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दिल्ली: फीस जमा न करने पर स्कूल ने बच्चों को बेसमेंट में बंधक बना कर रखा

अभिभावकों का आरोप है कि दिल्ली के बल्लामारान स्थित राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल में बच्चों को सुबह 7:30 बजे से ही बेसमेंट में बंद रखा गया था. दोपहर 12:30 बजे उनके पहुंचने पर बच्चों को बाहर निकाला गया. बेसमेंट में न पंखा था, न हवा आने की जगह.

(फोटो साभार: फेसबुक/Peter Fernandes)

(फोटो साभार: फेसबुक/Peter Fernandes)

दिल्ली: राजधानी दिल्ली के एक स्कूल द्वारा कथित रूप से फीस जमा नहीं करने पर नर्सरी और एलकेजी में पढ़ने वाले मासूमों को पांच घंटे तक बेसमेंट में बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है. इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब इस घटना की कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुआ. पुलिस ने इस मामले में स्कूल के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कर ली है.

वहीं, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस घटना पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है.

अभिभावकों का आरोप है कि छात्रों को सुबह 7:30 बजे से ही स्कूल के बेसमेंट में रखा गया था. छुट्टी के समय जब छात्र बाहर नहीं निकले तो अभिभावकों को इसकी जानकारी मिली.

घटना चांदनी चौक के बल्लीमारान स्थित राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल की है.

पुलिस ने बताया कि कुछ अभिभावकों ने उसे इस बात की जानकारी दी कि शिक्षकों ने 16 बच्चों को सुबह सात बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक बंद रखा.

तो वहीं, नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, 59 बच्चियों को 5 घंटे बेसमेंट में बंधक बनाकर रखा गया था.

पुलिस ने बताया कि स्कूल से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति की तलाश की जा रही है.

परिजनों ने आरोप लगाया है कि बेसमेंट रूम के बाहर कुंडी लगाकर उनकी बच्चियों को भूखा प्यासा रखा गया. उन्होंने जब बेसमेंट रूम के दरवाजे खोले तो बच्चियां जमीन पर बैठी हुईं थीं .इस बारे में पूछे जाने पर स्कूल का स्टाफ़ भी संतुष्टि भरा जवाब नहीं दे पाया. परिजनों का दावा है कि वहां पंखा भी नहीं था.

बच्चियां अपने अभिभावकों को देखते ही रो पड़ीं. बच्चियों की हालत देख नाराज़ परिजनों ने स्कूल के बाहर जमकर हंगामा किया. पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

स्कूल ने अपने बचाव में तर्क दिया कि बच्चियों के अभिभवाकों द्वारा जून महीने की फीस अब तक जमा नहीं की गई है, जबकि अभिभावकों ने स्कूल के आरोपों को खारिज कर दिया और फीस समय पर जमा कराने की रसीदें भी पुलिस को दिखाईं.

अभिभावकों का कहना है कि जब उन्होंने स्कूल की हेड मिस्ट्रेस फरहा डीबा खान से बात की तो उन्होंने बेहद ही बदतमीजी से बात करते हुए बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने की धमकी दी.

एक अभिभावक फातिमा बेगम ने द हिंदू को बताया, ‘जब मैं अपनी बच्ची को लेने स्कूल पहुंची, हमें शिक्षकों द्वारा बताया गया कि छात्र बेसमेंट में हैं. जब हमने पूछा क्यों, उन्होंने हमें बताया कि उन्हें वहां फीस जमा नहीं करने की वजह से रखा गया है. हम बेसमेंट में तुरंत गए और बच्चों को निकाला. कमरे में हवा आने की की जगह नहीं थी और मेरी बच्ची रो रही थी. ‘

लगभग 50 अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस में मामला दर्ज कराया.

एक अन्य अभिभावक मोहम्मद आसिफ ने कहा, ‘मैंने अपनी बेटी को सुबह करीब सात बजे स्कूल छोड़ा. जब मैं उसे लेने दोपहर 12:30 बजे स्कूल गया, वह अपनी कक्षा में नहीं मिली. मुझे स्कूल स्टाफ द्वारा बताया गया कि मेरी बेटी को बेसमेंट में बंद कर दिया गया है. मैं बेसमेंट में तुरंत गया जहां बेटी को जमीन पर बैठा पाया. सभी छात्रों को एक छोटे कमरे में, जहां अमानवीय हालात थे और न पंखा था और न हवा के आने के लिए कोई जगह, बंद रखा गया था.’

मामले की जानकारी होने पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ‘मैं भी यह जानकर चौंक गया. जैसे ही मैंने कल इस बारे में सुना मैंने फौरन अधिकारियों को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है.’

सिसोदिया ने एक और ट्वीट कर बताया, ‘मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल के मामले पर रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने 12.30 बजे सभी तथ्यों के साथ शिक्षा सचिव और निदेशक बुलाया है.’

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस संबंध में शिक्षा विभाग से रिपोर्ट मांगी है.

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आज ट्वीट किया, ‘मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राबिया पब्लिक स्कूल के मामले पर रिपोर्ट मांगी है. उन्होंने शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को सभी तथ्यों के साथ बुलाया है.’

स्कूल प्रशासन मुद्दे पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं था.

केजरीवाल और सिसोदिया के गुरुवार को स्कूल का दौरा करने और छात्राओं, उनके माता-पिता तथा स्कूल के अधिकारियों से मिलने की संभावना है. मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘मैं और उपमुख्यमंत्री गुरुवार सुबह 10 बजे स्कूल जाएंगे. बच्चियों, उनके माता-पिता और स्कूल अधिकारियों से मिलेंगे.’

इस बीच, दिल्ली महिला आयोग ने भी मामले में पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है. आयोग ने फीस न भरे जाने पर केजी के बच्चों को कथित तौर पर बेसमेंट में बंद किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है.

आयोग ने कहा, ‘यह काफी गंभीर मामला है.’ डीसीडब्ल्यू ने अधिकारियों से सात जुलाई तक रिपोर्ट दायर करने को कहा है.

नवभारत टाइम्स की अन्य ख़बर के अनुसार, शिक्षा विभाग की टीम जांच के लिए स्कूल पहुंची है.

मामले में दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन ने स्कूल की प्रिंसिपल को आड़े हाथों लेते हुए कई सवाल किए. उन्होंने पूछा कि स्कूल ने सरकारी नियमों का पालन क्यों नहीं किया.

साथ ही इमरान ने कहा कि सरकारी नियमानुसार फीस न देने पर बच्चों को स्कूल या कक्षा में बैठने से रोका नहीं जा सकता. मंत्री ने प्रिंसिपल को फटकार लगाते हुए मामले को गंभीर व शर्मनाक बताया है.

बता दें कि स्कूल में 2000 से ज्यादा छात्राएं पढ़ती हैं और मासिक फीस 3000 रुपये है.

द हिंदू के मुताबिक, स्कूल के एक वरिष्ठ शिक्षक ने बताया कि नियमों के अनुसार स्कूल की फ़ीस हर महीने की 30 तारीख़ तक जमा करानी होती है वरना बच्चों को कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती.

उन्होंने यह भी बताया, ‘स्कूल प्रशासन द्वारा सटीक जानकारी नहीं मिलने के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. एकाउंट डिपार्टमेंट से बात कर इसको सुलझाया जाएगा. कुछ अभिभावकों ने ‘शिक्षक प्रति’ स्कूल में नहीं जमा कराई जिसकी वजह से भी भ्रम की स्थिति पैदा हुई.

वे आगे कहती हैं कि बच्चों को बंधक बनाकर नहीं रखा गया था. वो बेसमेंट नहीं, बल्कि ‘एक्टिविटी रूम’ है जहां बच्चे खेलते हैं.

(समचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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