश दत्तात्रेय साल्वी को एनजीटी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया. वह 13 फरवरी को सेवानिवृत हुए. इसके बाद, न्यायमूर्ति जवाद रहीम को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया. अभी राष्ट्रीय राजधानी में एनजीटी की प्रधान पीठ काम कर रही है जिसमें न्यायमूर्ति रहीम, न्यायमूर्ति आरएस राठौड़ और न्यायमूर्ति एसएस गरब्याल शामिल हैं.

पर्यावरण से जुड़े कई मामले अभी एनजीटी के समक्ष लंबित हैं, जिनमें वायु प्रदूषण, गंगा और यमुना की सफाई, वैष्णो देवी और दिल्ली में पुनर्विकास की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं. पदों के खाली रहने से एनजीटी का कामकाज प्रभावित होता रहा है. इस अधिकरण में अधिकारियों के 20 स्वीकृत पदों में से अभी ज्यादातर पद खाली हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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