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चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी पर निर्वाचन आयोग ने लगाई रोक

निर्वाचन आयोग ने मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए हैं कि वो किसी भी चुनाव के नतीजों से जुड़ी ज्योतिषियों, टैरो कार्ड रीडर और पंडितों की भविष्यवाणी को प्रसारित न करें.

UP Poll

(स्क्रीनशॉट: यूट्यूब)

आयोग ने कहा है कि ऐसा करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा. इससे पहले आयोग चुनाव प्रक्रिया के दौरान एग्ज़िट पोल पर भी पाबंदी लगा चुका है.

गुरुवार को आयोग ने सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए कि वो चुनाव नतीजों का किसी भी तरीके से अनुमान नहीं लगाएंगे और न ही राजनीतिक पंडितों और टैरो कार्ड रीडर्स के भविष्यवाणी को किसी भी माध्यम से प्रसारित करेंगे.

आयोग ने कहा है कि चुनाव के समय जब एग्ज़िट पोल पर पाबंदी है तो उस दौरान मीडिया को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का प्रकाशन और प्रसारण करने ने बचना चाहिए.

आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव समाप्त होने के 72 घंटे बाद ही एग्ज़िट पोल प्रसारित किया जा सकता है. ओपिनियन पोल के मामले में वोटिंग के 72 घंटे पहले किसी भी तरह के पोल प्रसारित या प्रकाशित पर पाबंदी है.

निर्वाचन आयोग ने मीडिया संस्थानों को निर्देश भेजा है, जिसमें जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126-ए का जिक्र किया गया है. आयोग ने कहा है कि आयोग द्वारा अधिसूचित की गई समय सीमा के दौरान किसी भी तरीके का एग्ज़िट पोल या चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी किसी भी माध्यम से प्रसारित नहीं की जानी चाहिए.

बता दें इससे पहले भी दैनिक जागरण ने उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले चरण के बाद एग्ज़िट पोल अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया था. द वायर की रिपोर्ट के बाद उसे हटा दिया गया. आयोग ने मामले को संज्ञान में लेते हुए 15 जिलों के चुनाव अधिकारी को मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया गया था. इस संबंध में दैनिक जागरण के संपादक को भी गिरफ्तार किया गया था.