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लोकतंत्र और देशभक्ति जैसे शब्द अपना अर्थ खो चुके हैं: सईद अख़्तर मिर्ज़ा

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मकार सईद अख़्तर मिर्ज़ा की किताब के लोकार्पण के मौके पर फिल्मकार महेश भट्ट ने कहा कि हमारे देश की आत्मा सरकार से बहुत बड़ी है. यह देश सरकार नहीं है.

फिल्मकार सईद अख़्तर मिर्ज़ा, सामाजिक कार्यकर्ता रितु दीवान और फिल्मकार महेश भट्ट. (फोटो साभार: यूट्यूब)

फिल्मकार सईद अख़्तर मिर्ज़ा, सामाजिक कार्यकर्ता रितु दीवान और फिल्मकार महेश भट्ट. (फोटो साभार: यूट्यूब)

मुंबई: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक सईद अख़्तर मिर्ज़ा ने कहा है कि आज लोकतंत्र और देशभक्ति जैसे शब्द अपना अर्थ खो चुके हैं और देश को इन्हें पुन:प्राप्त करने की ज़रूरत है.

‘मोहन जोशी हाज़िर हो’, ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’, ‘सलीम लंगड़े पे मर रो’ और ‘नसीम’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाने वाले फिल्म निर्देशक ने बीते शनिवार को मुंबई में अपनी पुस्तक, ‘मेमोरी इन द एज आॅफ एमनेशिया: अ पर्सनल हिस्ट्री आॅफ आवर टाइम्स’ के लोकार्पण के मौके पर यह बात कहीं.

यह किताब मिर्ज़ा के निजी जीवन के अनुभवों पर आधारित है जिसमें भूत और वर्तमान के बीच तारतम्य बिठाने की कोशिश की गई है.

उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र, देशभक्ति, राष्ट्रीय हित जैसे शब्द आज अपना अर्थ खो चुके हैं. हमें इन शब्दों को पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता है. यह पुस्तक लोगों को अतीत की याद दिलाने और उन्हें उम्मीद देने के लिए है. मैं पुस्तक नहीं लिखता हूं, वो मेरे दिमाग में मेरे अनुभवों और यादों के रूप में है.’

शैक्षणिक-कार्यकर्ता रितु दीवान और फिल्म निर्देशक महेश भट्ट ने इस पुस्तक का लोकार्पण किया.

कार्यक्रम में महेश भट्ट ने कहा, ‘हमारे देश की आत्मा सरकार से बहुत बड़ी है; यह देश सरकार नहीं है. इस वास्तविकता पर यह किताब दृढ़तापूर्वक प्रकाश डालती है.’

इस मौके पर आशुतोष गोवारिकर, सुधीर मिश्रा, अज़ीज़ मिर्ज़ा और मकरंद देशपांडे भी मौजूद थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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